नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट के गलियारों में इन दिनों एक जज के समर्पण की कहानी हर जुबान पर है। मामला आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी से जुड़ा था, लेकिन चर्चा का केंद्र बनीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा। न्याय की कुर्सी पर बैठी इस महिला जज ने न केवल देर शाम तक अदालत चलाकर फैसला सुनाया, बल्कि इस दौरान उन्होंने अपने ‘जन्मदिन’ के जश्न से ऊपर अपने संवैधानिक दायित्व को रखा।
शाम 6 बजे शुरू हुआ न्याय का पाठ: 50 मिनट तक पढ़ा फैसला
आमतौर पर शाम 4 बजे तक अदालतों में सन्नाटा पसरने लगता है, लेकिन उस दिन कहानी अलग थी। शाम के 6:10 बज रहे थे जब जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने ओपन कोर्ट में अरविंद केजरीवाल की याचिका पर फैसला पढ़ना शुरू किया। यह कोई साधारण या छोटा आदेश नहीं था। जस्टिस शर्मा को अपना विस्तृत निर्णय पूरा पढ़ने में करीब 50 मिनट का समय लगा। इस दौरान कोर्ट रूम में वकीलों और सुरक्षाकर्मियों की भारी भीड़ जमी रही।
दिग्गज वकीलों की मौजूदगी और जज का ‘वर्किंग’ लंच
उस दिन अदालत की व्यस्तता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दोपहर 2:30 बजे सोनिया गांधी से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई होनी थी। कोर्ट रूम में अभिषेक मनु सिंघवी, कपिल सिब्बल और एएसजी एस.वी. राजू जैसे देश के दिग्गज कानूनी चेहरे मौजूद थे। हालांकि, जस्टिस शर्मा ने स्पष्ट किया कि केजरीवाल मामले का फैसला तैयार करने की गंभीरता के कारण वह लंच के बाद नियमित सुनवाई के लिए नहीं बैठ पाएंगी। उन्होंने पूरा समय गहन कानूनी विश्लेषण और फैसला लिखने में बिताया।
जन्मदिन की जानकारी मिलते ही भावुक हुआ माहौल
रात करीब 7:30 बजे जब अदालत की कार्यवाही समाप्त हुई, तब वहां मौजूद लोगों को पता चला कि आज जस्टिस शर्मा का जन्मदिन है। जब वकीलों ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ देर शाम तक काम करने के लिए धन्यवाद दिया, तो माहौल सम्मान और प्रशंसा से भर गया। जस्टिस शर्मा ने मुस्कुराते हुए यह साबित कर दिया कि एक जज के लिए कानून और इंसाफ का तराजू किसी भी व्यक्तिगत खुशी से बड़ा होता है।
क्या है केजरीवाल की याचिका का मामला?
यह पूरा कानूनी विवाद दिल्ली आबकारी नीति (Excise Policy Case) में कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।
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केजरीवाल का तर्क: उनकी गिरफ्तारी पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पास उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं।
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ED का दावा: जांच एजेंसी का कहना है कि उनके पास मनी ट्रेल और गवाहों के पुख्ता बयान हैं जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की कड़ियों को जोड़ते हैं।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में हर कानूनी पहलू को बारीकी से परखा है। उनके इस फैसले और कार्यशैली ने न्यायपालिका के प्रति आम जनता के विश्वास को और मजबूत किया है।
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