गढ़मुक्तेश्वर में ‘भाईचारे’ की जीत: मदन चौहान के एक फोन ने खत्म की 5 दिन की तनातनी, टला भाकियू भानु और भाजपा समर्थकों का टकराव

गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़)। तीर्थ नगरी गढ़मुक्तेश्वर में पिछले पांच दिनों से चला आ रहा हाईवोल्टेज ड्रामा शनिवार शाम को नाटकीय मोड़ के साथ समाप्त हो गया। पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता मदन चौहान और भाकियू भानु के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह के बीच उपजा विवाद ‘बड़े भाई-छोटे भाई’ के संबोधन के साथ सुलझ गया। इस समझौते के बाद पुलिस प्रशासन, जो पिछले 24 घंटों से सांसें थामे बैठा था, ने राहत की सांस ली है।


विवाद की जड़: होटल उद्घाटन और अपशब्दों का आरोप

विवाद की शुरुआत पिछले सोमवार को हुई थी, जब एक होटल के उद्घाटन के दौरान मंच पर बैठे ठाकुर भानु प्रताप सिंह पर भाजपा को लेकर अपशब्द बोलने का आरोप लगा। पास ही बैठे मदन चौहान ने इसका कड़ा विरोध किया, जिसके बाद दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक हुई। मामला इतना बढ़ा कि भाकियू भानु ने शुक्रवार को कार्यकर्ताओं को ‘डंडे’ लेकर गढ़ पहुंचने का आह्वान कर दिया था।

आमने-सामने समर्थक: छावनी में तब्दील हुआ गढ़

शनिवार सुबह से ही माहौल बेहद तनावपूर्ण था:

  • भाकियू भानु: पुराने गढ़-दिल्ली रोड स्थित एक बाग में सैकड़ों कार्यकर्ता और पदाधिकारी जमा थे। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष ठाकुर योगेश प्रताप सिंह के आने के ऐलान से जोश चरम पर था।

  • भाजपा खेमा: दूसरी तरफ गढ़-स्याना मार्ग पर मदन चौहान के कार्यालय पर यज्ञ और भंडारे का आयोजन था, जहाँ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर सैकड़ों समर्थक पहुंचे थे।

टकराव की आशंका को देखते हुए एडीएम संदीप कुमार और एडिशनल एसपी विनीत भटनागर समेत भारी पुलिस बल और पीएसी के जवान तैनात थे।


एक कॉल और मामले का पटापेक्ष

शाम 04:25 बजे जैसे ही ठाकुर योगेश प्रताप सिंह का काफिला सभा स्थल पहुंचा, समर्थकों की भारी भीड़ सड़क पर आ गई। लेकिन सभा शुरू होने के पांच मिनट बाद ही योगेश प्रताप ने घोषणा की कि मदन चौहान ने ठाकुर भानु प्रताप सिंह को फोन किया है।

मदन चौहान ने फोन पर कहा— “भानू जी, आप मेरे बड़े भाई हो, जो हुआ उसे भूल जाइए।” जवाब में भानु प्रताप सिंह ने भी उन्हें छोटे भाई के रूप में स्वीकार कर लिया।

प्रशासन ने ली राहत की सांस

समझौते की खबर मिलते ही तनाव खत्म हो गया। ठाकुर योगेश प्रताप सिंह ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अब गंगा स्नान करें और शांतिपूर्वक अपने घर लौटें। इसके बाद उन्होंने खुद ब्रजघाट में गंगा आरती में भाग लिया। पुलिस के आला अधिकारियों ने, जो दिन भर पसीना बहा रहे थे, इस सुलह के बाद शांति बहाली पर संतोष जताया।

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