पश्चिम एशिया संकट: ‘मध्यस्थ’ की भूमिका में पाकिस्तान? कांग्रेस ने कूटनीति पर उठाए सवाल, जयराम रमेश ने जयशंकर को घेरा

न्यूज डेस्क: पश्चिम एशिया (ईरान-अमेरिका) में जारी भीषण युद्ध के बीच भारत में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और कूटनीति को आड़े हाथों लेते हुए पाकिस्तान की ‘मध्यस्थ’ (Mediator) के रूप में उभरती भूमिका पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इसे भारत के लिए ‘शर्मनाक’ और कूटनीतिक विफलता करार दिया है। अमर उजाला की विशेष रिपोर्ट में जानें, क्यों विपक्ष सरकार के दावों से असंतुष्ट है और पाकिस्तान की भूमिका पर क्या है पूरा विवाद।


जयराम रमेश का तीखा हमला: ‘आतंकवाद का केंद्र अब मध्यस्थ कैसे?’

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया के माध्यम से विदेश मंत्री एस. जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह बेहद आपत्तिजनक है कि जिस देश (पाकिस्तान) ने दशकों तक आतंकवाद को पाला, ओसामा बिन लादेन को पनाह दी और परमाणु तकनीक की तस्करी (A.Q. Khan नेटवर्क) की, उसे आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यस्थ माना जा रहा है।

जयराम रमेश के मुख्य आरोप:

  • कूटनीतिक विफलता: मुंबई हमलों (26/11) के बाद डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने पाकिस्तान को दुनिया में अकेला कर दिया था, लेकिन आज मोदी सरकार के दौर में पाकिस्तान की अहमियत बढ़ रही है।

  • पसंदीदा मुनीर: रमेश ने दावा किया कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर अब राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम के पसंदीदा बन गए हैं, जो भारत की क्षेत्रीय पकड़ के लिए चिंताजनक है।

  • आतंकवाद पर ढिलाई: अप्रैल 2025 में पहलगाम हमलों के बावजूद भारत, पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करने में नाकाम रहा है।


सर्वदलीय बैठक: सरकार का आश्वासन बनाम विपक्ष का शक

यह राजनीतिक घमासान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक के बाद तेज हुआ है। बैठक में सरकार ने विपक्षी दलों को निम्नलिखित बिंदुओं पर भरोसा दिलाने की कोशिश की:

  1. ऊर्जा सुरक्षा: पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ किया कि देश में तेल और गैस की कोई कमी नहीं है।

  2. प्रवासी सुरक्षा: विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि युद्ध क्षेत्र में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है।

  3. सप्लाई चेन: विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जानकारी दी कि भारत सभी देशों के साथ संपर्क में है ताकि व्यापारिक मार्ग प्रभावित न हों।

हालांकि, कांग्रेस, सपा और आप जैसे दलों ने सरकार के इन आश्वासनों पर सवाल उठाए हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इस बैठक का बहिष्कार किया।


28 फरवरी से जारी है महायुद्ध

आपको बता दें कि इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच यह सीधा संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। इस युद्ध ने न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है, बल्कि दक्षिण एशिया के कूटनीतिक समीकरणों को भी बदल दिया है। पाकिस्तान इस संकट में खुद को एक ‘शांतिदूत’ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है, जिसे कांग्रेस भारत के प्रभुत्व के लिए बड़ा खतरा मान रही है।

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