दशहरा 2026 पर कार-बाइक की पूजा कब करें? नोट कर लें वाहन पूजन का सबसे सटीक विजय मुहूर्त और 5 आसान नियम

सनातन धर्म में विजयादशमी यानी दशहरे के पावन दिन को सर्वसिद्धिदायक और अबूझ मुहूर्त माना गया है। इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम द्वारा लंकापति रावण का संहार करने और मां जगदंबा द्वारा महिषासुर का वध करने की स्मृति में अधर्म पर धर्म की विजय का उत्सव मनाया जाता है। महाभारत काल में पांडवों ने भी अज्ञातवास समाप्त होने पर अपने अस्त्र-शस्त्रों और रथों का पूजन इसी दिन किया था। प्राचीन काल में जहां राजा-महाराजा और क्षत्रिय योद्धा युद्ध में विजय के लिए अपने घोड़ों, हाथियों और रथों की विधिवत पूजा करते थे, वहीं आधुनिक युग में यह परंपरा हमारे दैनिक जीवन के पहियों यानी वाहनों (कार, मोटरसाइकिल, स्कूटर, बस और ट्रक) के पूजन के रूप में निभाई जाती है। मान्यता है कि विजयादशमी के दिन वाहन की पूजा करने से यात्राएं निर्विघ्न और सुरक्षित रहती हैं, दुर्घटनाओं और अकाल मृत्यु के योग टलते हैं, तथा वाहन स्वामी को कार्यक्षेत्र में गति और सफलता प्राप्त होती है।

दशहरा 2026: वाहन पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से आरंभ हो रही है, जो 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 02 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। शास्त्रों में वाहन, औजार और अस्त्र-शस्त्रों की पूजा ‘अपराह्न काल’ (दोपहर के समय) और विशेष ‘विजय मुहूर्त’ में करने का स्पष्ट विधान है। इसलिए 20 अक्टूबर 2026 को ही वाहन पूजा संपन्न करना सबसे शुभ और मंगलकारी है।

  • अपराह्न वाहन पूजा मुहूर्त: दोपहर 01:19 बजे से दोपहर 03:37 बजे तक

  • सर्वश्रेष्ठ ‘विजय मुहूर्त’ (अत्यंत प्रभावशाली): दोपहर 01:59 बजे से दोपहर 02:45 बजे तक (कुल अवधि: 46 मिनट)

  • अमृत/शुभ चौघड़िया मुहूर्त (वैकल्पिक समय): दोपहर 12:15 बजे से दोपहर 01:45 बजे तक

(यदि आप विजयादशमी के दिन नया वाहन घर ला रहे हैं, तो इसी विजय मुहूर्त के दौरान वाहन की डिलीवरी लेना और घर लाकर पूजन करना सर्वोत्तम रहेगा।)

वाहन पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

पूजा शुरू करने से पूर्व सभी आवश्यक सामग्री एक थाली में सजाकर रख लें:

  • गंगाजल व शुद्ध जल (स्प्रे बोतल या लोटे में)

  • रोली (कुमकुम), पीला चंदन, हल्दी और अक्षत (अखंडित साबुत चावल)

  • कलावा (मौली या रक्षासूत्र)

  • गेंदे के फूलों की ताजी माला और खुले फूल

  • एक पानीदार जटा वाला नारियल (श्रीफल)

  • धूपबत्ती, कपूर और शुद्ध गाय के घी का दीपक

  • भोग के लिए गुड़, बताशा, मिठाई या फल

  • नजर दोष व नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के लिए एक साबुत पीला नींबू

कार, बाइक और स्कूटर पूजन की संपूर्ण शास्त्रसम्मत विधि

वाहन पूजन को एकाग्रचित्त होकर श्रद्धा और सुरक्षा के साथ संपन्न करना चाहिए:

  1. वाहन का शुद्धिकरण: सबसे पहले गाड़ी को बाहर और भीतर से अच्छी तरह धोकर साफ कर लें। इसके बाद लोटे में जल और थोड़ा गंगाजल मिलाकर आम के पत्तों या दूर्वा से पूरे वाहन पर छिड़काव कर उसे पवित्र करें।

  2. स्वास्तिक का अंकन: वाहन के बोनट पर, आगे की विंडशील्ड या बाइक की हेडलाइट/टंकी पर रोली और चंदन के लेप से अनामिका उंगली से एक सुंदर स्वास्तिक (卐) बनाएं। स्वास्तिक के चारों कोनों में अक्षत चिपकाएं। स्वास्तिक को चारों दिशाओं में मंगल और रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

  3. कलावा और पुष्पमाला अर्पण: वाहन के स्टीयरिंग व्हील, साइड मिरर्स, गियर लीवर या बाइक के हैंडल पर श्रद्धापूर्वक कलावा (रक्षासूत्र) बांधें। इसके बाद गाड़ी के अगले हिस्से पर गेंदे के फूलों की माला पहनाएं।

  4. धूप-दीप व आरती: शुद्ध घी का दीपक और धूप जलाएं। सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश और फिर संकटमोचन हनुमान जी का ध्यान करते हुए वाहन की घड़ी की दिशा (क्लॉकवाइज) में तीन या पांच बार आरती उतारें।

  5. भोग अर्पण: वाहन के डैशबोर्ड या बोनट पर मिठाई, गुड़ या फल का भोग अर्पित करें और प्रार्थना करें कि यह वाहन परिवार के लिए सुख और उन्नति लेकर आए।

  6. नारियल और नींबू का प्रयोग: वाहन के सामने एक जटा वाला नारियल फोड़ें और उसका थोड़ा सा जल वाहन के टायरों पर छिड़कें (नारियल का प्रसाद परिजनों में बांटें)। इसके बाद वाहन के अगले पहिए के नीचे एक साबुत नींबू रखें। पूजा पूरी होने के बाद गाड़ी को थोड़ा सा आगे बढ़ाकर उस नींबू को पहिए के नीचे दबाकर फोड़ दें। ऐसा करने से रास्ते में लगने वाले नजर दोष और नकारात्मक शक्तियां तुरंत समाप्त हो जाती हैं।

वाहन चालकों के लिए जरूरी मंत्र और सावधानियां

वाहन पूजन के दौरान और जब भी आप यात्रा शुरू करें, तो भगवान गणेश के मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” अथवा संकटमोचन हनुमान जी के मंत्र “ॐ हं हनुमते नमः” का स्मरण अवश्य करें। शास्त्रों में कहा गया है कि पूजा-पाठ के साथ-साथ सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करना भी धर्म का ही अंग है। हमेशा सीट बेल्ट या हेलमेट का उपयोग करें, गति सीमा का ध्यान रखें और सुरक्षित ड्राइविंग को अपनी आदत बनाएं।

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