केरल में वामपंथ का ‘सूर्यास्त’: क्या भगवान अयप्पा के क्रोध और सबरीमाला ‘स्वर्ण घोटाले’ ने ढहा दिया LDF का किला?

Kerala Election Results 2026: केरल की सत्ता के गलियारों में इस बार ‘लाल’ रंग फीका पड़ गया है और ‘तिरंगे’ की लहर साफ दिखाई दे रही है। सोमवार को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों ने वामपंथी गठबंधन (LDF) को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF को प्रचंड बहुमत मिला है। राजनीतिक गलियारों में इस हार को सिर्फ सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) नहीं, बल्कि ‘सबरीमाला स्वर्ण घोटाले’ और धार्मिक आस्था के साथ हुए खिलवाड़ का नतीजा माना जा रहा है।

क्या था सबरीमाला ‘सोना घोटाला’ जिसने हिला दी सरकार?

सबरीमाला मंदिर, जो करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है, अचानक भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में आ गया। इस विवाद की जड़ें सितंबर 2025 में गहरी हुईं:

  • गायब हुआ सोना: उद्योगपति विजय माल्या द्वारा दान किए गए 30.3 किलोग्राम सोने और तांबे की परतों को ‘मरम्मत’ के नाम पर मूर्तियों और गर्भगृह से हटा दिया गया था।

  • कागजों में हेराफेरी: ‘त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड’ (TDB) के अधिकारियों ने दस्तावेजों में शातिराना तरीके से सोने की प्लेटों को ‘तांबे की प्लेटें’ दर्ज कर दिया।

  • ED की एंट्री: जनवरी 2026 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। जांच में खुलासा हुआ कि मरम्मत के लिए चेन्नई भेजी गई प्लेटों से 4.54 किलोग्राम शुद्ध सोना निकाल लिया गया और उसकी जगह महज सोने की पॉलिश कर दी गई।

जांच की आंच: मुख्य पुजारी से लेकर अधिकारियों तक गिरफ्तारी

इस घोटाले ने तब और तूल पकड़ा जब SIT और ED की जांच में बड़े चेहरों के नाम सामने आए। मंदिर के मुख्य पुजारी (तंत्री) कंदरारू राजीवरु और मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी समेत 11 लोगों की गिरफ्तारी ने केरल के हिंदू समाज को झकझोर कर रख दिया। जनता में यह संदेश गया कि वामपंथी सरकार के नियंत्रण वाला देवस्वोम बोर्ड मंदिर की संपत्ति की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रहा।

LDF की हार के 3 प्रमुख कारण:

  1. बोर्ड पर सरकारी नियंत्रण: चूंकि TDB सीधे तौर पर राज्य सरकार के अधीन है, इसलिए भ्रष्टाचार की पूरी नैतिक जिम्मेदारी मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल पर आ गिरी।

  2. आस्था बनाम सरकार: 2018 में महिलाओं के प्रवेश विवाद के बाद से ही हिंदू मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग वामपंथियों से नाराज चल रहा था। सोने की चोरी को भगवान अयप्पा के ‘अपमान’ और ‘श्राप’ के रूप में देखा गया।

  3. कांग्रेस का आक्रामक रुख: कांग्रेस (UDF) ने इस घोटाले को चुनाव में ‘ब्रह्मास्त्र’ की तरह इस्तेमाल किया। उन्होंने इसे “आस्था पर डकैती” करार दिया, जो सीधे तौर पर मतदाताओं के दिल में उतर गया।

चुनावी आंकड़े: कांग्रेस की ‘बम-बम’

केरल विधानसभा की 140 सीटों में से कांग्रेस नीत UDF को मिली बढ़त ने 50 सालों का इतिहास बदल दिया है। रुझानों के मुताबिक:

  • अकेले कांग्रेस 60 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज कर रही है।

  • वामपंथियों का ‘आखिरी किला’ माने जाने वाले केरल में LDF की सीटें ऐतिहासिक रूप से कम हुई हैं।

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