
शारदीय नवरात्रि की षष्ठी तिथि का दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की उपासना के लिए समर्पित होता है। महर्षि कात्यायन की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया था, इसी कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। मां कात्यायनी को अमोघ फलदायिनी और महिषासुरमर्दिनी के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रज की गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए कालिंदी तट पर मां कात्यायनी की ही पूजा की थी। यही वजह है कि जिन जातकों के विवाह में बाधाएं आ रही हों या कुंडली में बृहस्पति व शुक्र कमजोर हों, उनके लिए षष्ठी तिथि की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
आज का विस्तृत पंचांग और ग्रह स्थिति
नवरात्रि के पावन पर्व पर पंचांगीय गणनाओं और शुद्ध ग्रह स्थिति के अनुसार आज का दिन साधना और जप के लिए विशेष फलदायी है:
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संवत व मास: विक्रम संवत 2083, आश्विन मास, शुक्ल पक्ष
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तिथि: षष्ठी तिथि
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दिन/वार: शुक्रवार (मां दुर्गा और शुक्र ग्रह की उपासना के लिए अत्यंत शुभ दिन)
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नक्षत्र: मूल नक्षत्र (उपरांत पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र)
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योग: शोभन/सुकर्मा योग
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करण: कौलव उपरांत तैतिल
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चंद्र राशि: धनु राशि (गुरु के स्वामित्व वाली राशि)
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सूर्य राशि: कन्या राशि (उपरांत तुला संक्रांति की ओर अग्रसर)
आज के शुभ और मांगलिक मुहूर्त
मां कात्यायनी की पूजा और घट पर नई ज्योत प्रज्वलित करने के लिए शुभ मुहूर्तों का विशेष महत्व है:
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:42 से प्रातः 05:32 तक (ध्यान और मंत्र साधना के लिए सर्वोत्तम)
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प्रातःकालीन पूजा मुहूर्त: प्रातः 06:23 से प्रातः 09:15 तक
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अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:44 से दोपहर 12:30 तक (सभी प्रकार के शुभ और नए कार्यों के लिए श्रेष्ठ)
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विजय मुहूर्त: दोपहर 02:02 से दोपहर 02:48 तक
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गोधूलि मुहूर्त: सायं 05:49 से सायं 06:14 तक (शाम की आरती का पावन समय)
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अमृत काल: दोपहर 01:10 से दोपहर 02:45 तक
आज के अशुभ मुहूर्त: इन समयों में न करें शुभ कार्य
शास्त्रों के अनुसार, अशुभ काल में किए गए संकल्प या शुभ कार्यों में विघ्न आने की आशंका रहती है:
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राहुकाल: पूर्वाह्न 10:40 से दोपहर 12:06 तक (इस दौरान कोई नया संकल्प या मांगलिक कार्य आरंभ न करें)
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यमगण्ड काल: दोपहर 03:00 से सायं 04:26 तक
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गुलिक काल: प्रातः 07:49 से प्रातः 09:15 तक
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दुर्मुहूर्त: प्रातः 08:42 से प्रातः 09:28 तक
मां कात्यायनी का दिव्य स्वरूप और शहद के भोग का विशेष महत्व
मां कात्यायनी का स्वरूप स्वर्ण के समान चमकीला और तेजवान है। देवी की चार भुजाएं हैं; दाहिने ऊपरी हाथ में अभय मुद्रा और निचले हाथ में वर मुद्रा है, जबकि बाएं ऊपरी हाथ में चमचमाती तलवार और निचले हाथ में कमल का पुष्प सुशोभित है। मां सिंह की सवारी करती हैं और इनका संबंध आज्ञा चक्र से माना गया है।
मां कात्यायनी की पूजा में शहद का भोग लगाना विशेष रूप से अनिवार्य माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, मां कात्यायनी को शुद्ध शहद या शहद से बनी मिठाई अर्पित करने से जातक को आरोग्य, कांति और आकर्षण की प्राप्ति होती है। इसके अलावा देवी को लाल गुड़हल या पीले कनेर का फूल अर्पित करना अति उत्तम फल देता है।
मां कात्यायनी का सिद्ध पूजन मंत्र
पूजा के समय पीले या लाल वस्त्र धारण करके पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके इस मंत्र का कम से कम 108 बार जप करना चाहिए:
मंत्र: चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
शीघ्र विवाह और सुयोग्य जीवनसाथी की कामना के लिए कन्याएं इस मंत्र का जप कर सकती हैं:
कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥
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