‘नीले ड्रम’ कांड में मौत की सजा पाने वाली मुस्कान पहुंची हाईकोर्ट की शरण में, मांगी कानूनी मदद

उत्तर प्रदेश के मेरठ के सनसनीखेज ‘नीले ड्रम’ हत्याकांड में अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद मुख्य दोषी मुस्कान ने अब उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) में अपील दायर करने का फैसला लिया है। जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा मुकर्रर की गई मृत्युदंड की सजा के खिलाफ मुस्कान ने जेल प्रशासन के जरिए विधिक सेवा प्राधिकरण से निशुल्क कानूनी सहायता (लीगल एड) की मांग की है। मुस्कान का कहना है कि आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह निजी वकील रखने में असमर्थ है, इसलिए उसे सरकारी खर्च पर हाईकोर्ट में अपनी पैरवी के लिए अनुभवी वकील मुहैया कराया जाए। इस हत्याकांड की बर्बरता ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और अब सजा के खिलाफ हाईकोर्ट जाने के कदम ने इस मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

जेल प्रशासन से सरकारी वकील और कानूनी दस्तावेजों की मांग

चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में बंद मुस्कान ने जेल अधिकारियों को प्रार्थना पत्र सौंपते हुए अदालत के फैसले की प्रमाणित प्रति और हाईकोर्ट में अपील दायर करने के लिए आवश्यक विधिक सहायता मांगी है। जेल नियमों और संविधान के तहत हर कैदी को उच्च अदालत में अपील करने का विधिक अधिकार प्राप्त है। यदि कोई कैदी वकील का खर्च उठाने में असमर्थ होता है, तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से उसे पैनल का वकील उपलब्ध कराया जाता है। जेल प्रशासन ने मुस्कान के प्रार्थना पत्र को संज्ञान में लेते हुए आवश्यक औपचारिकताओं को आगे बढ़ा दिया है, ताकि नियत समय सीमा के भीतर हाईकोर्ट में अपील की याचिका दायर की जा सके।

क्या था खौफनाक ‘नीला ड्रम’ हत्याकांड, जिसने दहला दिया था देश

यह पूरा मामला मेरठ में सामने आया था, जहां अवैध संबंधों और साजिश के चलते बेहद बेरहमी से हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, मुस्कान ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही पति की निर्मम हत्या कर दी थी। इतना ही नहीं, शव को ठिकाने लगाने और सबूत मिटाने के लिए शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए थे और उन्हें एक बड़े नीले प्लास्टिक के ड्रम में बंद करके केमिकल और नमक डाल दिया गया था ताकि बदबू न फैले। जब कई दिनों बाद इस नीले ड्रम से शव के अवशेष बरामद हुए, तो पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के रोंगटे खड़े हो गए थे। पुलिस ने तेजी से जांच पूरी करते हुए वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत में मजबूत चार्जशीट दाखिल की थी।

अदालत ने माना था ‘रेयर ऑफ रेयरेस्ट’, सुनाई थी फांसी की सजा

अदालत ने सुनवाई के दौरान मामले की नृशंसता, पूर्व नियोजित साजिश और अपराध की गंभीरता को देखते हुए इसे ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (रेयरेस्ट ऑफ रेयर) श्रेणी का अपराध करार दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी की थी कि इस तरह का अमानवीय कृत्य समाज में किसी भी तरह की दया का पात्र नहीं हो सकता। इसके बाद अदालत ने मुस्कान और उसके सहयोगी को फांसी यानी मृत्युदंड की सख्त सजा सुनाई थी। कानूनी जानकारों के अनुसार, सत्र न्यायालय द्वारा दी गई फांसी की सजा पर अमल तभी हो सकता है जब हाईकोर्ट उस पर अपनी पुष्टि (डेथ रेफरेंस कन्फर्मेशन) की मुहर लगाए। ऐसे में अब हाईकोर्ट में दोनों पक्षों के बीच कानूनी तर्कों और साक्ष्यों की दोबारा सूक्ष्म समीक्षा होगी।

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