रावण के पुतले पर लगाया मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का चेहरा, वोट चोरी का आरोप लगाकर फूंका

दशहरे के पावन पर्व पर जहां देशभर में असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक रूप में लंकापति रावण के पुतलों का दहन किया गया, वहीं विपक्षी दल कांग्रेस और उसके युवा संगठनों ने इसे एक अलग ही राजनीतिक रंग दे दिया। नई दिल्ली के जंतर-मंतर, मध्य प्रदेश के भोपाल और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) और एनएसयूआई (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने रावण के विशालकाय पुतले के चेहरे पर ज्ञानेश कुमार की तस्वीर लगाई, जिस पर बड़े अक्षरों में ‘आज का रावण ज्ञानेश कुमार’ लिखा गया था। चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ताओं ने इस पुतले को आग के हवाले कर दिया। दिल्ली में यूथ कांग्रेस ने पुतला दहन से पहले ‘वोट चोरी की रासलीला’ नाम से एक सांकेतिक नाटक का भी मंचन किया, जिससे राजधानी का सियासी पारा चढ़ गया।

‘वोट चोरी से लोकतंत्र की हत्या’: युवा कांग्रेस ने मांगा मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा

प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब और एनएसयूआई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखे और सीधे आरोप लगाए। पार्टी नेताओं का कहना था कि रावण चाहे कितना भी बलवान क्यों न रहा हो, अंत में जीत जनता और संविधान की ही होती है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग निष्पक्ष संस्था के रूप में काम करने के बजाय सत्ताधारी दल के राजनीतिक हितों को साधने में जुटा हुआ है। विपक्षी दलों का दावा है कि मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गईं और करोड़ों फर्जी वोटो के हेरफेर से चुनावी नतीजों को प्रभावित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते या उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक कांग्रेस का यह आंदोलन सड़कों से लेकर संसद तक जारी रहेगा।

मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली तक रणनीति: इंडिया गठबंधन की रैली की तैयारी

यह प्रदर्शन किसी एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ छेड़े गए एक बड़े राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी भोपाल और अन्य जिलों में वोट चोरी के मुद्दे को लेकर जिला अध्यक्षों और प्रभारियों के साथ बड़ी बैठकें की थीं। पार्टी ने आगामी 1 नवंबर को दिल्ली में इंडिया गठबंधन की महारैली और 26 नवंबर को संविधान दिवस पर बड़े शक्ति प्रदर्शन का खाका तैयार किया है। इसके तहत 25 नवंबर को लगभग एक लाख कार्यकर्ताओं के साथ ग्वालियर से दिल्ली कूच करने की योजना बनाई गई है। कांग्रेस इस पूरे नैरेटिव को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना चाहती है कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं अब दबाव में काम कर रही हैं और जनता के मताधिकार की रक्षा के लिए अब सीधा जनआंदोलन ही एकमात्र रास्ता बचा है।

भाजपा का तीखा पलटवार: ‘संवैधानिक संस्थाओं और सनातन परंपरा का खुला अपमान’

कांग्रेस के इस आक्रामक प्रदर्शन पर भारतीय जनता पार्टी ने बेहद कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे शर्मनाक और मर्यादाविहीन करार दिया है। भाजपा प्रवक्ताओं ने कहा कि कांग्रेस जब भी लोकतांत्रिक तरीके से जनता का विश्वास खोती है और चुनाव हारती है, तो वह अपनी नाकामी छुपाने के लिए चुनाव आयोग, ईवीएम और देश की संवैधानिक संस्थाओं को गालियां देने लगती है। भाजपा ने आरोप लगाया कि विजयादशमी जैसे पवित्र धार्मिक त्योहार पर इस तरह की घटिया राजनीति करके कांग्रेस ने सनातन परंपरा और देश की मर्यादा दोनों का अपमान किया है। सत्तापक्ष के नेताओं ने सवाल उठाया कि जब तेलंगाना, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की जीत होती है तब चुनाव आयोग निष्पक्ष रहता है, लेकिन जहां जनता उन्हें नकार देती है, वहां वे देश के मुख्य चुनाव आयुक्त को रावण बताने की ओछी राजनीति पर उतर आते हैं।

चुनावी सुधारों की बहस और गहराता राजनीतिक गतिरोध

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दशहरे के मंच का इस्तेमाल करके चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारी का पुतला दहन करना देश की सियासत में टकराव के एक नए दौर का संकेत है। संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को सीधे राजनीतिक जंग में खींचना न केवल प्रशासनिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर जनमानस में संदेह पैदा करता है, बल्कि चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी चोट पहुँचाता है। विपक्ष जहां इसे जनभावनाओं का उभार और लोकतंत्र बचाने की आखिरी लड़ाई बता रहा है, वहीं सत्तारूढ़ खेमा इसे चुनाव हारने की हताशा का प्रतीक मान रहा है। आने वाले दिनों में यह टकराव थमने के आसार नहीं हैं, क्योंकि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर राज्यों से राजधानी तक व्यापक लामबंदी की तैयारी में जुट चुकी है।

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