तेहरान का ‘शांति प्रस्ताव’ बनाम ट्रंप का रुख: क्या सुलझेगा अमेरिका-ईरान का पेच या और गहराएगा तनाव?

अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक टकराव एक बार फिर अहम मोड़ पर खड़ा है। जहां एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति में गतिरोध के संकेत मिल रहे हैं, वहीं तेहरान ने शांति के लिए एक नया और व्यापक प्रस्ताव वाशिंगटन के सामने पेश किया है। हालांकि, दोनों पक्षों के दावों के बीच विरोधाभास बरकरार है, जिससे मध्य पूर्व की स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है।

ईरान का ‘नया शांति प्रस्ताव’: क्या है तेहरान की शर्तें?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने परमाणु वार्ता के दायरे से आगे बढ़कर अमेरिका के सामने अपनी पुरानी मांगों को ही नए तरीके से रखा है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबाबादी के अनुसार, इस व्यापक प्रस्ताव के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • प्रतिबंधों से पूर्ण राहत: ईरान ने अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने की मांग की है।

  • संपत्ति की वापसी: विदेशों में फ्रीज किए गए ईरानी धन की तत्काल रिहाई।

  • सैन्य वापसी: ईरान के पड़ोसी क्षेत्रों से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और तैनाती हटाने की मांग।

  • क्षेत्रीय शांति: लेबनान समेत सभी मोर्चों पर शत्रुता को समाप्त करना और फरवरी में हुए सैन्य अभियानों के लिए मुआवजे का भुगतान।

ये वही शर्तें हैं जिन्हें ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में ‘बकवास’ कहकर सिरे से खारिज कर दिया था।

मध्यस्थता की कोशिशें और ट्रंप का लचीलापन

पाकिस्तान इस संकट में एक अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। हाल ही में इस्लामाबाद में हुई प्रत्यक्ष शांति वार्ता के बाद यह प्रस्ताव वाशिंगटन तक पहुंचाया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, ट्रंप ने भी अब थोड़े नरम संकेत दिए हैं। सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि समझौता हो जाएगा, जिससे सैन्य कार्रवाई की नौबत नहीं आएगी। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने हमलों में देरी करने का आग्रह किया है ताकि कूटनीतिक रास्ते खुले रहें।

दावों की जंग: क्या अमेरिका दिखा रहा है लचीलापन?

एक ओर ईरानी मीडिया ‘तसनीम’ ने दावा किया है कि अमेरिका ने तेल प्रतिबंधों में अस्थायी छूट देने और परमाणु गतिविधियों में सीमित रियायत देने पर सहमति जताई है। वहीं, दूसरी ओर अमेरिकी अधिकारियों ने इन खबरों का पुरजोर खंडन किया है। इस विरोधाभास से साफ है कि पर्दे के पीछे बातचीत तो हो रही है, लेकिन आधिकारिक तौर पर कोई भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं है।

क्षेत्रीय अस्थिरता और परमाणु कार्यक्रम का भविष्य

अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है। ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू का साझा लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना और उसकी मिसाइल क्षमता को कमजोर करना है। दूसरी ओर, ईरान किसी भी कीमत पर अपनी रक्षात्मक क्षमताओं से समझौता करने के मूड में नहीं है। हाल ही में हुए ड्रोन हमलों ने क्षेत्र की अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। अब दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह कूटनीतिक कोशिश किसी सार्थक समझौते का रूप लेगी या तनाव फिर से एक बड़े युद्ध की ओर मुड़ जाएगा।

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