नींद खुलते ही तकिए पर दिखते हैं लार के निशान? न करें नजरअंदाज, हो सकती हैं ये गंभीर बीमारियां

सुबह सोकर उठने पर तकिए पर गीलापन या लार के सूखे निशान मिलना एक बेहद आम अनुभव है। अधिकांश लोग इसे गहरी, सुकून भरी नींद मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। चिकित्सकीय भाषा में नींद के दौरान अनियंत्रित रूप से लार बहने की इस स्थिति को ‘सियालोरिया’ (Sialorrhea) कहा जाता है।

जब हम जाग रहे होते हैं, तो हमारा मस्तिष्क लार ग्रंथियों द्वारा बनने वाली अतिरिक्त लार को निगलने का संकेत लगातार देता रहता है। लेकिन गहरी नींद (खासकर REM स्लीप) के दौरान जब चेहरे और गले की मांसपेशियां पूरी तरह शिथिल हो जाती हैं, तो यह निगलने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। यदि यह स्थिति कभी-कभार करवट लेकर या पेट के बल सोने पर होती है, तो यह सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। हालांकि, अगर तकिए पर रोजाना लार के दाग दिखाई दे रहे हैं, तो यह शरीर के भीतर पनप रही किसी आंतरिक स्वास्थ्य समस्या या छिपी हुई बीमारी का स्पष्ट संकेत हो सकता है।

स्लीप एपनिया: खर्राटों और लार का खतरनाक संबंध

नींद में लार टपकने का सबसे प्रमुख और गंभीर कारण ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) है। यह एक गंभीर स्लीप डिसऑर्डर है, जिसमें सोते समय ऊपरी श्वास नली की मांसपेशियां बार-बार अवरुद्ध हो जाती हैं, जिससे सांस कुछ सेकंड के लिए रुक-रुक कर चलती है।

जब नाक से पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, तो व्यक्ति अनजाने में मुंह खोलकर सांस लेने लगता है। मुंह खुला रहने के कारण मुंह में बनने वाली लार बाहर की ओर बहने लगती है। यदि लार गिरने के साथ-साथ तेज खर्राटे आना, सुबह उठते ही मुंह सूखना, सिरदर्द होना या दिनभर अत्यधिक थकान और सुस्ती महसूस होना जैसे लक्षण जुड़े हैं, तो यह स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है। इस स्थिति की अनदेखी करने से भविष्य में हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों का जोखिम बढ़ जाता है।

बंद नाक और साइनस इंफेक्शन की वजह से मुंह से सांस लेना

नाक में किसी भी प्रकार की रुकावट होना रात में लार बहने की एक प्रमुख रोजमर्रा की वजह है। जब नाक के वायुमार्ग ब्लॉक हो जाते हैं, तो शरीर सांस लेने के लिए मुंह का सहारा लेता है। इसके पीछे मुख्य रूप से ये कारण होते हैं:

  1. एलर्जी और साइनसाइटिस: मौसमी एलर्जी, धूल-मिट्टी या साइनस के संक्रमण के कारण नाक के ऊतकों में सूजन आ जाती है, जिससे रात में नाक बंद हो जाती है।

  2. डेविएटेड नेजल सेप्टम (DNS): नाक के बीच की हड्डी का टेढ़ा होना, जिससे एक तरफ की सांस की नली संकरी हो जाती है।

  3. नेजल पॉलीप्स और बढ़े हुए टॉन्सिल: बच्चों और वयस्कों में बढ़े हुए टॉन्सिल या नाक में मांस बढ़ने के कारण सांस लेने में रुकावट आती है, जिसके चलते लार बाहर रिसने लगती है।

एसिड रिफ्लक्स और जीईआरडी (GERD): पेट की खराबी का असर मुंह पर

गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) या क्रोनिक एसिड रिफ्लक्स भी सोते समय लार बहने की एक बड़ी वजह बनती है। जब पेट का एसिड भोजन नली (Esophagus) से होते हुए गले की तरफ वापस आता है, तो इसे ‘वाटर ब्रैश’ (Water Brash) प्रतिक्रिया कहा जाता है।

