
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने समाज में व्याप्त गरीबी और कुरीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश या राज्य से गरीबी और सामाजिक बुराइयों को केवल मुफ्त सुविधाओं या रियायतों के दम पर खत्म नहीं किया जा सकता। मान ने जोर देते हुए कहा कि अगर समाज के जीवन स्तर को वास्तव में ऊंचा उठाना है, तो इसके लिए शिक्षा ही एकमात्र शक्तिशाली हथियार है।
मुफ्त सुविधाओं पर बोले सीएम मान: केवल रियायतें काफी नहीं
एक सार्वजनिक संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कल्याणकारी योजनाओं और विकास के बीच के अंतर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सरकारें अक्सर मुफ्त सुविधाओं और विभिन्न रियायतों के जरिए राहत देने की कोशिश करती हैं, लेकिन ये उपाय गरीबी की जड़ों को काटने में सक्षम नहीं हैं। उनके अनुसार, अल्पकालिक राहत समाज की मूलभूत समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सकती और न ही इससे सामाजिक बुराइयों का पूरी तरह खात्मा मुमकिन है।
शिक्षा ही है गरीबी का चक्र तोड़ने का एकमात्र रास्ता
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह शिक्षा ही है जो गरीबी के दुष्चक्र (Vicious Cycle) को तोड़ने की ताकत रखती है। भगवंत मान ने तर्क दिया कि जब एक पीढ़ी शिक्षित होती है, तो वह न केवल अपने परिवार का जीवन स्तर सुधारती है, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बनती है। उन्होंने कहा कि बेहतर जीवन स्तर और उज्ज्वल भविष्य का रास्ता स्कूलों और कॉलेजों से होकर ही गुजरता है, न कि केवल सरकारी सब्सिडी और रियायतों से।
सामाजिक सुधार के लिए शिक्षा को बनाया ढाल
पंजाब सरकार के विजन को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि राज्य में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने माना कि सामाजिक बुराइयों को जड़ से मिटाने के लिए लोगों का जागरूक और शिक्षित होना अनिवार्य है। मान के इस बयान को राजनीति के गलियारों में एक बड़े वैचारिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ वे अब ‘मुफ्त’ की राजनीति से आगे बढ़कर ‘सशक्तीकरण’ (Empowerment) की बात कर रहे हैं।
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