US-ईरान सीजफायर के चंद घंटों बाद ही दहला मिडिल ईस्ट, तेल रिफाइनरी पर बड़ा हमला; तेहरान ने UAE और कुवैत पर दागीं मिसाइलें

तेहरान/वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के लिए घोषित युद्धविराम (Ceasefire) महज कागजों तक सीमित नजर आ रहा है। शांति की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद बुधवार को ईरान की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी पर भीषण हमला हुआ, जिसके बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की आग फिर से भड़क उठी है। इस हमले से तिलमिलाए ईरान ने ‘बदला’ लेने के लिए अमेरिका के सहयोगी देशों—यूएई (UAE) और कुवैत पर मिसाइलों और ड्रोनों की बरसात कर दी है।

ईरान के लावन द्वीप पर रिफाइनरी को बनाया निशाना

ईरानी तेल मंत्रालय के आधिकारिक न्यूज आउटलेट ‘शाना’ के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 10:00 बजे लावन द्वीप पर स्थित नेशनल ईरानी ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया। ईरानी अधिकारियों ने इसे ‘दुश्मन का कायराना हमला’ करार दिया है। हालांकि, इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन रिफाइनरी में भीषण आग लग गई जिसे बुझाने के लिए अग्निशमन टीमों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। ईरान ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर अपने विरोधियों को जिम्मेदार ठहराया है।

तेहरान का पलटवार: कुवैत और यूएई पर बरसीं मिसाइलें

रिफाइनरी पर हुए हमले के जवाब में ईरान ने आक्रामक रुख अपनाते हुए खाड़ी देशों पर हवाई हमले शुरू कर दिए। कुवैत ने पुष्टि की है कि उसके तेल संयंत्रों, पावर ग्रिड और वाटर डीसैलिनेशन प्लांट पर ईरानी मिसाइलों ने हमला किया है, जिससे काफी नुकसान हुआ है। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने कहा कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने कई ईरानी मिसाइलों को बीच में ही इंटरसेप्ट किया। बहरीन की राजधानी मनामा में भी हमलों की सूचना मिली है, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

ट्रंप का ‘नाजुक’ सीजफायर और पाकिस्तान की भूमिका

दिलचस्प बात यह है कि यह हिंसा तब हुई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ दो सप्ताह के सीजफायर का ऐलान किया था। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस समझौते को ‘बेहद नाजुक’ बताया है। इस शांति समझौते में पाकिस्तान ने मध्यस्थ (Mediator) के तौर पर अहम भूमिका निभाई है, लेकिन जमीन पर हालात इसके उलट दिख रहे हैं। समझौते की शर्तों के अनुसार लेबनान में भी लड़ाई रुकनी थी, लेकिन इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह हिजबुल्लाह के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेगा।

क्या फिर छिड़ेगी महाजंग?

सीजफायर के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों पर शुल्क लगाने की ईरान की जिद और एक-दूसरे के तेल संसाधनों पर हमले यह संकेत दे रहे हैं कि यह शांति समझौता ज्यादा लंबा नहीं टिकने वाला। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने पहले ही चेतावनी दी थी कि उनका हाथ ‘ट्रिगर’ पर है। अब रिफाइनरी पर हुए हमले और ईरान के जवाबी पलटवार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है कि कहीं यह संघर्ष एक बड़ी क्षेत्रीय जंग में न बदल जाए।

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