
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज में आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम में वकीलों को संबोधित करते हुए आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में अधिवक्ताओं के बीच पहुंचे डिप्टी सीएम ने रोचक और न्यायिक अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि हर पांच वर्ष में जनता की अदालत में जाते हैं। आप सबका मुकदमा लड़ते हैं, और हम 2027 का मुकदमा आपकी अदालत में छोड़कर जा रहे हैं। हमें पूरा भरोसा है कि सरकार के अच्छे कार्यों को आपका समर्थन, न्याय और भरपूर आशीर्वाद मिलेगा।”
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली की मौजूदगी में वकीलों के कल्याण के लिए कई युगांतरकारी घोषणाएं भी की गईं। मंच से जहां सरकार के विकास और सुरक्षा मॉडल को रेखांकित किया गया, वहीं डिप्टी सीएम ने वकीलों को समाज का सबसे प्रबुद्ध वर्ग बताते हुए 2027 की चुनावी लड़ाई में उनका साथ मांगा।
पिछली सरकारों पर हमला: ‘पहले केवल कागजों पर था कानून का राज’
प्रदेश की कानून-व्यवस्था का उल्लेख करते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्षी दलों और पिछली सरकारों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में कानून का राज केवल कागजों तक सीमित था, जबकि जमीनी हकीकत यह थी कि प्रदेश में गुंडाराज और माफियाओं का बोलबाला था।
डिप्टी सीएम ने कहा कि कभी प्रयागराज भी इस माफिया तंत्र और आपराधिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ था। लेकिन भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रदेश में अपराधियों के हौसले पस्त किए गए हैं। आज योगी सरकार की नीति बिल्कुल साफ और पारदर्शी है—”निर्दोष को छेड़ा नहीं जाएगा और दोषी को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में औपनिवेशिक काल के पुराने कानूनों को हटाकर न्याय-केंद्रित नए आपराधिक कानूनों को लागू किया गया है, जिससे आम नागरिक का न्याय प्रणाली पर भरोसा कई गुना बढ़ा है।
‘ईज ऑफ जस्टिस’ और अधिवक्ताओं की भूमिका की सराहना
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार भले ही नीतियां और कानून बनाती है, लेकिन उस कानून का वास्तविक लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने में अधिवक्ता एक मजबूत सेतु की भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने बार और बेंच के समन्वय की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि ‘ईज ऑफ लिविंग’ के साथ-साथ आज देश और प्रदेश में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल व्यवस्था के जरिए ‘ईज ऑफ जस्टिस’ को गति दी जा रही है। सरकार का संकल्प अधिवक्ताओं को पूरा मान-सम्मान, पूर्ण सुरक्षा और अत्याधुनिक कार्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है ताकि न्याय की प्रक्रिया सुलभ, पारदर्शी और समयबद्ध हो सके।
वकीलों के लिए बड़े उपहार: ₹5 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा और कल्याण निधि में बढ़ोतरी
इस ऐतिहासिक अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अधिवक्ताओं के हित में कई बड़ी कल्याणकारी योजनाओं की सौगात दी गई:
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₹5 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा: प्रदेश के हाईकोर्ट और जिला अदालतों में नियमित वकालत करने वाले अधिवक्ताओं को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा बीमा योजना से जोड़ा जाएगा।
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अधिवक्ता कल्याण निधि में भारी इजाफा: अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 5 लाख रुपये कर दिया गया है। साथ ही दिवंगत वकीलों के आश्रितों को मिलने वाली सहायता राशि की पात्रता आयु सीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष कर दी गई है।
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राज्य विधि अधिकारियों को डिजिटल उपकरण: मुकदमों की त्वरित मॉनिटरिंग और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे।
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मानदेय में 50 फीसदी से अधिक की वृद्धि: जिला अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सरकार का पक्ष रखने वाले विधि अधिकारियों की फीस में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की गई है।
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चैंबर सुविधाओं में सहयोग: 10 हजार से अधिक वकीलों के चैंबर में आधुनिक फर्नीचर और जरूरी उपकरणों की व्यवस्था के लिए भी शासन पूरा सहयोग प्रदान करेगा।
2027 चुनाव को लेकर अधिवक्ताओं की अदालत में दांव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रयागराज हाईकोर्ट और जिला बार में वकीलों की संख्या लाखों में है, जिनका पूरे प्रदेश के जनमानस पर गहरा प्रभाव रहता है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य द्वारा न्यायिक अंदाज में “2027 का मुकदमा आपकी अदालत में छोड़कर जा रहे हैं” कहना सीधे तौर पर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए प्रबुद्ध वर्ग को साधने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने अपने कार्यकाल में निष्पक्षता, सुरक्षा और न्याय को प्राथमिकता दी है, और इसी आधार पर वे जनता व वकीलों की अदालत से न्यायपूर्ण समर्थन की उम्मीद रखते हैं।
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