20 हजार कंटेनरों से इस्लामाबाद सील, कंटीले तार और वेल्डिंग की पहरेदारी; अस्पताल भी अलर्ट पर, इमरान खान के ‘फाइनल कॉल’ से क्यों सहमी शरीफ सरकार?

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इस वक्त किसी अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक केंद्र के बजाय एक अभेद्य सैन्य किले या युद्ध क्षेत्र जैसी नजर आ रही है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक और जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के ‘फाइनल कॉल’ विरोध मार्च को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और गृह मंत्री मोहसिन नकवी की सरकार घबराहट और खौफ के चरम पर है। प्रदर्शनकारियों को राजधानी में घुसने से रोकने के लिए सरकार ने पूरे शहर को करीब 20,000 भारी-भरकम शिपिंग कंटेनरों की बहुस्तरीय दीवारों से पूरी तरह सील कर दिया है।

इतना ही नहीं, कंटेनरों को एक-दूसरे के साथ लोहे की छड़ों से वेल्ड कर दिया गया है और उनके ऊपर नुकीले कंटीले तार बिछा दिए गए हैं ताकि कोई उन्हें क्रेन या भारी गाड़ियों से हटा न सके। शहर के सभी एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स बंद कर दिए गए हैं, इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं ठप हैं, धारा 144 लागू है और सरकारी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखकर अतिरिक्त बेड और डॉक्टरों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। आखिर इमरान खान के एक मार्च से शहबाज सरकार इतनी ज्यादा दहशत में क्यों आ गई है?

राजधानी बनी छावनी: 20 हजार कंटेनर, अर्धसैनिक बल और सेना तैनात

इस्लामाबाद और उससे सटे रावलपिंडी (ट्विन सिटीज) को पूरी तरह से देश के बाकी हिस्सों से काट दिया गया है। डी-चौक, रेड जोन, संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट और प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर जाने वाले सभी मुख्य मार्गों पर 3 से 4 लेयर के कंटेनर खड़े किए गए हैं।

  1. पैरामिलिट्री और आर्मी का पहरा: आंतरिक सुरक्षा के लिए पाकिस्तान रेंजर्स, फ्रंटियर कोर (FC), इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी (ICT) पुलिस और पंजाब पुलिस के 20 हजार से ज्यादा जवानों को तैनात किया गया है। इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत सेना को भी स्टैंडबाय पर रखा गया है।

  2. सड़कें ब्लॉक, मेट्रो बस बंद: लाहौर-इस्लामाबाद मोटरवे (M-2), पेशावर-इस्लामाबाद मोटरवे (M-1) और जीटी रोड को कई जगह से खोदकर या कंटेनर रखकर ब्लॉक कर दिया गया है। इस्लामाबाद-रावलपिंडी मेट्रो बस सेवा और सभी सार्वजनिक परिवहन अनिश्चितकाल के लिए बंद हैं।

  3. अस्पतालों में इमरजेंसी: इस्लामाबाद के प्रमुख सरकारी अस्पतालों जैसे पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) और पॉलीक्लिनिक अस्पताल में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं, रक्त की थैलियां (Blood Units) और आंसू गैस के असर से निपटने वाली दवाओं का अतिरिक्त स्टॉक जमा किया गया है।

खौफ की असल वजह: इमरान खान की ‘फाइनल कॉल’ और ‘डू ऑर डाई’ का ऐलान

अदियाला जेल में बंद 72 वर्षीय इमरान खान ने अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और नेताओं को इसे आर-पार की लड़ाई यानी ‘डू ऑर डाई’ (करो या मरो) का मार्च करार दिया है। इमरान खान ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, पीटीआई कार्यकर्ता इस्लामाबाद के डी-चौक से वापस नहीं लौटेंगे।

पीटीआई की प्रमुख मांगें हैं:

  • 8 फरवरी 2024 के आम चुनावों में हुए कथित ‘जनादेश की चोरी’ को वापस करना और चुराई गई सीटों का ऑडिट।

  • इमरान खान सहित जेल में बंद सभी पीटीआई नेताओं और कार्यकर्ताओं की बिना शर्त रिहाई।

  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सीमित करने वाले हालिया 26वें संविधान संशोधन को रद्द करना।

खैबर पख्तूनख्वा का सरकारी अमला और बुशरा बीबी की सीधी अगुवाई

शहबाज शरीफ और पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान (एकीकृत व्यवस्था) के डर की सबसे बड़ी वजह यह है कि खैबर पख्तूनख्वा (KP) प्रांत में पीटीआई की पूर्ण बहुमत की सरकार है। केपी के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर पूरी सरकारी मशीनरी, भारी क्रेनें, बुलडोजर, एंबुलेंस और पुलिस फोर्स के काफिले के साथ इस्लामाबाद की ओर कूच करने का ऐलान कर चुके हैं।

इसके साथ ही, इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी जेल से रिहा होने के बाद पहली बार इस आंदोलन की सीधी कमान संभाल रही हैं। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि जो भी पीटीआई नेता अपने-अपने क्षेत्र से कार्यकर्ताओं की बड़ी भीड़ लेकर नहीं पहुंचेगा, उसे पार्टी में कोई जगह नहीं मिलेगी। बुशरा बीबी और गंडापुर की जोड़ी ने आम कार्यकर्ताओं में एक नया सियासी जोश भर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय साख और गिरती अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा

शहबाज शरीफ सरकार इस वक्त आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता के साथ-साथ बेहद नाजुक आर्थिक दौर से गुजर रही है। पाकिस्तान पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कर्ज और मित्र देशों (सऊदी अरब, यूएई, चीन) की वित्तीय मदद पर टिका हुआ है।

राजधानी में हिंसक झड़पें, इंटरनेट ब्लैकआउट और शहरों की पूर्ण नाकेबंदी से वैश्विक स्तर पर यह संदेश जा रहा है कि पाकिस्तान की सरकार का अपनी ही जनता और राजधानी पर नियंत्रण नहीं है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात से भी डरी हुई हैं कि यदि लाखों की भीड़ रेड जोन में घुस गई और 9 मई 2023 जैसे हालात दोबारा बन गए, तो सरकार के पास इस्तीफा देने या पूरी तरह सेना के हाथों में सत्ता सौंपने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। कंटेनरों की यह अभूतपूर्व दीवार शहबाज सरकार की ताकत का नहीं, बल्कि उसकी गहरी राजनीतिक असुरक्षा और इमरान खान की लोकप्रियता के खौफ का खुला प्रमाण बन चुकी है।

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