वाराणसी : उत्तर प्रदेश के वाराणसी में नमो घाट के पास प्रस्तावित भव्य ‘मॉडल स्टेशन’ के निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। मंगलवार की देर रात रेलवे, जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त टीम ने एक बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया। आदमपुर थाना क्षेत्र के किला कोहना (भदऊं चुंगी) स्थित काशी स्टेशन के पास रेलवे की जमीन पर बने अवैध मस्जिद और कब्रिस्तान की भूमि से जुड़े अवैध कब्जों को बुलडोजर चलाकर पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। खास बात यह रही कि प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ढहाए गए ढांचे का मलबा भी रात में ही मौके से साफ करवा दिया।
हाईकोर्ट से हरी झंडी मिलते ही आधी रात गरजा बुलडोजर
जानकारी के अनुसार, उत्तर रेलवे की निर्माण परियोजनाओं से संबंधित इस विवादित भूमि को लेकर काफी समय से कानूनी लड़ाई चल रही थी और माननीय उच्च न्यायालय (High Court) में एक रिट याचिका दायर थी। हाल ही में इस भूमि को लेकर कोर्ट का फैसला रेलवे के पक्ष में आया। अदालत का आदेश मिलते ही प्रशासन ने बिना वक्त गंवाए देर रात ही कार्रवाई का प्लान तैयार किया। धार्मिक स्थल की इस भूमि को लेकर रेलवे और स्थानीय पक्षों के बीच लंबे समय से गतिरोध बना हुआ था, जो कोर्ट के आदेश के बाद समाप्त हो गया।
अर्धसैनिक बल और पीएसी के सुरक्षा घेरे में हुआ ध्वस्तीकरण
अतिक्रमण हटाने की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए थे। एडीसीपी काशी जोन वैभव बांगर, एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह और इंस्पेक्टर आदमपुर विमल मिश्रा के नेतृत्व में कई थानों की पुलिस फोर्स, भारी संख्या में अर्धसैनिक बल (Paramilitary Forces) और पीएसी (PAC) के जवानों ने पूरे किला कोहना इलाके को अपनी घेरेबंदी में ले लिया था। प्रशासन की सख्त और सूझबूझ भरी रणनीति के चलते पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और कहीं से भी किसी तरह के विरोध या तनाव की स्थिति देखने को नहीं मिली।
₹350 करोड़ से बदलेगी काशी स्टेशन की सूरत, नमो घाट से सीधा जुड़ाव
गौरतलब है कि काशी रेलवे स्टेशन के जीर्णोद्धार और भव्य विस्तार प्रोजेक्ट के तहत परिसर और उसके आसपास के करीब 47.26 एकड़ क्षेत्र में निर्माण कार्य प्रस्तावित है। उत्तर रेलवे द्वारा लगभग 350 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से काशी स्टेशन का ‘मेजर अपग्रेडेशन’ किया जा रहा है। इस पुनर्विकास प्रोजेक्ट के तहत स्टेशन के दोनों प्रवेश द्वारों पर तीन मंजिला आलीशान बिल्डिंग का निर्माण कराया जा रहा है। इस अपग्रेडेशन के बाद राजघाट की तरफ वाला हिस्सा काशी स्टेशन का मुख्य प्रवेश द्वार बन जाएगा, जबकि वर्तमान प्रवेश द्वार को सेकेंड एंट्री के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
लखनऊ के चारबाग के बाद यूपी का दूसरा सबसे आधुनिक ‘एयर कॉनकोर्स’
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए काशी स्टेशन को पूरी तरह रीमॉडल किया जा रहा है। यहां पटरियों और प्लेटफॉर्मों की संख्या बढ़ाने के साथ ही वर्तमान प्लेटफॉर्मों की लंबाई भी बढ़ाई जाएगी। इस स्टेशन की सबसे बड़ी खासियत यहां बनने वाला ‘एयर कॉनकोर्स’ (हवाई गलियारा) होगा। करीब 200 मीटर लंबा और 100 मीटर चौड़ा यह वातानुकूलित (AC) कॉनकोर्स दोनों मुख्य भवनों की दूसरी मंजिल को आपस में जोड़ेगा।
यह न केवल यात्रियों के लिए फुटओवर ब्रिज (FOB) का काम करेगा, बल्कि इसके भीतर वर्ल्ड क्लास वेटिंग लाउंज, अत्याधुनिक टॉयलेट्स, शॉपिंग के लिए फूड कोर्ट और मल्टीपर्पज स्टॉल भी बनाए जाएंगे। प्रत्येक प्लेटफॉर्म पर आने-जाने के लिए आधुनिक एस्केलेटर (स्वचालित सीढ़ियां) और लिफ्ट लगाई जाएंगी। लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन के बाद उत्तर रेलवे (लखनऊ मंडल) का यह दूसरा सबसे बड़ा और आधुनिक एयर कॉनकोर्स होगा। उत्तर रेलवे के एडीआरएम बृजेश कुमार यादव के मुताबिक, इस पूरे मेगा प्रोजेक्ट को मार्च 2027 तक शत-प्रतिशत पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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