
दक्षिण भारत के प्रमुख राजनीतिक राज्य कर्नाटक में इन दिनों सियासत का पारा अचानक अपने चरम पर पहुंच चुका है। जनता दल (सेक्युलर) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने राज्य की कांग्रेस सरकार और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर एक ऐसा गंभीर आरोप लगाया है, जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। कुमारस्वामी ने खुले तौर पर दावा किया है कि उनके परिवार को राजनीतिक और व्यक्तिगत रूप से पूरी तरह से समाप्त करने के लिए 600 करोड़ रुपये की भारी-भरकम ‘सुपारी’ (अनुबंध) दी गई है। उनका सीधा इशारा प्रदेश की सत्ता के सबसे ताकतवर चेहरों में से एक डीके शिवकुमार की तरफ है। इस विस्फोटक बयान के सामने आते ही बेंगलुरु से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि यह बयान केवल दो व्यक्तिगत नेताओं के बीच की पुरानी तल्खी का नतीजा नहीं है, बल्कि यह राज्य में आने वाले दिनों में एक बड़े सियासी तूफान का पूर्वसंकेत भी हो सकता है।
600 करोड़ रुपये के सुपारी सौदे के पीछे की पूरी कहानी और एचडी कुमारस्वामी के सीधे आरोप
एचडी कुमारस्वामी ने एक सार्वजनिक मंच से मीडिया और जनता को संबोधित करते हुए कहा कि उनके और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के परिवार के खिलाफ लंबे समय से एक बड़ी और सोची-समझी साजिश रची जा रही है। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि इस पूरी साजिश के पीछे राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का हाथ है, जिन्होंने कथित तौर पर 600 करोड़ रुपये की डील करके उनके परिवार का राजनीतिक अस्तित्व मिटाने की योजना बनाई है। कुमारस्वामी का कहना है कि सत्ता में बैठे शीर्ष लोग अपने राजनीतिक विरोधियों को किसी भी कीमत पर मिटा देना चाहते हैं और इसके लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनके पास इस बात के पर्याप्त सुराग और जानकारियां हैं कि किस तरह से पर्दे के पीछे से इस काम को अंजाम देने की तैयारियां की जा रही थीं। इस दावे ने न केवल जनता दल (सेक्युलर) के कार्यकर्ताओं को उद्वेलित कर दिया है, बल्कि पूरी राज्य मशीनरी और खुफिया एजेंसियों के लिए भी कई तरह के असहज सवाल खड़े कर दिए हैं।
कर्नाटक सरकार और डीके शिवकुमार के खेमे की प्रतिक्रिया, कांग्रेस ने आरोपों को बताया निराधार
कुमारस्वामी के इस बेहद संगीन और चौंकाने वाले आरोपों के बाद कांग्रेस पार्टी और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के खेमे में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने इन दावों को पूरी तरह से काल्पनिक, तथ्यहीन और हताशा में दिया गया बयान करार दिया है। डीके शिवकुमार के करीबियों का कहना है कि जेडीएस अपनी गिरती राजनीतिक जमीन को बचाने के लिए इस तरह के मनगढ़ंत आरोप लगा रही है ताकि जनता का ध्यान मूल मुद्दों से भटकाया जा सके। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि जब से राज्य में कांग्रेस की स्थिर सरकार बनी है, तब से विपक्षी दल लगातार बेबुनियाद आरोप लगाकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर जनता की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि जब देश के किसी पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार से जुड़ा नेता 600 करोड़ की सुपारी जैसे शब्द का इस्तेमाल करता है, तो उसे आसानी से खारिज करना किसी भी सरकार के लिए आसान नहीं होता।
ओल्ड मैसूर रीजन की वर्चस्व की जंग और पुरानी राजनीतिक दुश्मनी का इतिहास
कर्नाटक की राजनीति को गहराई से समझने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि डीके शिवकुमार और एचडी कुमारस्वामी के बीच की यह जंग कोई नई बात नहीं है। दोनों ही नेता राज्य के बेहद प्रभावशाली ‘वोक्कालिगा’ समुदाय से आते हैं और ओल्ड मैसूर क्षेत्र में अपनी राजनीतिक बादशाहत कायम रखने के लिए दशकों से आमने-सामने रहे हैं। वोक्कालिगा वोट बैंक पर मजबूत पकड़ बनाने की इस होड़ ने दोनों परिवारों और नेताओं के बीच प्रतिद्वंद्विता को हमेशा बनाए रखा है। पिछले कुछ वर्षों में जब से राज्य का राजनीतिक समीकरण बदला है और जेडीएस ने केंद्र में एनडीए का दामन थामा है, तब से दोनों गुटों के बीच का तनाव और ज्यादा गहरा हो गया है। 600 करोड़ की सुपारी का यह ताजा आरोप इसी पुरानी राजनीतिक दुश्मनी की एक नई और सबसे खतरनाक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले स्थानीय और विधानसभा स्तर के चुनावों में दोनों दलों के बीच का मुकाबला बेहद तल्ख होने के आसार हैं।
जांच की उठती मांग और देश के राजनीतिक पटल पर इस सनसनीखेज घटनाक्रम का असर
इस सनसनीखेज आरोप के बाद अब राज्य में निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। विपक्षी दलों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर 600 करोड़ रुपये के लेनदेन और जान से मारने या राजनीतिक रूप से खत्म करने की साजिश के आरोपों की केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जांच होनी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। वहीं, आम नागरिक भी इस बात को लेकर हैरान हैं कि आखिर किस तरह से सार्वजनिक बयानों में इतने बड़े आंकड़े और गंभीर आरोप उछाले जा रहे हैं। यदि इस मामले की विधिवत जांच होती है तो आने वाले समय में कई और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। बहरहाल, एचडी कुमारस्वामी के इस एक बयान ने कर्नाटक की राजनीति में ऐसा भूचाल ला दिया है जिसकी गूंज आने वाले काफी समय तक सुनाई देती रहेगी और इसका असर राज्य के पूरे राजनीतिक माहौल पर पड़ना तय माना जा रहा है।
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