होर्मुज में ‘चीनी टैंकर’ पर हमला: बीजिंग और तेहरान की बैठक से पहले मचा बवाल, ड्रैगन ने अमेरिका-ईरान जंग पर जताई ‘गहरी चिंता’

बीजिंग/तेहरान: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण जंग की लपटें अब चीन तक पहुंच गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक चीनी क्रू और मालिकाना हक वाले तेल टैंकर पर हुए हमले ने बीजिंग को हिलाकर रख दिया है। यह हमला उस वक्त हुआ जब चीन और ईरान के विदेश मंत्री एक अहम बैठक करने वाले थे। इस घटना के बाद चीन ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में जहाजों की सुरक्षा को लेकर ‘गहरी चिंता’ व्यक्त की है।

बैठक से ठीक पहले हमला, निशाने पर चीनी जहाज

चीनी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को आधिकारिक पुष्टि की कि होर्मुज स्ट्रेट में एक ऐसे टैंकर को निशाना बनाया गया है, जिस पर चीनी नागरिक सवार थे। चीनी मीडिया ‘कैक्सिन’ के मुताबिक, टैंकर पर “CHINA OWNER & CREW” के निशान मौजूद थे। चौंकाने वाली बात यह है कि यह हमला बुधवार को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची की मुलाकात से ठीक पहले हुआ। हालांकि, इस तनाव के बीच हुई बैठक में दोनों नेताओं ने होर्मुज मार्ग को फिर से खोलने और सुरक्षा बहाली पर चर्चा की है।

मार्शल आइलैंड्स का झंडा, पर क्रू चीनी

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जहाज पर सवार चीनी नागरिक फिलहाल सुरक्षित हैं और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। समुद्री सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, जिस जहाज पर हमला हुआ उसकी पहचान ‘JV Innovation’ के रूप में की जा रही है, जो मार्शल आइलैंड्स के झंडे के साथ चल रहा था। सोमवार को यूएई तट के पास मीना सकर के पास इस जहाज के डेक पर आग लगने की सूचना मिली थी।

होर्मुज में फंसा दुनिया का व्यापार, हजारों नाविक संकट में

अमेरिका और ईरान के बीच जारी गोलाबारी ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते ‘होर्मुज’ को युद्ध के मैदान में बदल दिया है। ताज़ा हमलों की वजह से इस मार्ग से होने वाला ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 200 से ज्यादा जहाज और 20,000 नाविक इस समय खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं। अमेरिका ने दावा किया है कि उसके तीन विध्वंसक जहाजों पर ईरानी हमले के बाद उसने जवाबी कार्रवाई में ईरान के द्वीपों को निशाना बनाया है।

ईरान का सबसे बड़ा खरीदार है चीन

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस महायुद्ध का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। चीन वर्तमान में ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और युद्ध के बावजूद उसने मार्च में भारी मात्रा में आयात जारी रखा था। अब अपने ही हितों और नागरिकों पर खतरा देख बीजिंग ने कड़ा रुख अपनाया है। चीन का कहना है कि वह मिडिल ईस्ट में चल रहे इस झगड़े से प्रभावित हो रहे वाणिज्यिक जहाजों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

सीजफायर की कोशिशें और अनसुलझे सवाल

वॉशिंगटन फिलहाल तेहरान के जवाब का इंतज़ार कर रहा है ताकि इस लड़ाई को रोका जा सके। अमेरिका ने एक शांति प्रस्ताव ईरान के सामने रखा है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य विवादित मुद्दों पर अब भी पेंच फंसा हुआ है। गुरुवार को भी दोनों देशों के बीच भारी गोलीबारी हुई, जिससे यह स्पष्ट है कि शांति की राह फिलहाल आसान नहीं है।

Check Also

‘भारतीयों से भरे जहाज पर रूसी ड्रोन हमला, कप्तान की मौत’: जेलेंस्की के सनसनीखेज दावे से दुनिया में मचा बवाल

रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण युद्ध अब काला सागर (Black Sea) के अंतरराष्ट्रीय …