श्रद्धा दुबे से पुलिस के 120 सवाल: 6.5 घंटे की पूछताछ के बाद मॉडल, बहन और ड्राइवर 10 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजे गए

लखनऊ के चर्चित कारोबारी शिवा शर्मा हत्याकांड में गिरफ्तार मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश को अदालत ने 10 दिन की न्यायिक हिरासत में 31 अक्टूबर तक जेल भेज दिया है। नागपुर से ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाए जाने के बाद हजरतगंज कोतवाली और सर्विलांस कार्यालय में पुलिस अधिकारियों ने तीनों से करीब साढ़े छह घंटे तक मैराथन पूछताछ की। इस दौरान पुलिस टीम ने श्रद्धा के सामने 120 तीखे सवालों की लंबी सूची रखी, लेकिन ज्यादातर मौकों पर मॉडल ने या तो चुप्पी साधे रखी या फिर रटा-रटाया जवाब देकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की।

120 सवालों का सामना, 6.5 घंटे चली सघन पूछताछ

पुलिस उपायुक्त (मध्य) के कार्यालय में सुबह करीब पौने दस बजे से शुरू हुई पूछताछ शाम साढ़े चार बजे तक चली। जांच टीम ने घटना की रात से लेकर फरारी तक के पूरे घटनाक्रम पर सिलसिलेवार सवाल दागे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, श्रद्धा से 9 अक्टूबर की रात फ्लैट में हुए विवाद, शिवा की मौत के हालात, वायरल ऑडियो क्लिप्स और फरारी के दौरान मिले मददगारों को लेकर सवाल किए गए। श्रद्धा ने पूछताछ में खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए दावा किया कि झगड़े के बाद शिवा ने खुद फ्लैट से कूदकर जान दी थी। हालांकि, जब फरारी के नेटवर्क, आर्थिक मदद और नेपाल भागने को लेकर सवाल पूछे गए, तो वह अधिकतर सवालों को टालती रही और कई बार ‘वकीलों से बात करने’ की बात दोहराती रही।

सिम तोड़कर फेंके, चैट डिलीट और पुराने मोबाइल ‘लापता’

जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि आरोपियों ने डिजिटल सबूतों को नष्ट करने की पूरी कोशिश की थी। श्रद्धा के पास से बरामद आईफोन और एक अन्य फोन में कोई भी सिम कार्ड नहीं मिला। उसने सिम तोड़कर फेंक दिए थे और इंटरनेट कॉलिंग व हॉटस्पॉट/वाईफाई के जरिए संपर्क साध रही थी। इसके अलावा, 9 अक्टूबर के बाद की कई अहम व्हाट्सएप चैट भी डिलीट पाई गईं, जिसके चलते पुलिस ने फोन को डेटा रिकवरी के लिए फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेज दिया है। पूछताछ में जब पुराने फोन के बारे में पूछा गया, तो श्रद्धा ने दावा किया कि उसका और उसकी बहन का पुराना फोन नेपाल में कहीं खो गया, जिसे पुलिस सोची-समझी साजिश मान रही है।

कोर्ट में रिमांड खारिज कराने की अर्जी नामंजूर, 31 अक्टूबर तक जेल

शाम को सिविल अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराने के बाद भारी सुरक्षा घेरे में तीनों को प्रभारी सीजेएम बलवंत भारती की अदालत में पेश किया गया। आरोपी पक्ष के वकीलों ने न्यायिक रिमांड स्वीकृत न करने की अर्जी दाखिल करते हुए दलीलें दीं, लेकिन अदालत ने बचाव पक्ष की मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने श्रद्धा दुबे, रश्मि और चालक दानिश को 10 दिन की न्यायिक हिरासत (31 अक्टूबर तक) में जेल भेजने का वारंट जारी कर दिया। पुलिस अब बरामद नंबरों की कॉल डिटेल और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर कस्टडी रिमांड लेने की तैयारी में जुटी है, ताकि हत्याकांड के अनसुलझे पहलुओं की कड़ियां जोड़ी जा सकें।

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