
विजयादशमी के महापर्व पर पूर्वांचल की आध्यात्मिक आस्था के सबसे बड़े केंद्र गोरखनाथ मंदिर में नाथ संप्रदाय की सदियों पुरानी गौरवशाली परंपरा पूरी भव्यता और श्रद्धा के साथ जीवंत हो उठी। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त से ही पीठ की प्राचीन मान्यताओं के अनुरूप विशेष अनुष्ठान शुरू किए। पारंपरिक परिधान और नाथ पंथ के विशेष वेश में सजे योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ के मुख्य विग्रह के समक्ष शीश नवाया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से षोडशोपचार पूजन संपन्न किया। मंदिर परिसर में ढोल, नगाड़े, शंख ध्वनि और डमरू के नाद के बीच हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। गोरक्षपीठाधीश्वर ने इसके बाद अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि पर जाकर पुष्पांजलि अर्पित की और आशीर्वाद प्राप्त किया।
शक्ति साधना का पूर्णत्व: देवी पाटन से लेकर रामनवमी तक जुड़े अनुष्ठानों का महासंगम
गोरक्षपीठ में शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा से लेकर विजयादशमी तक चलने वाली साधना का स्वरूप अत्यंत विशिष्ट और अनूठा होता है। कलश स्थापना के साथ नौ दिनों तक चलने वाले शक्ति अनुष्ठान के बाद विजयादशमी का दिन विजय, धर्म और सत्य की प्रतिष्ठा के रूप में मनाया जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुबह के सत्र में शक्ति मंदिर में स्थापित सभी देव विग्रहों की विशेष आरती की। इसके उपरांत उन्होंने नाथ पंथ के समस्त प्रतिष्ठित आचार्यों, सिद्ध संतों और योगियों की समाधियों पर जाकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों—असम, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तराखंड से पहुंचे नाथ पंथ के साधु-संतों ने भी पीठ की रीतियों में हिस्सा लिया। गोरखनाथ मंदिर में विजयादशमी का यह अनुष्ठान केवल एक धार्मिक पूजा नहीं, बल्कि योग, तपस्या और जन-कल्याण के नाथ संप्रदाय के मूल दर्शन का जीवंत प्रकटीकरण माना जाता है।
तिलकोत्सव और पारंपरिक अदालत: जब गोरक्षपीठाधीश्वर ने दिए संतों और भक्तों को मंगल आशीर्वाद
विजयादशमी के दिन गोरखनाथ मंदिर का तिलकोत्सव कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण आकर्षण का केंद्र रहता है। मंदिर के दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में आयोजित इस भव्य समारोह में पीठाधीश्वर के आसन पर विराजमान होकर योगी आदित्यनाथ ने संतों, योगियों और आम नागरिकों को तिलक लगाकर आशीर्वाद दिया। सबसे पहले नाथ पंथ के प्रमुख साधुओं ने पीठाधीश्वर को तिलक लगाया और उसके बाद योगी आदित्यनाथ ने सभी संतों व श्रद्धालुओं को मंगल तिलक लगाकर विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। इसी दिन नाथ परंपरा के अनुसार ‘संत अदालत’ यानी दंडाधिकारी के रूप में भी परंपरा का निर्वहन किया जाता है, जहां संतों के आपसी मतभेदों और अनुशासन से जुड़े मामलों को गोरक्षपीठाधीश्वर के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है और उनके द्वारा दिया गया निर्णय अंतिम व सर्वमान्य माना जाता है।
फूलों की वर्षा और ढोल-नगाड़ों की गूंज: मानसरोवर के लिए निकली ऐतिहासिक विजय शोभायात्रा
दोपहर बाद गोरखनाथ मंदिर से पारंपरिक विजय शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। विशेष रूप से सजाए गए खुले रथ पर सवार होकर गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जब निकले, तो मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर मानसरोवर तक सड़क के दोनों ओर खड़े हजारों श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया। शोभायात्रा में नाथ पंथ के साधु-संत, पारंपरिक लोक कलाकार, डमरू दल और झांकियां शामिल रहीं। इस यात्रा की सबसे अनूठी विशेषता सामाजिक समरसता की वह मिसाल है, जो पीढ़ियों से इस आयोजन का अभिन्न अंग रही है। अल्पसंख्यक समुदाय के बुनकरों और स्थानीय व्यापारियों ने भी मार्ग में मंच लगाकर गोरक्षपीठाधीश्वर का माल्यार्पण कर अभिनंदन किया, जो गोरखपुर की साझा संस्कृति और ऐतिहासिक ताने-बाने को दर्शाता है।
मानसरोवर रामलीला मैदान में प्रभु श्री राम का राजतिलक और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश
शोभायात्रा मानसरोवर मंदिर पहुंची, जहां गोरक्षपीठाधीश्वर ने देवों के देव महादेव और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पूजा-अर्चना की। इसके बाद यह कारवां मानसरोवर रामलीला मैदान पहुंचा, जहां सीएम योगी ने रावण वध के प्रसंग का साक्षी बनते हुए भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी के स्वरूपों की आरती उतारी और प्रभु राम का प्रतीकात्मक राजतिलक किया। जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विजयादशमी का यह पर्व समाज को यह संदेश देता है कि अधर्म, अन्याय और अत्याचार चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न प्रतीत हो, अंततः विजय सत्य, धर्म और न्याय की ही होती है। गोरखनाथ मंदिर में देर रात तक चलने वाले पारंपरिक सहभोज के साथ विजयादशमी के इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक उत्सव का समापन हुआ।
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