
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षक अभ्यर्थियों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर फूट पड़ा है। 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में लंबे समय से नियुक्ति और कटऑफ के नियमों में राहत की मांग कर रहे सैकड़ों अभ्यर्थियों ने उप मुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) केशव प्रसाद मौर्य के सात कालीदास मार्ग स्थित सरकारी आवास का अचानक घेराव कर दिया। हाथों में पोस्टर, बैनर और मांग पत्र लिए पहुंचे अभ्यर्थियों ने आवास के मुख्य द्वार के सामने बैठकर शासन और बेसिक शिक्षा विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। अचानक हुए इस प्रदर्शन से वीआईपी सुरक्षा क्षेत्र में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में भारी पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया।
अचानक केशव मौर्य के आवास पहुंचे अभ्यर्थी, धरने पर बैठे
सुबह के समय प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 68,500 शिक्षक भर्ती के आरक्षित व अन्य प्रभावित अभ्यर्थी राजधानी लखनऊ पहुंचे। सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देते हुए बड़ी संख्या में युवा सीधे उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास के बाहर जमा हो गए। अभ्यर्थियों का कहना था कि वे पिछले कई वर्षों से लगातार शासन, बेसिक शिक्षा मंत्री और आला अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल कोरे आश्वासन मिले हैं।
गुस्साए अभ्यर्थियों ने आवास के बाहर सड़क पर बैठकर ‘हमें न्याय दो’, ‘रिक्त पदों पर नियुक्ति करो’ और ‘शिक्षक भर्ती में भेदभाव बंद करो’ जैसे नारों के साथ विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक उप मुख्यमंत्री खुद बाहर आकर उनकी बात नहीं सुनेंगे और कोई ठोस लिखित आश्वासन नहीं देंगे, वे वहां से नहीं हटेंगे।
कटऑफ अंक और रिक्त 22 हजार पदों को भरने का विवाद
इस पूरे विवाद की जड़ 2018 में शुरू हुई 68,500 शिक्षक भर्ती परीक्षा के नियम और कटऑफ अंक हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार, परीक्षा के बाद शासन ने उत्तीर्ण अंक (कटऑफ) में बदलाव किया था, जिसे लेकर मामला हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक गया। इस भर्ती प्रक्रिया में लगभग 22,000 से अधिक पद खाली रह गए थे।
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
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आरक्षित वर्ग (ओबीसी, एससी, एसटी) और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम अर्हक अंक (पासिंग मार्क्स) को 30 और 33 प्रतिशत किया जाए, जैसा कि भर्ती के शुरुआती शासनादेश में प्रस्तावित था।
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भर्ती में जो 22,000 से अधिक पद खाली पड़े हैं, उन्हें योग्य अभ्यर्थियों की मेरिट डाउन करके भरा जाए।
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69,000 शिक्षक भर्ती विवाद के साथ-साथ 68,500 भर्ती के पीड़ित अभ्यर्थियों के अधिकारों की भी समीक्षा कर उन्हें बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति पत्र जारी किया जाए।
पुलिस से तीखी नोकझोंक, घसीटकर इको गार्डन ले जाई गई भीड़
डिप्टी सीएम आवास जैसे अति-संवेदनशील सुरक्षा क्षेत्र में अभ्यर्थियों के धरने पर बैठते ही पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। मौके पर पहुंचे एसीपी और भारी संख्या में पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और सड़क खाली करने की अपील की। जब अभ्यर्थी अपनी मांगों पर अड़े रहे और हटने से इनकार कर दिया, तो पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।
महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों ने अभ्यर्थियों को जबरन उठाकर पुलिस वैन और रोडवेज बसों में भरना शुरू किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और खींचतान देखने को मिली। कई अभ्यर्थी जमीन पर लेट गए, जिन्हें पुलिस ने घसीटकर हटाया। इसके बाद सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर धरना प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल ‘इको गार्डन’ भेज दिया गया।
‘अधिकारियों की हीलाहवाली ने बर्बाद किया भविष्य’— अभ्यर्थियों का छलका दर्द
इको गार्डन पहुंचे अभ्यर्थियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि वे पात्रता परीक्षा (TET) और शिक्षक भर्ती परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। अभ्यर्थियों ने कहा, “हमने अपनी मेहनत से परीक्षा पास की, लेकिन अधिकारियों की कानूनी उलझनों और गलत नीतियों की वजह से हमारी जिंदगी के कीमती साल बर्बाद हो रहे हैं। कोर्ट के कई आदेशों के बावजूद बेसिक शिक्षा परिषद के अधिकारी फाइलें दबाकर बैठे हैं।” अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी जायज मांगों पर निर्णय नहीं लिया, तो वे पूरे प्रदेश में बड़ा आंदोलन छेड़ने को बाध्य होंगे।
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