चीन के ‘दुश्मन’ को भारत देगा ‘अस्त्र’, PM मोदी ने इंडोनेशिया के साथ किए 20 ऐतिहासिक करार; जानें ब्रह्मोस डील की पूरी डिटेल

साउथ चाइना सी (दक्षिण चीन सागर) में चीन की बढ़ती दादागिरी और विस्तारवादी नीति के बीच भारत ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक रणनीतिक कदम उठाया है। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की मौजूदगी में दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, खनिज और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कुल 20 ऐतिहासिक समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। लेकिन इस कूटनीतिक दौरे की सबसे बड़ी और वैश्विक हलचल मचाने वाली खबर भारत की सबसे घातक ब्रह्मोस (BrahMos) और स्वदेशी अस्त्रा (Astra) मिसाइल के एक्सपोर्ट (निर्यात) को लेकर हुआ महासौदा है।

₹3,877 करोड़ की मेगा डील: इंडोनेशिया को लोन भी दे सकता है भारत

रक्षा विशेषज्ञों और कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, भारत और इंडोनेशिया के बीच हुआ यह रक्षा सौदा करीब 450 मिलियन डॉलर (लगभग 3,877 करोड़ रुपये) का होने जा रहा है। इस महासौदे को अमलीजामा पहनाने के लिए भारत सरकार इंडोनेशिया को एक विशेष रक्षा ऋण (लोन) भी मुहैया करा सकती है। यह पहली बार है जब भारत अपनी पूरी तरह स्वदेशी और हवा से हवा में मार करने वाली घातक ‘अस्त्रा मिसाइल’ किसी दूसरे देश को सप्लाई करने जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने इस ऐतिहासिक डील पर कहा कि इन दोनों मिसाइलों के निर्यात से वैश्विक स्तर पर ‘मेक इन इंडिया’ और भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री की क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

दुनिया का कोई रडार नहीं रोक सकता भारत का ‘ब्रह्मास्त्र’

दुनिया की एकमात्र सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ को भारत ने अपने सदाबहार मित्र रूस के सहयोग से देश में ही तैयार किया है। इस मिसाइल का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी को मिलाकर रखा गया है।

  • अचूक मारक क्षमता: ब्रह्मोस को रक्षा जगत में ‘ब्रह्मास्त्र’ माना जाता है, क्योंकि दुनिया का कोई भी रडार, एंटी-मिसाइल सिस्टम या एयर डिफेंस वेपन इसे हवा में इंटरसेप्ट (रोक) नहीं सकता। एक बार दागे जाने के बाद यह अपने टारगेट को पूरी तरह नेस्तनाबूद करके ही दम लेती है।

  • युद्ध का इतिहास: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना ने ब्रह्मोस मिसाइल के एयर-वर्जन का इस्तेमाल कर पड़ोसी देश के एयरबेस को तबाह करने में सफलता पाई थी। इंडोनेशिया से पहले भारत, फिलीपींस और वियतनाम जैसे चीन के पड़ोसी देशों के साथ भी ब्रह्मोस मिसाइल का सफल सौदा कर चुका है।

पहली बार बिकेगी स्वदेशी ‘अस्त्रा मिसाइल’, 100 KM से ज्यादा है रेंज

ब्रह्मोस के साथ ही इंडोनेशिया ने भारत की स्वदेशी ‘अस्त्रा मिसाइल’ खरीदने पर भी मुहर लगाई है।

  • मेकिंग और क्षमता: इसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है और इसका उत्पादन भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) द्वारा किया जाता है।

  • लड़ाकू विमानों की जान: यह मिसाइल सुखोई-30 MKI, मिग-29 और स्वदेशी एलसीए तेजस जैसे फाइटर जेट्स के लिए अचूक हथियार है।

  • बियोंड विजुअल रेंज: बिना देखे दुश्मन को हवा में ही ढेर करने वाली (BVR) इस मिसाइल की मारक क्षमता 100 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर तक है। भारतीय वायुसेना ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इसके जरिए दुश्मन के लड़ाकू विमानों को खदेड़ चुकी है।

हिंद महासागर की निगरानी के लिए गुरुग्राम सेंटर में तैनात होगा इंडोनेशियाई अफसर

मिसाइल और हथियारों के इस बड़े सौदे के अलावा दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा को लेकर भी बेहद महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं:

  • गुरुग्राम सेंटर में तैनाती: इंडोनेशिया अब भारत की राजधानी दिल्ली के नजदीक गुरुग्राम में स्थित भारतीय नौसेना के IFC-IOR (इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन) में अपना एक ‘संपर्क अधिकारी’ (Liaison Officer) तैनात करेगा। यह सेंटर हिंद महासागर क्षेत्र की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और सुरक्षा के लिए बनाया गया है।

  • साझा चौकसी: साझा घोषणा के तहत भारत और इंडोनेशिया के तटरक्षक बल (Coast Guards) अब हिंद महासागर में मिलकर संयुक्त चौकसी बरतेंगे।

  • इंडो-पैसिफिक और आपदा प्रबंधन: दोनों देशों के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मेरीटाइम डोमेन अवेयरनेस, समुद्र में रेस्क्यू ऑपरेशन और आपातकालीन आपदा प्रबंधन (Disaster Management) को लेकर भी व्यापक कूटनीतिक करार हुए हैं।

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