‘BJP नेताओं ने ही कांग्रेस के साथ मिलकर मुझे हटाने की रची साजिश’: मणिपुर के पूर्व सीएम एन. बीरेन सिंह का विस्फोटक दावा

पूर्वोत्तर के सीमावर्ती और रणनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य मणिपुर की राजनीति में उस वक्त एक जबर्दस्त भूचाल आ गया, जब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एन. बीरेन सिंह ने अपनी ही पार्टी के भीतर चल रहे कथित खेल को लेकर विस्फोटक आरोप लगाए। महीनों की खामोशी तोड़ते हुए बीरेन सिंह ने खुलकर दावा किया है कि मणिपुर में महीनों तक चली जातीय हिंसा और तनाव की आड़ में असल खेल उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी से बेदखल करने के लिए खेला गया था। उन्होंने सीधे तौर पर प्रदेश भाजपा के कुछ ताकतवर नेताओं पर उंगली उठाते हुए आरोप लगाया कि इन नेताओं ने उन्हें सत्ता से हटाने के लिए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के साथ मिलकर एक सुनियोजित साजिश रची थी। राजधानी इंफाल से लेकर नई दिल्ली के सत्ता गलियारों तक इस बयान ने हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि बीरेन सिंह ने न केवल अपनी ही पार्टी के नेताओं की निष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि मौजूदा सरकार की कार्यशैली को भी पूरी तरह कठघरे में खड़ा कर दिया है।

‘मुझे हटाने के लिए रची गई साजिश’: पार्टी के ही सीनियर नेताओं और कांग्रेस की मिलीभगत का आरोप

समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक खास और बेबाक इंटरव्यू में पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने अपने 2017 से लेकर 2025 तक के पूरे कार्यकाल का दर्द साझा किया। उन्होंने कहा कि 2017 में जब वे पहली बार मुख्यमंत्री बने, तभी से पार्टी का एक विशेष गुट उनके साथ सौतेला और अपमानजनक व्यवहार कर रहा था। बीरेन सिंह ने कहा कि कुछ स्थानीय विधायक और पुराने नेता इस सच्चाई को कभी पचा ही नहीं पाए कि कांग्रेस की पृष्ठभूमि से भाजपा में आया एक नेता राज्य में दो-दो बार पार्टी को सत्ता में लाकर मुख्यमंत्री पद पर काबिज कैसे हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये नेता भाजपा को अपनी निजी संपत्ति और पुश्तैनी जागीर समझते हैं। जब उन्हें लगा कि चुनावी या लोकतांत्रिक तरीके से बीरेन सिंह को हटाना मुमकिन नहीं है, तो उन्होंने राज्य में उपजे तनावपूर्ण हालात का फायदा उठाया, विपक्षी खेमे के साथ हाथ मिलाया और ऐसी परिस्थितियां गढ़ीं जिससे मुझे इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा। हालांकि, बीरेन सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि वे केंद्रीय नेतृत्व या दिल्ली के शीर्ष नेताओं पर कोई आरोप नहीं लगा रहे, बल्कि यह खेल स्थानीय स्तर पर मणिपुर के नेताओं द्वारा रचा गया था।

‘अब तो बीरेन बाहर है, फिर क्यों नहीं रुकी हिंसा?’: मौजूदा सरकार पर दागे तीखे सवाल

अपने इस्तीफे के बाद शांति बहाली के किए गए दावों पर तीखा तंज कसते हुए बीरेन सिंह ने राज्य के मौजूदा नेतृत्व को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह नैरेटिव गढ़ा गया था कि राज्य में जारी अशांति के लिए केवल बीरेन सिंह जिम्मेदार हैं और वे बहुसंख्यक मैतई समुदाय का पक्ष लेते हैं। उन्होंने सवाल किया कि अब तो बीरेन सिंह सत्ता से बाहर हो चुका है और पूर्ववर्ती आलोचक ही नई सरकार की कमान संभाल रहे हैं, तो फिर मणिपुर में शांति क्यों नहीं लौटी? अब हालात पहले से ज्यादा बदतर क्यों होते जा रहे हैं? उन्होंने हाल ही में नागा और कुकी समुदायों के बीच भड़की नई झड़पों का उल्लेख करते हुए पूछा कि हमारे इतने नागा भाइयों की हत्याएं क्यों हो रही हैं? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले इसे हिंदू बनाम ईसाई का रूप देकर पश्चिमी देशों और यूरोपियन यूनियन में प्रस्ताव पास कराए गए थे, लेकिन अब जब ईसाई समुदायों के बीच ही आपसी संघर्ष चल रहा है, तब वे तथाकथित मानवाधिकारवादी और यूरोपीय संसद कहां गायब हो गए हैं?

