कांग्रेस के सुप्रीम कोर्ट मार्च में CJP के न दिखने पर बोले आशुतोष रांका, BJP पर साधा निशाना

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ दिल्ली की सड़कों पर तेज हुए सियासी संग्राम के बीच विपक्षी दलों की एकजुटता को लेकर सवाल उठने लगे थे। जब कांग्रेस और विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर विरोध मार्च निकाला, तो उसमें सोशल मीडिया से जमीन तक आंदोलन छेड़ने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का कोई बड़ा चेहरा नजर नहीं आया। इस गैर-मौजूदगी को लेकर जब राजनीतिक हलकों में सवाल उठे, तो सीजेपी के प्रमुख नेता और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सामने आकर पूरी स्थिति स्पष्ट की और विपक्ष में फूट के दावों को खारिज कर दिया।

‘एक साथ काम करने का मतलब एक ही मंच पर होना नहीं’: रांका का जवाब

कांग्रेस के मार्च में CJP नेताओं के शामिल न होने के सवाल पर आशुतोष रांका ने कहा कि जो भी व्यक्ति या राजनीतिक दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता की मांग कर रहा है, वे उनके साथ हैं।

उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा, “किसी के साथ काम करने का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता कि दोनों एक ही प्लेटफॉर्म पर और एक ही समय पर मौजूद हों। आंदोलन इस तरह से नहीं चलते। हमारे एजेंडे (संविधान और निष्पक्ष चुनाव) के साथ जो भी खड़ा है, हम उसके रुख का समर्थन करते हैं।” रांका ने कहा कि विरोध के कई मोर्चे हो सकते हैं और सरकार पर चारों तरफ से दबाव बनना चाहिए।

‘बीजेपी की फूट डालने की कोशिश’: नैरेटिव पर पलटवार

आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल (BJP) जानबूझकर ऐसा नैरेटिव गढ़ने में जुटा है कि 10 अक्टूबर को सीजेपी के जंतर-मंतर वाले प्रदर्शन में कांग्रेस नहीं थी और 12 अक्टूबर के विपक्षी मार्च में सीजेपी शामिल नहीं हुई।

रांका ने कहा, “बीजेपी बुरी तरह डरी हुई है और इसीलिए वह विपक्षी दलों और नागरिक आंदोलनों के बीच दरार दिखाने की कोशिश कर रही है। हमारा मानना है कि लड़ाई का मकसद एक है। सरकार पर हर तरफ से चौतरफा दबाव बनाया जाना जरूरी है ताकि चुनाव आयोग की जवाबदेही तय हो सके।”

हिरासत और जंतर-मंतर पर टकराव

गौरतलब है कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान आशुतोष रांका, अभिजीत दीपके और सौरव दास सहित सीजेपी के प्रमुख नेताओं को पुलिस ने एयरपोर्ट व अन्य स्थानों से हिरासत में ले लिया था। इसके बाद 12 अक्टूबर को सीजेपी नेताओं ने संसद मार्ग थाने पहुंचकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। वहीं, 13 अक्टूबर की सुबह जब जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने के आदेश के खिलाफ सीजेपी नेताओं ने फिर से वहां पहुंचकर तिरंगा लहराया और नारेबाजी की, तो पुलिस ने रांका और सौरव दास को फिर से हिरासत में ले लिया।

रांका का कहना है कि सीजेपी अपनी स्वतंत्र रणनीति के तहत युवाओं और आम नागरिकों को लामबंद कर रही है, जबकि विपक्षी राजनीतिक दल अपने स्तर पर संसद से सड़क तक आवाज उठा रहे हैं। दोनों का अंतिम लक्ष्य लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना है।

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