‘अखिलेश यादव तुम्हें दम है तो मुझे गोली मरवाकर दिखाओ’, सपा अध्यक्ष के लिए ‘ऐसे-वैसे शब्द’ बोलने वाला मुकेश पाल देशबंधु कौन?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कन्नौज की सरजमीं हमेशा से ही समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके शीर्ष नेतृत्व का मुख्य गढ़ मानी जाती रही है। लेकिन हाल के दिनों में कन्नौज के मकरंद नगर तिराहे पर हुई एक हाई-प्रोफाइल हिंसक झड़प और खुलेआम दी गई धमकियों ने पूरे प्रदेश के सियासी हलकों में हड़कंप मचा दिया है। खुद को ‘हिंदुस्तान आजाद मंच’ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बताने वाले मुकेश पाल देशबंधु ने समाजवादी पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव और पार्टी के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष व कन्नौज सांसद अखिलेश यादव को लेकर सोशल मीडिया और मीडिया बयानों में कई आपत्तिजनक व अमर्यादित टिप्पणियां की थीं। इसके बाद जब वे कन्नौज के जीटी रोड पर अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव का पुतला फूंकने पहुंचे, तो भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ही सपा कार्यकर्ताओं और देशबंधु के बीच सड़क पर ही भयानक मारपीट और हाथापाई हो गई। इसके बाद मुकेश पाल देशबंधु ने सपा नेतृत्व को खुली चुनौती देते हुए कहा, “अखिलेश यादव, अगर तुममें दम है तो मुझे गोली मरवाकर दिखाओ!” उनके इस बयान के बाद से सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनलों तक बवाल मचा हुआ है।

कौन हैं मुकेश पाल देशबंधु और आखिर क्यों समाजवादी पार्टी के नेताओं से हुआ उनका तीखा टकराव?

मुकेश पाल देशबंधु उत्तर प्रदेश के कन्नौज और आसपास के जिलों में सक्रिय रहने वाले एक स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ता और ‘हिंदुस्तान आजाद मंच’ नामक संगठन के स्वघोषित राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वे काफी समय से सोशल मीडिया और स्थानीय कार्यक्रमों के माध्यम से समाजवादी पार्टी की नीतियों और उसके शीर्ष परिवार पर बेहद तीखे, व्यक्तिगत और आक्रामक हमले बोलते रहे हैं। स्थानीय जानकारों के अनुसार, मुकेश पाल देशबंधु अपने बयानों के जरिए क्षेत्र में राजनीतिक जमीन तलाशने और अपनी पहचान बनाने की कोशिश में जुटे हुए थे। हालांकि, सपा संस्थापक स्व. मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के खिलाफ अनुचित शब्दावली का लगातार प्रयोग करने की वजह से स्थानीय समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के मन में उनके प्रति गहरा आक्रोश पनप रहा था। जब देशबंधु ने प्रशासनिक स्तर पर पुतला फूकने का ऐलान किया, तो दोनों पक्षों के बीच चल रही यह तनातनी एक प्रत्यक्ष टकराव में बदल गई।

मकरंद नगर तिराहे पर पुलिस के सामने हुई जमकर धुनाई: महिला नेता और सपा कार्यकर्ताओं के थप्पड़ जड़ने का वीडियो वायरल

कन्नौज के मकरंद नगर तिराहे पर घटी इस घटना का पूरा वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। तय कार्यक्रम के मुताबिक जब मुकेश पाल देशबंधु अपने समर्थकों के साथ पुतला दहन करने मकरंद नगर पहुंचे, तो वहां पहले से ही पुलिस बल तैनात था। सुरक्षा का अहसास होने पर जैसे ही देशबंधु ने चेहरे से अपना मास्क हटाया, वहां मौजूद सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन पर धावा बोल दिया। देखते ही देखते सड़क पर ही गाली-गलौज और लात-घूंसे चलने लगे। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सपा की महिला नेता शशिमा सिंह दोहरे और अन्य कार्यकर्ताओं ने उन्हें पुलिस की मौजूदगी में ही दौड़ा-दौड़ाकर कई थप्पड़ रसीद किए और सड़क पर गिरा दिया। करीब 20 मिनट तक चले इस अप्रत्याशित ड्रामे और अफरा-तफरी की वजह से जीटी रोड पर दोनों तरफ यातायात पूरी तरह से ठप हो गया। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से बीच-बचाव करके देशबंधु को उग्र भीड़ के चंगुल से सुरक्षित बाहर निकाला और स्थिति को संभाला।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए गंभीर सवाल: दोनों पक्षों ने दर्ज कराई शिकायत, मामले में एफआईआर दर्ज

सार्वजनिक स्थान पर भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद हुई इस हिंसा के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी कई सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। मुकेश पाल देशबंधु ने आरोप लगाया कि उन्होंने पुतला दहन कार्यक्रम से पहले ही जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) को पत्र भेजकर अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की थी। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों के सामने ही उन पर हमला किया गया। घटना के तुरंत बाद मुकेश पाल देशबंधु ने सदर कोतवाली में जाकर सपा नेत्री शशिमा सिंह दोहरे, सपा कार्यकर्ता मन्ना यादव और भानू गुप्ता सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद और अज्ञात में तहरीर दी, जिसके आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं दूसरी तरफ, सपा कार्यकर्ताओं ने भी अधिकारियों को शिकायती पत्र सौंपकर देशबंधु पर स्वर्गीय नेताजी और अखिलेश यादव के खिलाफ अनर्गल व असामाजिक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति और कन्नौज के चुनावी माहौल पर इस जुबानी जंग और हिंसा का क्या पड़ेगा असर?

कन्नौज में हुई इस घटना ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक माहौल में एक बार फिर बयानों की मर्यादा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे को बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना है कि अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए कुछ लोग जानबूझकर राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल इसे प्रदेश में सपा कार्यकर्ताओं की दबंगई और गुंडागर्दी का प्रतीक करार दे रहे हैं। ‘गोली मरवाने’ जैसी खुलेआम बयानबाजी और सड़क पर हुई इस हिंसा के बाद कन्नौज में राजनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि पुलिस जांच में क्या तथ्य निकलकर सामने आते हैं और क्या इस प्रकार की बयानबाजी पर कानूनी शिकंजा कसा जाता है या फिर कन्नौज की सियासत में यह टकराव किसी नए मोड़ की शुरुआत साबित होता है।

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