नई दिल्ली: राजनीति में लोकप्रियता जितनी तेजी से बढ़ती है, कभी-कभी उतनी ही तेजी से दरक भी जाती है। आम आदमी पार्टी (AAP) के कभी ‘पोस्टर बॉय’ रहे राघव चड्ढा इन दिनों एक डिजिटल विरोध का सामना कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह विरोध सड़कों पर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के ‘अनफॉलो’ बटन के जरिए हो रहा है। विशेष रूप से जेनरेशन जेड (Gen Z) यानी आज का युवा वर्ग, जो कभी राघव की आधुनिक छवि का दीवाना था, अब उनसे किनारा करता दिख रहा है।
वजह 1: ‘पड़ोस के लड़के’ से ‘ग्लैमरस लीडर’ तक का सफर
राघव चड्ढा की शुरुआती पहचान एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और सुलझे हुए युवा नेता की थी। उनका ‘ब्लिंकिट’ डिलीवरी जैसा सामान्य व्यवहार और आम मुद्दों पर बातचीत उन्हें पारंपरिक नेताओं से अलग बनाती थी।
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परिणीति से शादी: बॉलीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा के साथ शादी के बाद राघव की छवि में एक बड़ा ‘ग्लैमर’ जुड़ गया। युवाओं के एक वर्ग को लगा कि वे ‘आम आदमी’ के मुद्दों से दूर होकर हाई-प्रोफाइल लाइफस्टाइल और सेलिब्रिटी कल्चर में खो गए हैं।
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दूरी का अहसास: ‘पड़ोस का लड़का’ दिखने वाला नेता अब लाल कालीन और वीआईपी आयोजनों में अधिक दिखने लगा, जिससे युवाओं का जुड़ाव कम होने लगा।
वजह 2: पाला बदलना और ‘आदर्शवाद’ का टूटना
राघव चड्ढा का AAP छोड़कर भाजपा (BJP) में शामिल होना उनके सबसे बड़े समर्थकों के लिए एक झटका माना जा रहा है।
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पुरानी राजनीति की वापसी: विशेषज्ञों का मानना है कि Gen Z भ्रष्टाचार मुक्त और स्वच्छ राजनीति की उम्मीद करता है। राघव का अचानक पाला बदलना युवाओं को वही ‘पुरानी और गंदी राजनीति’ जैसा महसूस हुआ, जिसके खिलाफ उन्होंने अपनी पहचान बनाई थी।
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विश्वासघात की भावना: जेएनयू के प्रोफेसर अजय गुडवर्ती के अनुसार, युवा पीढ़ी ‘विश्वासघात’ के प्रति बेहद संवेदनशील है। अगर उन्हें लगता है कि कोई नेता आदर्शवाद छोड़कर व्यक्तिगत हितों के लिए समझौते कर रहा है, तो वे उसे तुरंत नकार देते हैं।
‘अनफॉलो’ करना: डिजिटल दुनिया का नया विरोध
आज के दौर में किसी नेता का विरोध करने के लिए पुतले जलाना या नारेबाजी करना ही एकमात्र तरीका नहीं है।
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साइलेंट प्रोटेस्ट: अनफॉलो करना एक ‘राजनीतिक बयान’ बन गया है। यह बिना शोर मचाए अपनी असहमति दर्ज कराने का तरीका है।
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साख पर संकट: राघव ने जो ऑनलाइन पहचान बनाई थी, उसी की वजह से अब उनके हर राजनीतिक कदम की बारीकी से जांच हो रही है। फॉलोअर्स की संख्या में गिरावट यह बताती है कि डिजिटल स्पेस में साख बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और स्थिरता कितनी जरूरी है।
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