‘सरकार बनने के बाद BJP के खिलाफ कितनी बार बोले?’: एमके स्टालिन ने थलपति विजय पर साधा तीखा निशाना

तमिलनाडु के सियासी मैदान में उपचुनाव के प्रचार अभियान के बीच द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के अध्यक्ष एमके स्टालिन और तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के प्रमुख थलपति विजय के बीच जुबानी जंग चरम पर पहुंच गई है। मदुरंतकम विधानसभा उपचुनाव प्रचार के दौरान विजय द्वारा डीएमके को ‘बुरी ताकत’ (Evil Force) और भाजपा व डीएमके को एक जैसा बताने पर स्टालिन ने तीखा पलटवार किया है। स्टालिन ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के जरिए विजय की राजनीतिक ईमानदारी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि राज्य की सत्ता में आने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ कितनी बार आवाज उठाई और कितने विरोध प्रदर्शन किए। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विजय भाजपा के खिलाफ मौन रहकर क्रांति करने का नाटक कर रहे हैं, जो वास्तव में केंद्र के सामने ‘पूर्ण आत्मसमर्पण’ है।

‘फिल्मों में एक्टिंग छोड़ी, जनता के सामने जारी’: स्टालिन का विजय पर तंज

एमके स्टालिन ने विजय के चुनावी भाषणों पर तंज कसते हुए कहा कि भले ही विजय ने फिल्मों में अभिनय करना छोड़ दिया हो, लेकिन वे जनता के सामने लगातार अदाकारी कर रहे हैं। मदुरंतकम में विजय के दिए गए बयानों का हवाला देते हुए स्टालिन ने कहा कि उन्होंने जनसभा में विजय की ‘डायलॉग डिलीवरी’ देखी है और उनके पास कुछ सीधे सवाल हैं।

स्टालिन ने पूछा:

“सरकार गठन के बाद से आपने भाजपा के खिलाफ कितनी बार अपनी जुबान खोली? आपने उनके खिलाफ कितने जमीनी प्रदर्शन आयोजित किए? क्या भाजपा के खिलाफ आपका यह मौन सचमुच कोई शांत क्रांति है या फिर असल में यह आत्मसमर्पण है?”

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि विधानसभा के पटल पर जब एक सहयोगी मंत्री ने भाजपा के खिलाफ टिप्पणी की थी, तो उस बयान को सदन के रिकॉर्ड से हटाने की मांग करने के लिए सबसे पहले कौन आगे आया था।

‘पवित्र ताकत’ के दावों पर घेरा: अन्नाद्रमुक से आए नेताओं को टिकट देने पर सवाल

विजय द्वारा टीवीके को एक ‘पवित्र ताकत’ (Pure Force) और डीएमके को भ्रष्ट बताने पर स्टालिन ने पूर्व अन्नाद्रमुक (AIADMK) नेताओं को पाले में लाने का मुद्दा उठाया। स्टालिन ने कहा कि मदुरंतकम उपचुनाव में टीवीके ने जिस मरगथम कुमारवेल को अपना उम्मीदवार बनाया है, वे पहले अन्नाद्रमुक की विधायक रह चुकी हैं।

स्टालिन ने तल्ख लहजे में पूछा कि क्या जनता की उंगलियों से चुनावी स्याही मिटने से पहले ही एनडीए खेमे से विधायकों को अपनी ओर खींचना और उन्हें टिकट थमाना ही टीवीके की ‘पवित्र राजनीति’ है? उन्होंने दावा किया कि जनता अब इस अवसरवादिता को भली-भांति समझ चुकी है और प्रचार के दौरान टीवीके प्रत्याशियों से सवाल पूछ रही है।

वीरमणि मामले पर बयान: ‘अपडेटेड स्क्रिप्ट लेकर आएं और अखबार पढ़ें’

चुनावी सभा में विजय द्वारा ‘जेम वीरमणि’ मामले को उठाने और स्टालिन को चुप्पी तोड़ने की चुनौती देने पर भी डीएमके प्रमुख ने करारा जवाब दिया। स्टालिन ने कहा कि वे इस संवेदनशील मामले पर विधानसभा में पहले ही विस्तार से अपनी बात रख चुके हैं।

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे विजय टीवी नहीं देखते और अखबार नहीं पढ़ते। स्टालिन ने कहा:

“क्या आप बिना अपनी स्क्रिप्ट अपडेट किए प्रचार करने आ गए? मैंने इस मामले पर पहले ही स्पष्टीकरण दे दिया है। अगर आप नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़ते, तो आपको पता होता।”

स्टालिन ने यह भी याद दिलाया कि मद्रास उच्च न्यायालय पहले ही इस कानूनी मामले का राजनीतिकरण न करने की सलाह दे चुका है, फिर भी चुनावी लाभ के लिए इसे मंच पर घसीटा जा रहा है।

प्रशासनिक नाकामियों और मर्यादा पर घेरा

स्टालिन ने मौजूदा सरकार के कामकाज पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान शासन केवल डीएमके द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं के नाम बदलकर उन्हें आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि नई सरकार ने जनता को केवल बिजली कटौती, महंगाई, डेंगू और आवश्यक वस्तुओं की किल्लत जैसी नई योजनाएं दी हैं। इसके साथ ही स्टालिन ने अतीत की करूर रैली में हुई भगदड़ की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि डीएमके ने कभी ऐसे त्रासद हादसों पर क्षुद्र राजनीति नहीं की। उन्होंने विजय को आत्ममंथन करने और संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप आचरण व भाषा शैली अपनाने की सलाह दी।

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