ड्रग माफिया, अवैध घुसपैठ और अफीम पर नकेल: ठप पड़ी कार्रवाइयों पर गहरी चिंता

पूर्व मुख्यमंत्री ने इस बात पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया कि उनके कार्यकाल में राज्य और देश की सुरक्षा के लिए जो सख्त अभियान शुरू किए गए थे, उन्हें वर्तमान प्रशासन ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने म्यांमार सीमा से होने वाली अफीम की अवैध खेती (पोपी कल्टीवेशन), ड्रग्स तस्करी के सिंडिकेट और जंगलों पर अवैध कब्जों के खिलाफ ‘वॉर ऑन ड्रग्स’ छेड़ रखा था, जो राज्य के भविष्य को बचाने के लिए बेहद जरूरी था। बीरेन सिंह ने कहा कि आज वह आक्रामकता और दृढ़ इच्छाशक्ति कहीं दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि संदिग्ध अवैध प्रवासियों की बायोमेट्रिक पहचान का काम बिना किसी ढिलाई के तुरंत आगे बढ़ाया जाना चाहिए। यदि कानूनन उन्हें तुरंत देश से बाहर नहीं निकाला जा सकता, तो कम से कम उनकी पुख्ता पहचान कर उन्हें निगरानी शिविरों (डिटेंशन/मॉनिटरिंग कैंप्स) में रखा जाना चाहिए ताकि राज्य की जनसांख्यिकी और सुरक्षा को स्थायी नुकसान न पहुंचे।

जनता का भरोसा खो रही सरकार: क्या आगामी चुनावों में भाजपा को चुकानी पड़ेगी भारी कीमत?

बीरेन सिंह ने राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी संगठन को बेहद गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर जनता के बुनियादी मुद्दों, सुरक्षा चिंताओं और शांति बहाली पर ठोस काम न होने के कारण वर्तमान राज्य सरकार और पार्टी दोनों ही जनता का विश्वास तेजी से खो रही हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या जनता की इस नाराजगी का असर आने वाले चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन पर पड़ सकता है, तो उन्होंने दो-टूक कहा कि यही उनकी सबसे बड़ी चिंता है। यदि सरकार ने समय रहते अपने एजेंडे को दुरुस्त नहीं किया और लोगों का विश्वास दोबारा हासिल नहीं किया, तो पार्टी को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि मणिपुर के लोग आज भी उनके कार्यकाल के साहसिक और पारदर्शी फैसलों को याद कर रहे हैं और जनता उन्हें दोबारा जिम्मेदारी संभालने के लिए पुकार रही है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर वापसी का फैसला चुनाव में मिलने वाले बहुमत और पार्टी नेतृत्व के विवेक पर निर्भर करता है।

मणिपुर में गहराया अंदरूनी संकट: क्या नए सिरे से तय होंगे सत्ता के समीकरण?

एन. बीरेन सिंह के इन सीधे और तीखे हमलों ने मणिपुर भाजपा के भीतर की गुटबाजी को पूरी तरह सतह पर ला दिया है। वर्तमान मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के लिए यह स्थिति बेहद असहज करने वाली है, क्योंकि वे उन्हीं नेताओं में शामिल रहे हैं जिन्होंने बीरेन सिंह को हटाने के लिए दबाव बनाया था। विपक्ष जहां बीरेन सिंह के इस बयान को भाजपा के अंदरूनी कलह और प्रशासनिक विफलता का सबसे बड़ा कबूलनामा बता रहा है, वहीं भाजपा आलाकमान के लिए आगामी चुनावों से पहले इस अंदरूनी बगावत को संभालना एक बड़ी चुनौती बन गया है। घाटी से लेकर पहाड़ियों तक सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहे मणिपुर में अब सत्ताधारी दल के भीतर छिड़ा यह सियासी संग्राम आने वाले दिनों में और भी ज्यादा आक्रामक मोड़ ले सकता है।

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