
अफ्रीकी मुल्क सूडान से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। यहां सोने की चाहत में सैकड़ों फीट गहरे गड्ढों में उतरे गरीब मजदूरों के लिए खदान ही काल बन गई। देश के पूर्वी हिस्से में स्थित एक अनियंत्रित सोने की खदान (Gold Mine) के अचानक भरभरा कर ढह जाने से दर्जनों खनिक जिंदा दफन हो गए। राहत और बचाव कार्य शुरू होने के बाद पिछले 24 घंटों के भीतर मलबे से 60 मजदूरों के शव निकाले जा चुके हैं। भारी मिट्टी और पत्थरों के नीचे अभी भी कई मजदूरों के दबे होने की आशंका है, जिसके चलते मृतकों का आंकड़ा और बढ़ने का अंदेशा जताया जा रहा है। इस दिल दहला देने वाले हादसे ने पूरे इलाके में कोहराम मचा दिया है और पीड़ित परिवारों में चीख-पुकार मची हुई है।
अचानक भरभरा कर गिरी खदान, भागने का नहीं मिला मौका
स्थानीय अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह भीषण हादसा लाल सागर (Red Sea) राज्य के तहत आने वाले खनन क्षेत्र में हुआ। यहां सैकड़ों मजदूर पारंपरिक और असुरक्षित तरीकों से सोने के अयस्क की खुदाई कर रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जब मजदूर जमीन के कई मीटर अंदर संकरी सुरंगों में काम कर रहे थे, तभी खदान का ऊपरी हिस्सा भारी कंपन के साथ नीचे आ गिरा। सुरंग का मुहाना और अंदरूनी रास्ते एक ही झटके में भारी चट्टानों और मलबे से पट गए, जिससे अंदर काम कर रहे मजदूरों को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला। अंदर ऑक्सीजन की भारी कमी और टनों वजनी मलबे के दबाव के कारण ज्यादातर लोगों की दम घुटने और दबने से मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
24 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन: अब तक 60 शव बरामद
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन दल और साथी खनिक बचाव कार्य में जुट गए। हालांकि, सुदूर रेगिस्तानी और पहाड़ी इलाका होने के कारण मौके पर भारी मशीनरी और क्रेन पहुंचाने में शुरुआत में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
मलबे को हटाने के लिए बचाव कर्मियों को फावड़ों और हाथों का सहारा लेना पड़ा। पिछले 24 घंटों की लगातार मशक्कत के बाद सर्च टीमों ने एक-एक करके 60 शवों को बाहर निकाला है। निकाले गए शवों की हालत इतनी क्षत-विक्षत है कि उनकी शिनाख्त करना भी मुश्किल हो रहा है। कुछ घायल मजदूरों को जिंदा बाहर निकालकर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत नाजुक बनी हुई है।
सूडान में क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे जानलेवा हादसे?
सूडान में अवैध और अनियंत्रित सोने की खदानों का ढहना कोई नई घटना नहीं है, लेकिन इस हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था की पूरी पोल खोल दी है। इसके पीछे मुख्य रूप से ये कारण जिम्मेदार हैं:
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सुरक्षा मानकों का अभाव: इन खदानों में वेंटिलेशन, आपातकालीन निकास या सुरंगों को सहारा देने वाले लकड़ी/लोहे के पिलर्स का कोई इंतजाम नहीं होता।
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गृहयुद्ध और आर्थिक बदहाली: सूडान में लंबे समय से चल रहे सेना और अर्धसैनिक बलों (RSF) के बीच के खूनी संघर्ष ने देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है। गरीबी और भुखमरी से बचने के लिए आम नागरिक और युवा जान जोखिम में डालकर इन अवैध खदानों में काम करने को मजबूर हैं।
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अवैध खनन माफिया का दबदबा: सूडान अफ्रीका के सबसे बड़े सोना उत्पादक देशों में से एक है, लेकिन यहां के कुल सोने के उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा सरकारी निगरानी के बिना चलने वाली अवैध खदानों से आता है, जहां माफिया मजदूरों की जान की परवाह किए बिना मुनाफा कमाते हैं।
परिजनों का फूटा गुस्सा, सख्त कार्रवाई की मांग
हादसे के बाद खदान क्षेत्र के बाहर पीड़ित मजदूरों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अपने अपनों की तलाश में लोग रोते-बिलखते मलबे के पास बैठे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और खनन माफिया की मिलीभगत पर गहरा आक्रोश जताया है।
मांग की जा रही है कि बिना किसी सुरक्षा मानकों के चल रही ऐसी सभी जानलेवा खदानों को तत्काल सील किया जाए और हादसे के लिए जिम्मेदार खदान मालिकों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो। फिलहाल राहत एवं बचाव अभियान जारी है और मलबे के अंतिम छोर तक पहुंचने की कोशिशें की जा रही हैं।
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