UNSC में भारत का ‘पावर प्रहार’: राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने कहा- ‘वीटो का विस्तार नहीं हुआ, तो सुधार का कोई मतलब नहीं’

न्यूयॉर्क/संयुक्त राष्ट्र: भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मौजूदा कार्यप्रणाली और संरचना पर कड़ा प्रहार किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बिना वीटो अधिकार वाली स्थायी श्रेणी के विस्तार के, सुरक्षा परिषद में कोई भी सुधार अधूरा और बेमानी होगा।


80 साल पुरानी संरचना अब ‘बेकार’

राजदूत हरीश ने ‘अंतर-सरकारी वार्ता’ (IGN) की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि UNSC की वर्तमान संरचना 1945 की भू-राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर बनी थी। 80 साल पहले की यह व्यवस्था आज की 21वीं सदी की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती है।

असंतुलन का गणित:

भारतीय राजदूत ने आंकड़ों के जरिए समझाया कि कैसे पिछले सुधारों ने वीटो शक्ति वाले देशों को और शक्तिशाली बना दिया:

  • पुराना अनुपात: पहले स्थायी (वीटो शक्ति वाले) और अस्थायी सदस्यों का अनुपात 5:6 था।

  • वर्तमान अनुपात: 1960 के दशक में हुए सुधार के बाद इसे 5:10 कर दिया गया।

  • प्रभाव: इससे वीटो रखने वाले 5 देशों का दबदबा परिषद के बाकी सदस्यों पर और बढ़ गया, जिससे परिषद की वैधता पर सवाल उठते हैं।


वीटो पर भारत के तीखे सवाल

राजदूत हरीश ने वीटो शक्ति के दुरुपयोग को लेकर भी वैश्विक शक्तियों को आईना दिखाया।

  1. संकीर्ण स्वार्थ: उन्होंने कहा कि कई बार स्थायी सदस्यों ने वैश्विक शांति के बजाय अपने संकीर्ण राष्ट्रीय हितों को साधने के लिए वीटो का इस्तेमाल किया है, जिससे समाधान के रास्ते में बाधाएं उत्पन्न हुई हैं।

  2. असमानता का खतरा: भारत का तर्क है कि यदि केवल अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाई जाती है और स्थायी सदस्यों की श्रेणी वैसी ही रहती है, तो परिषद में असंतुलन और असमानता और अधिक गहरी हो जाएगी।

  3. विस्तार अनिवार्य: सुरक्षा परिषद के वास्तविक सुधार के लिए ‘वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों’ की श्रेणी का विस्तार करना अब अनिवार्य हो गया है।


क्यों स्थायी सीट का हकदार है भारत?

भारत दशकों से UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है। भारत का पक्ष मजबूत होने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:

  • सबसे बड़ा लोकतंत्र: दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और लोकतंत्र का प्रतिनिधित्व।

  • आर्थिक महाशक्ति: दुनिया की तेजी से बढ़ती पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था।

  • शांति सेना में योगदान: संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों (Peacekeeping Operations) में भारत का योगदान दुनिया में सबसे अग्रणी रहा है।

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