अमिताभ बच्चन को कभी इस खास उपनाम से पुकारती थीं जया भादुड़ी, जब ससुर हरिवंश राय बच्चन ने लगाई रोक तो बदल गया बातचीत का अंदाज

भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन और जानी-मानी अभिनेत्री व सांसद जया बच्चन की शादीशुदा जिंदगी पिछले पांच दशकों से ज्यादा समय से आपसी समझ, सम्मान और भारतीय पारिवारिक मूल्यों की एक मिसाल बनी हुई है। 3 जून 1973 को एक सादे पारिवारिक समारोह में परिणय सूत्र में बंधे इस ऐतिहासिक जोड़े के जीवन से जुड़े अनगिनत संस्मरण आज भी प्रशंसकों और सिनेमा प्रेमियों के बीच बेहद चाव से सुने जाते हैं। जहां आज पूरी दुनिया अमिताभ बच्चन को ‘बिग बी’, ‘शहंशाह’ और ‘सदी के महानायक’ जैसे आदरणीय नामों से संबोधित करती है, वहीं शादी से पहले और करियर के शुरुआती दौर में जया भादुड़ी उन्हें एक बेहद अनोखे और मजाकिया उपनाम से पुकारा करती थीं। हालांकि, बच्चन परिवार के मुखिया और महान कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन के कानों तक जब यह बात पहुंची, तो उन्होंने अपनी नई नवेली बहू को बेहद सौम्य लेकिन स्पष्ट लहजे में एक ऐसी नसीहत दी, जिसने हमेशा के लिए जया द्वारा अमिताभ को संबोधित करने का तरीका ही बदल दिया। यह किस्सा आज भी बच्चन परिवार के आंतरिक अनुशासन और पारिवारिक मर्यादा की खूबसूरत बानगी पेश करता है।

जब कद-काठी देखकर जया बच्चन ने अमिताभ को दिया था ‘लंबू जी’ का उपनाम

यह वाकया उस समय का है जब अमिताभ बच्चन फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे थे और जया भादुड़ी सत्यजीत रे की फिल्मों और हिंदी सिनेमा में ‘गुड्डी’ व ‘उपहार’ जैसी कालजयी फिल्मों के जरिए एक स्थापित व सम्मानित स्टार बन चुकी थीं। उस दौर में अमिताभ बच्चन अपनी छह फीट दो इंच की असाधारण लंबाई और दुबले-पतले शरीर के कारण बाकी अभिनेताओं से बिल्कुल अलग नजर आते थे। शुरुआती दिनों में जब दोनों का परिचय हुआ और फिर फिल्म ‘बंसी बिरजू’ व ‘जंजीर’ के सेट पर नजदीकियां बढ़ीं, तो जया बच्चन अपने दोस्तों और करीबी सर्किल में अमिताभ को प्यार से ‘लंबू’ या ‘लंबू जी’ कहकर बुलाने लगी थीं। शूटिंग के सेट पर और रिहर्सल के दौरान भी अक्सर जया उन्हें इसी उपनाम से आवाज दिया करती थीं। चूंकि दोनों के बीच एक बेहद सहज और बेबाक दोस्ती थी, इसलिए अमिताभ भी उनके इस संबोधन पर सिर्फ मुस्कुरा दिया करते थे और उन्हें कभी इस बात से कोई आपत्ति नहीं हुई।

जब ससुर हरिवंश राय बच्चन ने प्यार से टोका और सिखाई पारिवारिक मर्यादा

शादी के बाद जब जया बच्चन विधिवत रूप से बच्चन परिवार की बहू बनकर ‘प्रतीक्षा’ बंगले में आईं, तो एक दिन घर की अनौपचारिक बातचीत के दौरान उनके मुंह से अमिताभ के लिए वही पुराना उपनाम ‘लंबू जी’ निकल गया। उस समय वहां अमिताभ के पिता और ‘मधुशाला’ के रचयिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन भी मौजूद थे। प्रख्यात साहित्यकार और उच्च संस्कारों वाले हरिवंश राय जी ने जब अपनी बहू को अपने बेटे के लिए इस तरह के शारीरिक कद पर आधारित उपनाम का इस्तेमाल करते सुना, तो उन्होंने इसे भारतीय दांपत्य जीवन की गरिमा के अनुकूल नहीं माना। उन्होंने तुरंत जया को डांटने या नाराज होने के बजाय बेहद संजीदगी और वात्सल्य से अपने पास बुलाया। उन्होंने जया को समझाते हुए कहा कि अब तुम दोनों केवल सह-कलाकार या दोस्त नहीं हो, बल्कि एक-दूसरे के जीवनसाथी और दांपत्य सूत्र में बंध चुके हो। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार के साथ-साथ एक गहरा आदर और सम्मान भी होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति को उसके शारीरिक बनावट या कद के आधार पर उपनाम देकर बुलाना मर्यादा के अनुरूप नहीं लगता।

