तिब्बत में 7.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से हिली धरती, कुछ हफ्ते पहले यहीं से आई बाढ़ ने नेपाल में मचाई थी तबाही

हिमालयी क्षेत्र में एक बार फिर कुदरत का भयंकर प्रकोप देखने को मिला है, जहां गुरुवार रात तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में 7.0 की तीव्रता वाले जबर्दस्त भूकंप के झटकों से धरती दहल उठी। भूकंप इतना शक्तिशाली था कि इसके झटके तिब्बत के दूरदराज इलाकों के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल और उत्तरी सीमावर्ती क्षेत्रों तक महसूस किए गए। चिंता की बात यह है कि यह वही संवेदनशील हिमालयी भूभाग है, जहां कुछ ही हफ्ते पहले बर्फीले तूफानों और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट (GLOF) के चलते भयानक बाढ़ आई थी, जिसका पानी नेपाल की नदियों में उफान बनकर पहुंचा था और बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ था। इस बड़े भूकंप के बाद दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में दहशत का माहौल बन गया है।

7.0 तीव्रता के झटकों से कांपी तिब्बत की जमीन, दहशत में लोग

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) और चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र (CENC) के अनुसार, मुख्य भूकंप गुरुवार शाम भारतीय समयानुसार लगभग 8 बजकर 03 मिनट पर दर्ज किया गया। भूकंप का केंद्र तिब्बत के उत्तरी हिस्से में स्थित नागकू (Nagqu) प्रीफेक्चर के सुदूर पर्वतीय क्षेत्र में स्थित था। हालांकि दोनों एजेंसियों द्वारा भूकंप की गहराई को लेकर अलग-अलग आकलन सामने आए हैं, जहां चीनी एजेंसी ने इसकी गहराई सतह से करीब 10 किलोमीटर के दायरे में उथली बताई, वहीं भारतीय एजेंसी ने इसे 173 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया है। झटके इतने तेज थे कि लोग घरों से बाहर निकल आए और कच्चे निर्माणों में दरारें पड़ने व पहाड़ी रास्तों पर पत्थर गिरने की खबरें सामने आने लगीं। शुरुआती दौर में किसी बड़े जानमाल के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रिमोट इलाकों में सर्वे जारी है।

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से क्या है इसका सीधा कनेक्शन?

तिब्बत और नेपाल की सीमा साझा करने वाले ये ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे नाजुक पर्यावरण और भूगर्भीय ढांचों में गिने जाते हैं। हाल ही में इसी तिब्बती पठार और सीमावर्ती ग्लेशियरों के फटने से भोटे कोशी और त्रिशूली जैसी साझा नदियों में अचानक सैलाब आ गया था, जिसने नेपाल के सीमावर्ती जिलों, सड़कों और जलविद्युत परियोजनाओं को तबाह कर दिया था। अब उसी इलाके के करीब 7 तीव्रता का भूकंप आने से भूवैज्ञानिकों की चिंताएं दोगुनी हो गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारी कंपन के कारण पहाड़ों पर पहले से कमजोर हो चुकी मिट्टी, चट्टानें और अस्थाई मलबे के बांध दरक सकते हैं, जिससे निचले इलाकों में एक बार फिर अचानक भूस्खलन और लैंडस्लाइड डैम बनने का खतरा पैदा हो गया है।

हिमालयी फॉल्ट लाइन पर खतरा, रेस्क्यू टीमें अलर्ट मोड पर

भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव वाले इस जोन में लगातार भारी दबाव बनता रहता है, जिसके चलते हिमालयी बेल्ट दुनिया के सबसे संवेदनशील सीस्मिक जोन (जोन 5) में आती है। चीनी आपदा प्रबंधन और स्थानीय राहत बलों ने प्रभावित घाटियों और दूरदराज के गांवों में भारी मशीनरी के साथ जायजा लेना शुरू कर दिया है ताकि बंद हुए रास्तों को तुरंत खोला जा सके। वहीं नेपाल के सीमावर्ती प्रशासनिक अधिकारियों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि नदियों के जलस्तर में किसी भी असामान्य बदलाव या आफ्टरशॉक्स की स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किए जा सकें। भूवैज्ञानिकों ने आने वाले कुछ दिनों तक लोगों को बेहद सतर्क रहने और कमजोर ढांचों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है।

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