इस एसिडिक जलन को शांत और बेअसर करने के लिए शरीर की लार ग्रंथियां सुरक्षात्मक रूप से अत्यधिक मात्रा में क्षारीय लार का उत्पादन करने लगती हैं। जब व्यक्ति रात में लेटता है, तो गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव कम होने से एसिड गले की नसों को उत्तेजित करता है, जिससे बनने वाली यह अतिरिक्त लार मुंह से बाहर बहने लगती है। सीने में जलन, खट्टी डकारें, मुंह का कड़वा स्वाद और रात में अचानक खांसी आना इसके जुड़े हुए लक्षण हैं।

न्यूरोलॉजिकल स्थितियां और मांसपेशियों पर नियंत्रण की कमी

निगलने की प्रक्रिया (Swallowing Reflex) पूरी तरह से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियों के समन्वय पर निर्भर करती है। यदि मस्तिष्क और गले की मांसपेशियों के बीच यह तालमेल कमजोर पड़ जाए, तो व्यक्ति लार को निगल नहीं पाता, जिसे मेडिकल भाषा में ‘डिस्फेगिया’ (Dysphagia) कहा जाता है।

पार्किंसंस रोग, मल्टीपल स्केलेरोसिस (MS), सेरेब्रल पाल्सी, या स्ट्रोक के बाद के प्रभाव में अक्सर चेहरे और गले की नसें कमजोर हो जाती हैं। इन स्थितियों में दिन के समय भी और रात में सोते समय विशेष रूप से अत्यधिक लार टपकने की समस्या बढ़ जाती है। यदि लार बहने के साथ-साथ खाना निगलने में कठिनाई, आवाज में बदलाव या चेहरे की कमजोरी महसूस हो रही हो, तो यह न्यूरोलॉजिकल जांच की मांग करता है।

दवाओं के साइड इफेक्ट्स और सोने की गलत पोजीशन

कभी-कभी समस्या किसी गंभीर बीमारी के बजाय जीवनशैली या दवाओं के प्रभाव से भी जुड़ी होती है:

  • दवाओं का प्रभाव: कुछ विशेष दवाएं, जैसे डिप्रेशन या एंग्जायटी की दवाएं (Antidepressants), मानसिक विकारों की दवाएं (Antipsychotics) और अल्जाइमर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं लार ग्रंथियों को उत्तेजित करती हैं, जिससे लार का उत्पादन अचानक बढ़ जाता है।

  • सोने की गलत पोजीशन: पेट के बल (Prone) या एक करवट होकर सोने से गुरुत्वाकर्षण के कारण मुंह की लार आसानी से तकिए पर बह जाती है, जबकि पीठ के बल सोने पर लार गले से नीचे आसानी से उतर जाती है।

इस समस्या से राहत पाने के व्यावहारिक उपाय

यदि यह समस्या गंभीर अंतर्निहित बीमारी के कारण नहीं है, तो कुछ आसान उपायों को अपनाकर राहत पाई जा सकती है:

  1. सोने की स्थिति में बदलाव: करवट या पेट के बल सोने के बजाय पीठ के बल (Supine Position) सोने का अभ्यास करें। सिर को थोड़े ऊंचे तकिए पर रखें ताकि लार गले में न रुके और एसिड रिफ्लक्स की संभावना भी कम हो।

  2. नाक का वायुमार्ग साफ रखें: सोने से पहले भाप लें, सेलाइन नेजल स्प्रे का उपयोग करें या गुनगुने पानी से गरारे करें ताकि नाक खुली रहे और मुंह से सांस लेने की जरूरत न पड़े।

  3. खान-पान में सावधानी: रात को सोने से कम से कम 2 से 3 घंटे पहले भोजन करें। ज्यादा तला-भुना, मसालेदार भोजन, कैफीन और शराब से परहेज करें ताकि एसिड रिफ्लक्स ट्रिगर न हो।

  4. हाइड्रेटेड रहें: पर्याप्त पानी पिएं। शरीर में पानी की कमी होने पर भी लार गाढ़ी हो जाती है और ग्रंथियां असामान्य प्रतिक्रिया दे सकती हैं।

यदि तकिए पर लार गिरने की समस्या लगातार कई हफ्तों तक बनी रहे, सांस लेने में तकलीफ हो, या इसके साथ तेज खर्राटे और वजन घटने जैसे लक्षण दिखें, तो ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ या स्लीप फिजिशियन से परामर्श लेना आवश्यक है।

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