सिर्फ तंबाकू या शराब नहीं: भारत में हर साल 1.9 लाख लोग पुराने संक्रमणों (इन्फेक्शन्स) के कारण हो रहे कैंसर के शिकार

कैंसर का नाम आते ही आमतौर पर लोगों का ध्यान तंबाकू, बीड़ी-सिगरेट, शराब, खराब जीवनशैली या आनुवंशिकी (जेनेटिक्स) की ओर जाता है। लेकिन वैश्विक मेडिकल जर्नल द लांसेट ऑन्कोलॉजी (The Lancet Oncology) और विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर रिसर्च एजेंसी IARC द्वारा प्रकाशित एक नए अध्ययन ने बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर साल सामने आने वाले कुल कैंसर मामलों में से करीब 1.9 लाख नए केस (12% से अधिक) किसी खराब आदत से नहीं, बल्कि शरीर में लंबे समय तक दबे रहने वाले वायरस और बैक्टीरिया के संक्रमण (Chronic Infections) की वजह से होते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ये संक्रमण शरीर की कोशिकाओं (सेल्स) में वर्षों तक रहकर लगातार सूजन और जेनेटिक बदलाव पैदा करते हैं, जो आगे चलकर जानलेवा ट्यूमर का रूप ले लेते हैं।

1.9 लाख मामलों में कौन से 5 रोगाणु हैं सबसे घातक?

अध्ययन के अनुसार, कुल 12 कार्सिनोजेनिक संक्रमणों का विश्लेषण किया गया, जिनमें से 5 मुख्य रोगाणु लगभग सभी मामलों के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं:

रोगाणु (वायरस / बैक्टीरिया) भारत में वार्षिक मामले किस कैंसर के लिए जिम्मेदार?
HPV (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) 1,00,000+ महिलाओं में सर्वाइकल (बच्चेदानी के मुंह का) कैंसर, गले व मुख का कैंसर।
H. Pylori (हेलिकोबैक्टर पायलोरी) ~47,000 पेट (गैस्ट्रिक) का कैंसर और गंभीर अल्सर।
EBV (एपस्टीन-बार वायरस) ~22,000 गले के ऊपरी हिस्से (नेसोफेरींजल) और लिम्फोमा कैंसर।
Hepatitis B (हेपेटाइटिस बी) ~10,000 क्रोनिक लिवर इन्फेक्शन और लिवर कैंसर (HCC)।
Hepatitis C (हेपेटाइटिस सी) ~5,300 लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर।

HPV और H. पायलोरी का दोहरा प्रहार

  • ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV): भारत में संक्रमण से होने वाले कैंसरों में आधे से ज्यादा हिस्सेदारी अकेले HPV की है। यह महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का प्राथमिक कारण है। चिंता की बात यह है कि शुरुआती सालों में यह कोई लक्षण नहीं दिखाता, जिससे महिलाएं देर से अस्पताल पहुंचती हैं।

  • एच. पायलोरी बैक्टीरिया: यह बैक्टीरिया दूषित पानी और भोजन के जरिए पेट में प्रवेश करता है। यदि एसिडिटी, बदहजमी या पेट के अल्सर का समय पर एंटीबायोटिक इलाज न कराया जाए, तो यह पेट की अंदरूनी परत को नष्ट कर गैस्ट्रिक कैंसर का खतरा बढ़ा देता है।

राहत की बात: इन 1.9 लाख मामलों में से अधिकांश पूरी तरह रोके जा सकते हैं

शोधकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि तंबाकू या आनुवंशिक कैंसर की तुलना में संक्रमण से जुड़े कैंसरों को रोकना सबसे आसान है। इसके लिए केवल जागरूकता और सही समय पर मेडिकल हस्तक्षेप की जरूरत है:

  1. समय पर वैक्सीनेशन (टीकाकरण): 9 से 14 वर्ष की किशोरियों को HPV वैक्सीन और नवजात शिशुओं को हेपेटाइटिस-बी का टीका अनिवार्य रूप से लगवाना चाहिए।

  2. नियमित स्क्रीनिंग: 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को हर 3 से 5 साल में पैप स्मीयर (Pap Smear) या एचपीवी डीएनए टेस्ट कराना चाहिए ताकि कैंसर बनने से पहले ही बदलाव पकड़ में आ जाएं।

  3. पेट की समस्याओं की समय पर जांच: यदि लंबे समय से गैस, सीने में जलन या पेट दर्द बना हुआ है, तो केवल एंटासिड खाकर टालने के बजाय डॉक्टर से एच. पायलोरी की जांच कराएं और एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स लें।

  4. हेपेटाइटिस की स्क्रीनिंग: सुरक्षित रक्त आधान (Blood Transfusion), नई सिरिंज का उपयोग और हेपेटाइटिस बी/सी की जांच लिवर कैंसर के मामलों को रोक सकती है।

इस विषय पर अधिक संक्षेप में समझने के लिए कैंसर केसेस का सच वीडियो देख सकते हैं, जिसमें तंबाकू के अलावा संक्रमण से जुड़े इन कैंसर कारणों को संक्षेप में समझाया गया है।

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