
इस्लामाबाद/मास्को: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में गहराते युद्ध के बादलों और अमेरिका-ईरान के बीच चरम पर पहुंचे तनाव ने वैश्विक तेल बाजार में खलबली मचा दी है। सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के बंद होने की आशंकाओं के बीच रूस ने एक बड़ा कूटनीतिक कार्ड खेला है। रूस ने आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को रियायती दरों पर कच्चे तेल की आपूर्ति करने की खुली पेशकश की है। मास्को के इस कदम को न केवल पाकिस्तान के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, बल्कि इसे दक्षिण एशिया में रूस के बढ़ते प्रभाव के रूप में भी देखा जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट और रूसी राजदूत की चेतावनी
ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनातनी ने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति लाइन ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ पर खतरे के बादल मंडरा दिए हैं। इस बीच, पाकिस्तान में तैनात रूसी राजदूत ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की तीखी आलोचना की है। रूसी राजदूत ने कहा कि अमेरिका की आक्रामक नीतियों के कारण वैश्विक तेल संकट गहरा सकता है, जिससे विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाएं चरमरा सकती हैं। रूस का मानना है कि सैन्य बल का प्रयोग समाधान के बजाय समस्याओं को और अधिक जटिल बना रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग असुरक्षित हो गए हैं।
पाकिस्तान को रूस की ‘डिस्काउंटेड’ तेल की पेशकश
वैश्विक ऊर्जा संकट की आहट के बीच रूस ने पाकिस्तान को बेहद कम और आकर्षक कीमतों पर तेल देने का प्रस्ताव दिया है। रूसी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे पाकिस्तान की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार हैं, खासकर तब जब खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सिरे चढ़ता है, तो पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा और देश में ईंधन की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। यह पेशकश ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश में भटक रहा है।
ट्रंप की सैन्य रणनीति पर रूस का कड़ा प्रहार
रूसी राजदूत ने अपने संबोधन में विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार की नीतियों को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि एकतरफा सैन्य कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हैं। रूस ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अमेरिका के दबाव में आए बिना मित्र राष्ट्रों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूती प्रदान करेगा। मास्को की इस सक्रियता ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया है कि रूस ऊर्जा कूटनीति के जरिए एशियाई देशों को अपने खेमे में लाने की रणनीति पर काम कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान इस रूसी ऑफर पर क्या आधिकारिक रुख अपनाता है।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया