
तमिलनाडु के फिल्म जगत (कॉलीवुड) के लिए यह त्योहार खुशियों की नई सौगात लेकर आया है। राज्य सरकार ने पिछले सात वर्षों से लंबित फिल्म सब्सिडी के मामले को पूरी तरह सुलझाते हुए 224 तमिल फिल्मों के निर्माताओं के लिए कुल 15.68 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जारी कर दी है। चेन्नई के चेपॉक स्थित कलाईवानर अरंगम में आयोजित एक विशेष राज्यस्तरीय समारोह के दौरान सूचना एवं प्रसारण विभाग तथा सरकारी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सभी 224 चयनित फिल्म निर्माताओं को औपचारिक रूप से 7-7 लाख रुपये के चेक सौंपे गए। मंच पर चेक हासिल करते वक्त कई छोटे और मध्यम बजट के निर्माताओं की आंखें नम हो गईं, क्योंकि वे पिछले कई सालों से इस आर्थिक मदद की उम्मीद में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। फिल्म निर्माताओं ने इसे कॉलीवुड के इतिहास का सबसे बड़ा ‘दिवाली गिफ्ट’ करार दिया है।
2015 से 2022 तक की 224 फिल्मों का चयन, रिटायर्ड जस्टिस की कमेटी ने लगाई मुहर
सरकारी आंकड़ों और चयन प्रक्रिया के मुताबिक, यह सब्सिडी वर्ष 2015 से वर्ष 2022 के बीच निर्मित और रिलीज हुई कम बजट की तमिल फिल्मों के लिए स्वीकृत की गई है। इस पूरी चयन प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए मद्रास उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस. के. कृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया गया था। इस चयन समिति ने आठ वर्षों के दौरान रिलीज हुई सैकड़ों फिल्मों की पटकथा, सामाजिक प्रासंगिकता, निर्माण लागत और कलात्मक गुणवत्ता का गहन विश्लेषण किया। इसके बाद हर वर्ष के लिए 28-28 सर्वश्रेष्ठ फिल्मों को चुना गया, जिससे कुल फिल्मों की संख्या 224 तक पहुंची। समिति की अंतिम सिफारिशों और ऑडिट रिपोर्ट पर मुहर लगते ही बिना किसी देरी के 15 करोड़ 68 लाख रुपये का बजट अलॉट कर सीधे निर्माताओं के खातों में सहायता राशि ट्रांसफर कर दी गई।
90 फीसदी निर्माताओं की आजीविका पर था संकट, प्रोड्यूसर टी. शिवा ने जताया आभार
इस राहत पैकेज के जारी होते ही तमिल फिल्म प्रोड्यूसर्स काउंसिल (TFPC) और इंडस्ट्री के दिग्गज निर्माताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। जाने-माने निर्माता टी. शिवा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए सरकार के इस त्वरित कदम के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह केवल एक सामान्य सरकारी सब्सिडी नहीं है, बल्कि तमिल सिनेमा से जुड़े 224 परिवारों के जीवन में आई नई रोशनी और जीवनदान है। उन्होंने एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा करते हुए बताया कि इस सब्सिडी का लाभ पाने वाले 90 प्रतिशत निर्माता ऐसे थे, जो सिनेमा निर्माण के दौरान हुए भारी नुकसान के कारण अपनी आजीविका खो चुके थे और गंभीर आर्थिक तंगी में जी रहे थे। कई निर्माता कर्ज के बोझ तले दबे थे, जिनके लिए 7 लाख रुपये की यह एकमुश्त सहायता राशि उनके काम को दोबारा पटरी पर लाने और नई शुरुआत करने में संजीवनी का काम करेगी।
व्यावसायिक मुनाफे से ऊपर उठकर सामाजिक सरोकार वाली फिल्मों को मिलेगा प्रोत्साहन
चेन्नई में आयोजित चेक वितरण कार्यक्रम के दौरान विभागीय मंत्रियों और अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस सब्सिडी योजना का मुख्य उद्देश्य सिर्फ आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि तमिल सिनेमा को सामाजिक रूप से जागरूक बनाना है। कार्यक्रम में महान निर्देशक भारतीराजा की क्लासिक फिल्म ‘करुथम्मा’ (1994) का उदाहरण देते हुए कहा गया कि जिस तरह उस फिल्म ने कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंभीर सामाजिक कुरीति के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाई थी, उसी तरह आज भी सिनेमा को समाज की आवाज बनना चाहिए। सरकार उन स्वतंत्र फिल्ममेकर्स को संरक्षण देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है जो बड़े सितारों या व्यावसायिक फॉर्मूले के पीछे भागने के बजाय समाज के ज्वलंत मुद्दों, हाशिए पर मौजूद वर्गों के संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं पर फिल्में बनाते हैं। इस आर्थिक सहयोग से युवा और नए निर्देशकों को सामाजिक विषयों पर बिना किसी वित्तीय भय के स्वतंत्र सिनेमा बनाने का नया हौसला मिलेगा।
राज्य फिल्म पुरस्कारों में भी पूरी पारदर्शिता, केवल योग्यता और मेरिट बनेगी पैमाना
समारोह के दौरान सरकार की ओर से तमिल सिनेमा के राज्य पुरस्कारों (State Film Awards) को लेकर भी एक बड़ा नीतिगत फैसला साझा किया गया। प्रशासनिक प्रतिनिधियों ने घोषणा की कि भविष्य में तमिल सिनेमा के लिए दिए जाने वाले सभी राज्य स्तरीय पुरस्कारों और सरकारी सम्मानों में किसी भी प्रकार का राजनीतिक प्रभाव, व्यक्तिगत सिफारिश या पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में पुरस्कारों का वितरण पूरी तरह योग्यता, तकनीकी उत्कृष्टता और कलात्मक ईमानदारी के आधार पर किया जाएगा ताकि असली हुनरमंद तकनीशियनों, कलाकारों और लेखकों को उनका वाजिब हक मिल सके। फिल्म बिरादरी ने सरकार के इस पारदर्शी विजन का जोरदार स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि सात साल से रुके वित्तीय मामलों के निपटारे के बाद अब कॉलीवुड में स्वतंत्र सिनेमा का एक नया और समृद्ध दौर शुरू होगा।
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