
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की बहुचर्चित वॉर-ड्रामा फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ (Maatrubhumi: May War Rest in Peace) को लेकर दर्शकों और ट्रेड एनालिस्ट्स के बीच लंबे समय से भारी उत्सुकता बनी हुई है। पहले ईद 2026 और फिर स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रिलीज के लिए चर्चा में रही यह फिल्म अब तक सिनेमाघरों में दस्तक नहीं दे सकी है। हाल ही में सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया था कि फिल्म की सेंसर बोर्ड (CBFC) स्क्रीनिंग जल्द होने जा रही है और मेकर्स नई रिलीज डेट का ऐलान करने वाले हैं। हालांकि, इंडस्ट्री और प्रोडक्शन से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों ने इन दावों को खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि फिल्म की रिलीज का रास्ता फिलहाल आसान नजर नहीं आ रहा है और यह पेंच काफी गहराई में फंसा हुआ है।
अपूर्व लाखिया के निर्देशन में बनी इस फिल्म में सलमान खान मुख्य भूमिका में हैं, जबकि उनके साथ चित्रांगदा सिंह नजर आने वाली हैं। टीजर और गानों के रिलीज होने के बाद भी फिल्म का सिनेमाघरों तक न पहुंच पाना फैंस को निराश कर रहा है। आखिर वह कौन सी बड़ी वजह है जिसके चलते सलमान खान की यह महत्वाकांक्षी फिल्म रिलीज नहीं हो पा रही है और मामला किस मोड़ पर अटका हुआ है, आइए विस्तार से समझते हैं।
गलवान घाटी विवाद और संवेदनशील ‘चीन कनेक्शन’ बना सबसे बड़ा रोड़ा
फिल्म के रिलीज न हो पाने का सबसे प्राथमिक और गंभीर कारण इसका संवेदनशील भू-राजनीतिक (Geopolitical) विषय है। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट का ऐलान ‘बैटल ऑफ गलवान’ (Battle of Galwan) नाम से किया गया था, जो सीधे तौर पर साल 2020 में भारत और चीन की सेनाओं के बीच लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक सैन्य झड़प पर आधारित है।
फिल्म में सलमान खान 16 बिहार रेजिमेंट के वीर चक्र विजेता शहीद कर्नल बी. संतोष बाबू के प्रेरक किरदार को पर्दे पर जीवंत कर रहे हैं। हालांकि, वास्तविक सैन्य घटनाओं पर आधारित होने के कारण फिल्म में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ हुए संघर्ष और संवेदनशील रणनीतिक घटनाक्रमों का चित्रण किया गया है। भारत और चीन के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा पर राजनयिक वार्ताओं और मौजूदा नाजुक कूटनीतिक संतुलन को देखते हुए रक्षा मंत्रालय और संबंधित सरकारी एजेंसियों ने फिल्म के कुछ विशिष्ट दृश्यों व संवादों को लेकर गहरी चिंता जताई है। यही वजह रही कि पहले इसका नाम बदलकर ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ किया गया, ताकि इसका झुकाव केवल युद्ध के बजाय देशभक्ति और शांति के संदेश पर केंद्रित दिखे, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा और कूटनीतिक पहलुओं को लेकर गतिरोध पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है।
CBFC स्क्रीनिंग और औपचारिक मंजूरी का इंतजार
सेंसर बोर्ड से जुड़ी अफवाहों के बीच सच्चाई यह है कि फिल्म को अभी तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के समक्ष अंतिम समीक्षा के लिए औपचारिक रूप से जमा ही नहीं कराया गया है। नियम के मुताबिक, सैन्य या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्मों के लिए सीबीएफसी सर्टिफिकेशन से पहले रक्षा मंत्रालय से ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) लेना अनिवार्य होता है।
मेकर्स लगातार रक्षा अधिकारियों और सरकारी विभागों के साथ चर्चा के दौर में हैं ताकि उन हिस्सों पर आम सहमति बनाई जा सके जिन पर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। जब तक संबंधित मंत्रालयों से हरी झंडी नहीं मिल जाती, तब तक सीबीएफसी की स्क्रीनिंग मुमकिन नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, आधिकारिक मंजूरी हासिल करने के लिए फिल्म से ‘चीन’ के प्रत्यक्ष संदर्भों और कुछ तीखे टकराव वाले दृश्यों को संपादित या संशोधित करने पर भी विचार किया जा रहा है।
40 दिनों का लंबा रीशूट, वीएफएक्स का काम और बॉक्स ऑफिस क्लैश
भू-राजनीतिक अड़चनों के अलावा फिल्म के निर्माण और तकनीकी पहलुओं ने भी इसकी रिलीज को आगे खिसकाने में भूमिका निभाई है।
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स्क्रिप्ट बदलाव और रीशूट: सूत्रों के मुताबिक, कहानी को ज्यादा संतुलित बनाने और संवेदनशील हिस्सों को ड्रामेटिक तरीके से नया रूप देने के लिए मेकर्स ने लगभग 40 दिनों का लंबा रीशूट शेड्यूल पूरा किया था। इस रीशूट के चलते पोस्ट-प्रोडक्शन का पूरा टाइमलाइन प्रभावित हुआ।
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हाई-एल्टीट्यूड एक्शन और VFX: फिल्म के युद्ध दृश्य शून्य से नीचे के तापमान और लद्दाख के बेहद दुर्गम इलाकों की पृष्ठभूमि पर आधारित हैं। इन सीन्स को यथार्थवादी बनाने के लिए भारी वीएफएक्स (VFX) और साउंड डिजाइन पर बारीक काम किया जा रहा है, जिसे पूरा करने में तकनीकी टीम को अतिरिक्त समय लग रहा है।
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सिनेमाघरों में खाली स्लॉट की कमी: साल 2026 के अंतिम महीनों में बॉक्स ऑफिस का कैलेंडर पहले से ही कई बड़े बजट की अखिल भारतीय (Pan-India) फिल्मों से भरा हुआ है। किसी भी बड़े स्टार की फिल्म को अपनी लागत निकालने के लिए कम से कम दो हफ्तों का खुला और बिना टकराव वाला विंडो चाहिए होता है। ऐसे में जल्दबाजी में अधूरी औपचारिकताओं के साथ फिल्म उतारने का जोखिम निर्माता नहीं लेना चाहते।
अब कब रिलीज होगी फिल्म? 2027 तक टलने के मजबूत आसार
फिल्म से जुड़े जानकारों का मानना है कि निर्माता सलमान खान और उनकी टीम हर संभव प्रयास कर रही है कि सरकारी स्तर पर उठाई गई आपत्तियों का सम्मानजनक समाधान निकाला जाए। यदि बातचीत में सहमति बनने में अधिक समय लगता है, तो ‘मातृभूमि’ की थिएट्रिकल रिलीज अब साल 2027 तक टल सकती है।
इस बीच सलमान खान का पूरा फोकस अपने अन्य प्रोजेक्ट्स पर है। वे हाल ही में ऑन-एयर हुए रियलिटी शो ‘बिग बॉस’ के नए सीजन की शूटिंग के साथ-साथ निर्देशक वामशी पेडिपल्ली की आगामी बड़े बजट की एक्शन फिल्म की तैयारियों में व्यस्त हैं। साफ है कि ‘मातृभूमि’ के बड़े पर्दे पर आने की उल्टी गिनती तभी शुरू होगी जब सेंसर और रक्षा मंत्रालय की टेबल से क्लीयरेंस की अंतिम मुहर लग जाएगी।
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