‘हिम्मत दिखाइए और UPI टैक्स वापस लीजिए, मोदी जी…’: राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर तीखा हमला

डिजिटल पेमेंट व्यवस्था और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से जुड़े शुल्कों को लेकर देश में सियासी पारा एक बार फिर गरमा गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने डिजिटल लेन-देन पर कथित तौर पर लगाए जा रहे शुल्कों और मर्चेंट चार्जेस को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक तीखा बयान जारी करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि वे ‘हिम्मत दिखाएं और यूपीआई टैक्स वापस लें’। राहुल ने आरोप लगाया कि जो तकनीक देश के आम नागरिकों, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे व्यापारियों की सुविधा के लिए लाई गई थी, उसे अब सरकार ने वसूली का नया जरिया बना लिया है।

‘नोटबंदी से डिजिटल किया, अब उसी पर टैक्स वसूली’: राहुल गांधी

राहुल गांधी ने सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने पहले तो देश की जनता को नकदी से दूर डिजिटल लेन-देन की ओर धकेला और जब आम जनता पूरी तरह इस व्यवस्था पर निर्भर हो गई, तो उस पर टैक्स का बोझ लाद दिया।

राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा:

“मोदी जी, आपने पहले नोटबंदी की आपदा थोपकर छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ी और सबको डिजिटल लेन-देन के लिए मजबूर किया। अब जब देश का हर गरीब, मजदूर और छोटा दुकानदार यूपीआई का आदी हो गया है, तो आप उस पर टैक्स लगाकर उनकी जेब काट रहे हैं। यह डिजिटल इंडिया नहीं, बल्कि संगठित लूट है। अगर आपमें सचमुच जनहित के फैसले लेने का साहस है, तो हिम्मत दिखाइए और इस जनविरोधी यूपीआई टैक्स को तुरंत वापस लीजिए।”

छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर दोहरी मार का आरोप

कांग्रेस पार्टी और विपक्ष का तर्क है कि यूपीआई पर किसी भी प्रकार का शुल्क या इनडायरेक्ट टैक्स सीधे तौर पर देश के निम्न और मध्यम वर्ग को प्रभावित करेगा।

  • रेहड़ी-पटरी वालों पर संकट: विपक्ष का कहना है कि चाय-पान की दुकान चलाने वाले, फल-सब्जी विक्रेता और छोटे दुकानदार एक-एक रुपये के मुनाफे पर काम करते हैं। यदि डिजिटल लेन-देन पर अतिरिक्त चार्ज लगेगा, तो उनका मुनाफा खत्म हो जाएगा।

  • कैश की ओर वापसी का डर: अर्थशास्त्रियों और विपक्षी नेताओं ने चिंता जताई है कि यदि डिजिटल भुगतान को महंगा किया गया, तो देश में फिर से कैश इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा और कैशलेस भारत की मुहिम को गहरा झटका लगेगा।

  • बैंकों और फिनटेक का दबाव: राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार बड़े कॉरपोरेट्स और वित्तीय संस्थानों के मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए जनता के अधिकारों से समझौता कर रही है।

सरकार और NPCI का क्या रहा है रुख?

गौरतलब है कि यूपीआई पर शुल्कों को लेकर जब भी विवाद छिड़ता है, केंद्र सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की तरफ से यह सफाई दी जाती रही है कि सामान्य उपभोक्ता-से-उपभोक्ता (P2P) और आम ग्राहक द्वारा दुकानदार को किए जाने वाले (P2M) सामान्य यूपीआई लेन-देन पूरी तरह मुफ्त हैं।

हालांकि, प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) जैसे वॉलेट्स के जरिए बड़े मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर लगाए जाने वाले इंटरचेंज चार्ज और बैंक मेंटेनेंस कॉस्ट को लेकर अक्सर भ्रम और असंतोष की स्थिति बन जाती है। विपक्ष इसी मुद्दे को आधार बनाकर सरकार को घेर रहा है कि बैकडोर से जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने की तैयारियां चल रही हैं।

संसद से सड़क तक मुद्दे को भुनाने की तैयारी में विपक्ष

राहुल गांधी के इस आक्रामक हमले के बाद कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन के अन्य घटक दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। विपक्षी दलों का कहना है कि वे इस जनसरोकार से जुड़े मुद्दे को आगामी दिनों में सड़कों और संसद के मंच पर जोर-शोर से उठाएंगे, ताकि सरकार पर इस प्रकार के शुल्कों को पूरी तरह निरस्त करने का दबाव बनाया जा सके।

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