दो गुटों के खूनी संघर्ष में फंसा बेकसूर भारतीय, सऊदी अरब के आभा एयरपोर्ट पर हुए हमले में दर्दनाक मौत

सऊदी अरब के दक्षिणी असिर प्रांत में स्थित आभा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए एक घातक आतंकी हमले में रोजी-रोटी कमाने गए एक बेकसूर भारतीय नागरिक की जान चली गई। हवाई अड्डे के व्यस्ततम टर्मिनल और पार्किंग क्षेत्र को निशाना बनाकर किए गए इस हमले में न केवल एक भारतीय प्रवासी की दुखद मौत हुई, बल्कि विभिन्न देशों के दो दर्जन से अधिक आम नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए। मध्य पूर्व में दो ताकतों के बीच चल रहे दशकों पुराने भू-राजनीतिक संघर्ष और खूनी वर्चस्व की जंग में एक ऐसा निर्दोष इंसान बलि चढ़ गया, जिसका इस राजनीतिक विवाद से कोई लेना-देना नहीं था। वह केवल अपने परिवार का पेट पालने और सुनहरे भविष्य के सपने संजोकर खाड़ी देश गया हुआ था।

हूती विद्रोहियों का हमला: यमन युद्ध की आग में झुलसा आम नागरिक

सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन सेना के आधिकारिक बयानों के अनुसार, यह कायराना हमला यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा ड्रोन और क्रूज़ मिसाइल का उपयोग करके अंजाम दिया गया था। यमन में पिछले कई वर्षों से जारी गृहयुद्ध में सऊदी अरब की अगुवाई वाली गठबंधन सेना और हूती विद्रोहियों के बीच लगातार भीषण संघर्ष चल रहा है। हूती विद्रोही सीमा पार से सऊदी अरब के नागरिक बुनियादी ढांचों, तेल रिफाइनरियों और व्यस्त हवाई अड्डों को लगातार निशाना बनाते रहे हैं। यमन और सऊदी अरब के बीच जारी इस क्षेत्रीय विवाद में आम यात्रियों और वहां कार्यरत विदेशी कामगारों की सुरक्षा हमेशा खतरे में पड़ जाती है। आभा एयरपोर्ट पर हुआ यह हमला इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि कैसे दो गुटों के आपसी झगड़े की कीमत दूर देश से आए बेकसूर कामगारों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमले की चौतरफा निंदा: नागरिक ठिकानों पर हमला युद्ध अपराध

नागरिक हवाई अड्डे को जानबूझकर निशाना बनाए जाने की इस घटना की वैश्विक स्तर पर कड़ी निंदा की गई। संयुक्त राष्ट्र, भारत सरकार और कई खाड़ी देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन और अस्वीकार्य कृत्य करार दिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे या असैन्य क्षेत्र पर हमला करना सीधे तौर पर युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है। भारत के विदेश मंत्रालय ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि आतंकवाद और नागरिक ठिकानों पर किसी भी तरह के हमलों को किसी भी तर्क से उचित नहीं ठहराया जा सकता।

भारतीय दूतावास ने संभाला मोर्चा: पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा

रियाद स्थित भारतीय दूतावास और जेद्दा के वाणिज्य दूतावास ने घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय सऊदी अधिकारियों और असिर प्रांत के प्रशासन के साथ तुरंत संपर्क साधा। दूतावास के अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर घायल भारतीय नागरिकों की स्थिति का जायजा लिया और मृतक के परिजनों से संपर्क स्थापित किया। भारतीय मिशन ने आश्वासन दिया कि पार्थिव शरीर को भारत वापस भेजने के लिए आवश्यक राजनयिक कागजी कार्रवाई और कागजात तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को सऊदी श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले मुआवजे और वित्तीय सहायता दिलाने के लिए सऊदी प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित किया गया।

खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा पर गहराती चिंताएं

यह दर्दनाक वाकया एक बार फिर खाड़ी क्षेत्र में कार्यरत करीब 85 लाख से अधिक भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। अकेले सऊदी अरब में 25 लाख से ज्यादा भारतीय नागरिक विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जो देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं और भारत में अपने परिवारों को विदेशी मुद्रा भेजते हैं। हालांकि, यमन सीमा के निकटवर्ती क्षेत्रों जैसे आभा, जीजान और नजरान में बढ़ते ड्रोन और रॉकेट हमलों ने वहां काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के जीवन को लगातार जोखिम में डाल रखा है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भू-राजनीतिक टकरावों में हमेशा निर्दोष और कमजोर तबका ही सबसे ज्यादा पिसता है।

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