CJP के समर्थन में उतरे BJP के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई: दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर उठाए कड़े सवाल, बोले- ‘कानून हाथ में ले रही पुलिस

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन और पुलिसिया कार्रवाई को लेकर छिड़ा विवाद अब एक नए और अप्रत्याशित सियासी मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। कर्नाटक कैडर के पूर्व तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी और तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने इस पूरे मामले में बड़ा बयान देकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं और युवाओं पर दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए एक्शन और हालिया घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए अन्नामलाई ने बेहद बेबाक अंदाज में कहा कि ऐसा महसूस हो रहा है जैसे दिल्ली पुलिस ने कानून को अपने हाथों में ले लिया है। अन्नामलाई ने साफ तौर पर कहा कि वे भले ही CJP के प्रदर्शन के तौर-तरीकों या उनकी शैली से पूरी तरह सहमत न हों, लेकिन एक संवैधानिक लोकतंत्र में पुलिस बल का अनियंत्रित और आक्रामक रवैया किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता। उनके इस बयान के बाद केंद्र सरकार, विपक्षी खेमे और खुद भाजपा संगठन के भीतर इस संवेदनशील मुद्दे पर तीखी बहस छिड़ गई है।

‘विरोध का अधिकार लोकतंत्र की आत्मा’: अन्नामलाई ने पुलिसिया रवैये पर दागे तीखे सवाल

पूर्व में पुलिस सेवा में उच्च पदों पर कार्य कर चुके अन्नामलाई ने खाकी की कार्यप्रणाली के तकनीकी और कानूनी पहलुओं को छूते हुए दिल्ली पुलिस के आचरण पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पुलिस का मूल दायित्व कानून और व्यवस्था की रक्षा करना है, न कि नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को दबाने के लिए कानून को तोड़ना-मरोड़ना। अन्नामलाई के अनुसार, किसी भी विरोध प्रदर्शन को संभालने के लिए तय एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) और न्यूनतम बल प्रयोग का सिद्धांत होता है। जब पुलिस खुद कानून की सीमाओं को लांघती नजर आती है और न्यायिक प्रक्रियाओं में ऐसी स्थितियां बनती हैं जहां न्यायाधीशों को सुनवाई से हटना पड़ता है, तो इससे आम जनता का देश की पूरी न्याय व्यवस्था और कानून के राज से भरोसा डगमगाने लगता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर युवा और छात्र सड़कों पर उतरकर अपनी बात रख रहे हैं, तो राज्य का दायित्व उनसे संवाद स्थापित करना है, न कि उन्हें आपराधिक तत्वों की तरह ट्रीट कर लाठियों और हिरासत के जरिए खामोश करना।

जंतर-मंतर से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक: CJP के विरोध और पुलिस कार्रवाई का पूरा बैकग्राउंड

दिल्ली में यह पूरा विवाद उस समय गरमाया जब जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की आधिकारिक सूची से हटाए जाने और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर CJP के प्रमुख कार्यकर्ताओं ने संसद मार्ग और जंतर-मंतर की ओर कूच करने का प्रयास किया था। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने कई प्रमुख कार्यकर्ताओं और नेताओं को बैरिकेडिंग तोड़ने और निषेधाज्ञा के उल्लंघन के आरोप में हिरासत में ले लिया। राजधानी के लुटियंस जोन, कनॉट प्लेस, मंडी हाउस और जंतर-मंतर के आसपास भारी पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी गई, जिसके चलते सड़कों पर भारी जाम और आम नागरिकों की आवाजाही पर गंभीर पाबंदियां लग गईं। मामला तब और तूल पकड़ गया जब विपक्षी दलों और याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शीर्ष अदालत में पुलिस की ज्यादतियों, वकीलों के साथ हुए व्यवहार और अनावश्यक बैरिकेडिंग को लेकर घंटों तीखी बहस हुई। अन्नामलाई का ताजा बयान इसी अदालती और कानूनी खींचतान की पृष्ठभूमि में आया है, जिसने इस मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है।

अपनी ही पार्टी की केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के रुख पर सवालिया निशान

के. अन्नामलाई का यह रुख इसलिए सबसे ज्यादा चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि दिल्ली पुलिस सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है। तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष पद से हटने के बाद भी अन्नामलाई को दक्षिण भारत में भाजपा के सबसे असरदार और लोकप्रिय चेहरों में गिना जाता है। ऐसे में अपनी ही पार्टी की केंद्र सरकार की पुलिस मशीनरी पर इतना सीधा और तीखा हमला करना उनके स्वतंत्र और आक्रामक राजनीतिक मिजाज को दर्शाता है। इससे पहले भी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के मुद्दे पर प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ समय पर संवाद न करने को लेकर अन्नामलाई केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई अपने आईपीएस बैकग्राउंड की साख और युवाओं के बीच अपनी छवि को किसी भी राजनीतिक मजबूरी के आगे झुकने नहीं देना चाहते। वे यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रशासनिक सुधार, निष्पक्षता और न्याय के सवाल पर वे पार्टी लाइन से ऊपर उठकर बात करने का साहस रखते हैं।

युवाओं में असंतोष, प्रशासनिक मर्यादा और आगे की राजनीतिक दिशा

अन्नामलाई ने अपने बयान में देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की असली ताकत इस बात में निहित होती है कि उसकी युवा पीढ़ी देश की लोकतांत्रिक और शैक्षणिक संस्थाओं पर कितना भरोसा करती है। यदि छात्रों और युवाओं को यह लगने लगे कि उनकी शिकायतों को सुनने के बजाय पुलिसिया लाठी से दबाया जाएगा, तो यह राष्ट्रीय हित के लिए बेहद खतरनाक प्रवृत्ति है। उन्होंने केंद्र और दिल्ली पुलिस प्रशासन को नसीहत दी कि वह प्रतिशोध की भावना से बाहर निकलकर प्रशासनिक मर्यादा का पालन करे। दूसरी तरफ, विपक्षी दलों ने अन्नामलाई के इस बयान को हाथों-हाथ लपक लिया है और केंद्र सरकार पर हमला तेज करते हुए कहा है कि अब तो भाजपा के अपने ही पूर्व दिग्गज नेता पुलिस की मनमानी और प्रशासनिक तानाशाही की गवाही दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्नामलाई के इस तीखे रुख पर पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व क्या रुख अपनाता है और दिल्ली पुलिस इस मामले में अपनी कानूनी रणनीति में क्या बदलाव करती है।

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