‘मुलायम ने रामभक्तों पर गोली चलवाई तो पद्म विभूषण क्यों दिया?’ लखनऊ में सवाल सुनकर असहज हुए राजनाथ सिंह, टालते हुए खत्म की प्रेस कॉन्फ्रेंस

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश मुख्यालय पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई, जब केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से समाजवादी पार्टी के दिवंगत संरक्षक मुलायम सिंह यादव को मरणोपरांत दिए गए पद्म विभूषण सम्मान को लेकर सीधा सवाल पूछ लिया गया। प्रेस वार्ता के दौरान राजनाथ सिंह कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठजोड़ पर तीखा हमला बोल रहे थे और उन्होंने 1990 में अयोध्या में रामभक्तों (कारसेवकों) पर पुलिस गोलीबारी की घटना का उल्लेख कर कांग्रेस पर समर्थन देने का आरोप लगाया। इसी संदर्भ में जब एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि यदि मुलायम सिंह यादव की सरकार ने रामभक्तों पर गोलियां चलवाई थीं, तो फिर केंद्र की मोदी सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से क्यों नवाजा, तो रक्षा मंत्री कुछ पलों के लिए ठिठक गए और सवाल को टालते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त कर दी।

‘कांग्रेस के तीन अक्षम्य अपराध’: राजनाथ ने साधा था सपा और कांग्रेस पर निशाना

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विपक्ष पर बेहद आक्रामक नजर आ रहे थे। उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी ने देश में तीन ऐसे अक्षम्य अपराध किए हैं जिनके लिए उसे कभी क्षमा नहीं किया जा सकता—पहला 1975 में आपातकाल (इमरजेंसी) लगाना, दूसरा 1984 में सिख विरोधी दंगे और तीसरा 1990 में उत्तर प्रदेश में रामभक्तों पर गोली चलवाने वाली सरकार को बाहर से समर्थन देकर बचाना।

राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए यह भी कहा कि कांग्रेस पिछले 37 वर्षों से उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी समाजवादी पार्टी के बैसाखी और सहयोग के बिना अकेले दम पर रायबरेली लोकसभा सीट भी जीत सकते हैं।

जब पत्रकार के तीखे सवाल से सन्न रह गए रक्षा मंत्री

राजनाथ सिंह जब अपना वक्तव्य पूरा कर प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त करने ही वाले थे, तभी एक पत्रकार ने खड़े होकर तीखा सवाल दाग दिया। पत्रकार ने पूछा: “जब मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों और रामभक्तों पर गोलियां चलवाई थीं, तो फिर आपकी सरकार ने उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण सम्मान क्यों दिया?”

सवाल सुनते ही मंच पर कुछ देर के लिए सन्नाटा पसर गया। राजनाथ सिंह, जो उठने की तैयारी में थे, दोबारा रुके और सवाल को सुना। मंच पर उनके साथ उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी भी मौजूद थे। सवाल का कोई सीधा या तार्किक जवाब देने के बजाय रक्षा मंत्री ने सिर्फ इतना कहा—“चलिए, देखते हैं; उसके कई कारण थे। बहुत-बहुत धन्यवाद।” इसके तुरंत बाद उन्होंने अपनी फाइलें समेटीं और हाथ जोड़कर प्रेस वार्ता समाप्त कर दी।

1990 की गोलीबारी और 2023 में मिला पद्म विभूषण: क्या है पृष्ठभूमि?

उल्लेखनीय है कि अक्टूबर-नवंबर 1990 में जब विश्व हिंदू परिषद और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन चरम पर था, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के प्रशासन ने विवादित स्थल की सुरक्षा के नाम पर अयोध्या में सख्त पाबंदियां लगाई थीं। कर्फ्यू तोड़कर ढांचे की ओर बढ़ रहे हजारों कारसेवकों पर पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी में कई कारसेवकों की जान गई थी। उस दौर में भाजपा और विहिप ने मुलायम सिंह यादव पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का खुला आरोप लगाया था और यह मुद्दा वर्षों तक उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र बना रहा।

10 अक्टूबर 2022 को मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने गणतंत्र दिवस 2023 की पूर्व संध्या पर उन्हें सार्वजनिक मामलों (Public Affairs) में योगदान के लिए मरणोपरांत ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित करने की घोषणा की थी। 5 अप्रैल 2023 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से यह सम्मान ग्रहण किया था। उस समय भी हिंदूवादी संगठनों और भाजपा के कई समर्थकों ने इस फैसले पर हैरानी जताई थी।

सियासी हलकों में चर्चा: बैकफुट पर क्यों आई बीजेपी?

लखनऊ की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी हलकों में नई बहस छिड़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा जब भी राम मंदिर आंदोलन और 1990 की गोलीबारी को लेकर समाजवादी पार्टी पर हमलावर होती है, तो मुलायम सिंह यादव को दिए गए पद्म विभूषण का मुद्दा उसके आक्रामक रुख की धार को कुंद कर देता है। रक्षा मंत्री का सवाल का सीधा जवाब न देकर प्रेस वार्ता समाप्त करना यह दर्शाता है कि यह मुद्दा भाजपा के लिए कूटनीतिक और वैचारिक रूप से असहज करने वाला बना हुआ है।

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