केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देश के वित्तीय सुरक्षा तंत्र को दरकिनार कर चलाए जा रहे एक बेहद चौंकाने वाले और बड़े अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क (International Financial Network) का पर्दाफाश किया है। इस पूरे नेटवर्क का इस्तेमाल बैंकिंग नियमों, ‘नो योर कस्टमर’ (KYC) नियमों और सरकारी नियामक निगरानी से बचते हुए भारत में चुपके से विदेशी फंड लाने और उसे खपाने के लिए किया जा रहा था।
इस अवैध क्रॉस-बॉर्डर सिंडिकेट के केंद्र में अमेरिका स्थित एक संगठन ‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ (The Timothy Initiative – TTI), उसके भारतीय सहयोगी और कुछ विदेशी ऑपरेटिव्स शामिल हैं।
अमेरिका के बैंक से जारी हुए 1,000 से अधिक डेबिट कार्ड
CNN-News18 की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, ED की जांच में यह बात सामने आई है कि अमेरिका के ट्रूइस्ट बैंक (Truist Bank) द्वारा जारी किए गए 1,000 से भी अधिक डेबिट कार्ड साल 2019 से भारत में अवैध रूप से बांटे गए थे।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन कार्डों का इस्तेमाल वो लोग कर रहे थे जो वास्तविक खाताधारक (Account Holders) थे ही नहीं। इसका मुख्य मकसद यह था कि अमेरिकी खातों में पड़े विदेशी धन को सीधे भारत के अलग-अलग एटीएम (ATM) के माध्यम से कैश निकालकर कानून प्रवर्तन एजेंसियों और वित्तीय संस्थानों की नजरों से पूरी तरह छिपाया जा सके।
‘संतोष कुमार’ के नाम पर प्रिंट हुए 23 डेबिट कार्ड
जांच अधिकारियों का दावा है कि TTI के फाइनेंस हेड अजीत वर्गीज मथाई के सीधे निर्देशों पर, जांच एजेंसियों को गुमराह करने के लिए एक ही आम भारतीय नाम ‘संतोष कुमार’ के तहत कम से कम 23 डेबिट कार्ड प्रिंट करवाए गए थे।
पहले यह सिस्टम रीजनल आइडेंटिफिकेशन कोड्स (क्षेत्रीय पहचान कोड) का इस्तेमाल करता था। जांचकर्ताओं का मानना है कि जानबूझकर एक ही नाम का इस्तेमाल एंड-यूज़र्स (पैसा प्राप्त करने वाले असली लोगों) की पहचान छिपाने और भारत के सख्त बैंकिंग सेफगार्ड्स को तोड़ने के लिए किया गया था।
करोड़ों रुपये का हुआ संदिग्ध लेन-देन: आंकड़ों पर एक नजर
ED की प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस पूरे समानांतर बैंकिंग ढांचे के जरिए अल्पकाल में ही करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई है:
| समयावधि (Timeline) | लेन-देन का प्रकार (Transaction Type) | अनुमानित राशि (Amount Involved) |
| नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 | ओवरऑल अवैध वित्तीय तंत्र का उपयोग | ~92.55 करोड़ रुपये ($9.99 मिलियन) |
| जनवरी 2024 से मार्च 2026 | सीधे एटीएम (ATM) से नकद निकासी | ~44.00 करोड़ रुपये |
| तलाशी के दौरान बरामदगी | अजीत मथाई के परिसरों से नकद जब्त | 37 लाख रुपये (500 के नोटों में) |
नक्सल प्रभावित बस्तर और धमतरी में सबसे ज्यादा एक्टिविटी
ED ने अपनी जांच में छत्तीसगढ़ के कुछ संवेदनशील हिस्सों में हुए लेन-देन को लेकर विशेष चिंता जताई है। अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ के बस्तर और धमतरी क्षेत्रों में लगभग 6.34 करोड़ रुपये की हाई-फ्रीक्वेंसी (बार-बार होने वाली) एटीएम निकासी को ट्रैक और डिकोड किया है। चूंकि ये क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से वामपंथी उग्रवाद (LWE/नक्सलवाद) से प्रभावित रहे हैं, इसलिए जांच एजेंसियां इस बात को लेकर बेहद सतर्क हैं कि कहीं इस विदेशी फंड का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों में तो नहीं किया जा रहा था।
जांच में यह भी पाया गया है कि यह संगठन आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े समुदायों के बीच जाकर विशेष वैचारिक प्रचार, गुप्त प्रशिक्षण और टारगेटेड कार्यक्रम चला रहा था।
बेंगलुरु एयरपोर्ट से हुई मुख्य ऑपरेटिव की गिरफ्तारी
इस पूरे अंतरराष्ट्रीय रैकेट का भंडाफोड़ तब तेज हुआ, जब सुरक्षा एजेंसियों ने बेंगलुरु हवाई अड्डे (Bangalore Airport) से मीका मार्क नामक एक विदेशी वित्तीय ऑपरेटिव को हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान मीका के पास से अमेरिका के ट्रूइस्ट बैंक के 24 एक्टिव डेबिट कार्ड बरामद हुए। इसके साथ ही उसके पास से ₹37 लाख कैश और TTI संगठन से जुड़ा एक कॉर्पोरेट डेबिट कार्ड भी मिला।
ED अब इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि इस विदेशी फंडिंग और नकद निकासी के जरिए भारत के मुख्य वित्तीय निगरानी तंत्र के समानांतर कोई नया खतरनाक ढांचा तो तैयार नहीं किया जा रहा था। फिलहाल फंड के अंतिम लाभार्थियों (Beneficiaries) की पहचान के लिए छापेमारी और जांच लगातार जारी है।
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