ससुर की सीख को बनाया जीवन का नियम, फिर हमेशा के लिए बदला पुकारने का अंदाज

हरिवंश राय बच्चन की यह बात संवेदनशील और संस्कारी जया बच्चन के दिल को गहराई से छू गई। उन्होंने बिना किसी झिझक या तर्क के अपने ससुर के इस परामर्श को सिर-माथे स्वीकार किया। इसके बाद से उन्होंने सार्वजनिक मंचों, पारिवारिक समारोहों या घर के भीतर भी कभी दोबारा अमिताभ बच्चन के लिए ‘लंबू जी’ संबोधन का इस्तेमाल नहीं किया। इसके बाद जया बच्चन ने अपने पति को पुकारने के लिए पारंपरिक और सम्मानजनक तरीका अपनाया। वह उन्हें कभी सीधे नाम से नहीं बुलाती थीं, बल्कि भारतीय परंपरा के अनुरूप ‘अमित’ या फिर बातचीत में ‘सुनिए’ अथवा ‘जी’ कहकर संबोधित करने लगीं। एक पुराने साक्षात्कार में जया बच्चन ने खुद इस बात को स्वीकार किया था कि बाबूजी (हरिवंश राय बच्चन) के उस एक छोटे से सुझाव ने उन्हें यह अहसास कराया कि पारिवारिक जीवन में शब्दों का चयन और एक-दूसरे के प्रति व्यक्त किया जाने वाला सम्मान कितना गहरा प्रभाव डालता है।

‘जंजीर’ की सफलता से शादी के बंधन तक, एक ऐतिहासिक प्रेम कहानी का सफर

अमिताभ और जया की शादी का फैसला भी किसी फिल्मी कहानी से कम दिलचस्प नहीं था। वर्ष 1973 में जब प्रकाश मेहरा की फिल्म ‘जंजीर’ रिलीज होने वाली थी, तब अमिताभ बच्चन ने अपने दोस्तों और जया के साथ वादा किया था कि यदि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई, तो वे सभी जश्न मनाने के लिए लंदन की यात्रा पर जाएंगे। फिल्म रिलीज होते ही देश भर में ब्लॉकबस्टर साबित हो गई और अमिताभ रातों-रात एंग्री यंग मैन बनकर छा गए। जब उन्होंने लंदन जाने की तैयारी शुरू की और बाबूजी हरिवंश राय बच्चन से अनुमति मांगी, तो उन्होंने दो टूक सवाल किया कि तुम्हारे साथ कौन-कौन जा रहा है? जब अमिताभ ने जया का नाम लिया, तो हरिवंश राय बच्चन ने स्पष्ट कह दिया कि बिना विवाह किए तुम दोनों का एक साथ विदेश यात्रा पर जाना उचित नहीं होगा। यदि तुम्हें साथ जाना है, तो पहले शादी करनी होगी। अमिताभ ने पिता के आदेश का सम्मान करते हुए तुरंत जया के परिवार से बात की और अगले ही दिन चंद करीबियों की मौजूदगी में दोनों ने सात फेरे ले लिए।

पांच दशकों से अटूट है यह रिश्ता, पीढ़ियों के लिए बना प्रेरणास्रोत

आज जब आधुनिक दौर में रिश्तों में दूरियां और अलगाव आम बात हो चुकी है, अमिताभ और जया बच्चन का यह अटूट सफर हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। दोनों ने अपने करियर के सुनहरे दौर, व्यक्तिगत उतार-चढ़ाव, वित्तीय संकटों और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर संकटों (जैसे कुली फिल्म के हादसे के दौरान) का सामना मिलकर किया। जया बच्चन ने जहां बच्चों—श्वेता और अभिषेक के पालन-पोषण के लिए अपने चरम पर पहुंचे करियर को हंसते-हंसते विराम दे दिया, वहीं अमिताभ बच्चन ने हर मंच पर अपने परिवार और पत्नी के योगदान को खुले दिल से सराहा। ससुर हरिवंश राय बच्चन द्वारा दी गई वह छोटी सी सीख आज भी इस बात की गवाह है कि कैसे बड़ों का सही मार्गदर्शन और रिश्तों में परस्पर सम्मान किसी भी दांपत्य को अमर और अटूट बना देता है।

Check Also

‘रामायण’ में रावण का खूंखार रूप देख रो पड़ा यश का 5 साल का बेटा यथर्व; सुपरस्टार ने सुनाया दिल छू लेने वाला किस्सा

कन्नड़ सिनेमा से निकलकर पूरे देश के दिलों पर राज करने वाले ‘रॉकिंग स्टार’ यश …