
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM), मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन व कांग्रेस के बढ़ते हमलों के बीच असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने बड़ा पलटवार किया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा बैलेट पेपर से चुनाव कराने की पुरानी मांग पर हुंकार भरते हुए हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि वे बैलेट पेपर से दोबारा चुनाव के मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि, अपनी इस सहमति के साथ उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी के सामने एक ऐसी राजनीतिक शर्त रख दी है, जिसने विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है।
‘पहले अपनी सरकारों से दिलाएं इस्तीफा’: हिमंत का तीखा प्रहार
गुवाहाटी में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने राहुल गांधी और कांग्रेस के दोहरे मापदंडों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “अगर राहुल गांधी को ईवीएम पर इतना ही अविश्वास है और वे मुख्य चुनाव आयुक्त पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगा रहे हैं, तो कर्नाटक, तेलंगाना और केरल (जहां विपक्ष मजबूत स्थिति में रहा) की सरकारों को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। क्या वे सरकारें भी उसी व्यवस्था और उन्हीं चुनाव आयुक्तों के कार्यकाल में नहीं चुनी गईं? राहुल गांधी पहले अपने मुख्यमंत्रियों का इस्तीफा दिलवाएं, मैं असम में कल ही बैलेट पेपर से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं। तब देश भी मानेगा कि कांग्रेस अपने सिद्धांतों पर खरी उतर रही है।”
‘जीतें तो ईवीएम सही, हारें तो वोट चोरी’: कांग्रेस के रुख पर तंज
असम के सीएम ने कांग्रेस की रणनीति को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब कांग्रेस हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक या तेलंगाना में जीत दर्ज करती है, तब लोकतंत्र और ईवीएम बिल्कुल सुरक्षित रहते हैं। लेकिन जैसे ही किसी राज्य में जनादेश भाजपा या एनडीए के पक्ष में आता है, तो ठीकरा संवैधानिक संस्थाओं, चुनाव आयोग और ईवीएम पर फोड़ दिया जाता है। सरमा ने आरोप लगाया कि दिल्ली की सड़कों पर सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने वाले विपक्षी दलों के पास कोई ठोस जनसमर्थन नहीं बचा है, इसलिए वे संवैधानिक संस्थाओं की साख गिराकर देश में अविश्वास और अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
मतदाता सूची के ‘SIR’ (विशेष गहन पुनरीक्षण) का किया पुरजोर समर्थन
चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों का जवाब देते हुए हिमंत बिस्व सरमा ने इस कदम का मजबूती से बचाव किया। उन्होंने कहा कि असम, पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे सीमावर्ती राज्यों में बड़े पैमाने पर अवैध घुसपैठ के कारण जनसांख्यिकी (Demography) में तेजी से बदलाव आया है। देश के वास्तविक नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए हर पांच साल में मतदाता सूचियों का सघन ऑडिट और पुनरीक्षण होना अनिवार्य है। सरमा ने सवाल किया कि अगर मतदाता सूची से अवैध और फर्जी नामों को बाहर निकाला जा रहा है, तो कांग्रेस को इससे तकलीफ क्यों हो रही है?
13 से 31 अक्टूबर तक असम भर में शांति रैलियों का ऐलान
राहुल गांधी और विपक्ष के हमलों के जवाब में भाजपा भी अब आक्रामक रुख अपनाने जा रही है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि 13 से 31 अक्टूबर तक असम के सभी जिला मुख्यालयों में शांतिपूर्ण रैलियां और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी। इन रैलियों के जरिए जनता को यह बताया जाएगा कि किस तरह विदेशी शक्तियों और विपक्ष द्वारा भारतीय लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने की साजिशें रची जा रही हैं। हिमंत बिस्व सरमा के इस पलटवार के बाद गेंद अब पूरी तरह कांग्रेस के पाले में है कि क्या वह अपने शासित राज्यों में इस्तीफा देकर बैलेट पेपर की इस चुनौती को स्वीकार करने का साहस जुटा पाती है या नहीं।
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