‘कोई रिश्ता नहीं रखना, सब बंद कर दो…’ NATO समिट में सहयोगी देश स्पेन पर आखिर इतना क्यों भड़क गए डोनाल्ड ट्रंप

अंतरराष्ट्रीय डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान अपनी ही सरकार और अधिकारियों को एक बेहद चौंकाने वाला आदेश देकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में खलबली मचा दी है। ट्रंप ने अपने ही सहयोगी देश स्पेन के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका को स्पेन के साथ अपने सभी व्यापारिक संबंधों को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए। नाटो के महासचिव मार्क रुट्टे की मौजूदगी में ट्रंप ने स्पेन को एक ‘बेकार की वजह’ और ‘घटिया साझेदार’ तक कह डाला। ट्रंप का दावा है कि व्यापार बंद होने के बाद स्पेन खुद भागता हुआ अमेरिका के पास वापस आएगा।

‘स्पेन के साथ सब व्यापार बंद कर दिया जाए’ — ट्रंप के तीखे बोल

शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने स्पेन पर रक्षा बजट में अपना पूरा योगदान न देने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने अपने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश देते हुए कहा, “मैंने स्पेन से बात नहीं की। वह एक बेकार की वजह है। वैसे भी हम अब स्पेन के साथ कोई बिजनेस नहीं करना चाहते हैं। मैं चाहता हूं कि आप इसे तुरंत बंद कर दें। स्पेन नाटो में एक घटिया साझेदार है; वे न तो अभियानों में भाग लेते हैं, न ही पैसे भरते हैं। उनसे बात तक मत करो। वे हमारी वजह से बहुत पैसा कमाते हैं, अब देखते हैं कि वे कितना कमाते हैं।” ट्रंप ने आगे दावा किया कि ऐसा करने से स्पेन खुद उनके आगे गिड़गिड़ाएगा और कहेगा— ‘प्लीज सर, हमें आपके साथ व्यापार करना है।’

ट्रंप के इस महा-गुस्से के पीछे हैं ये 2 सबसे बड़ी वजहें:

1. रक्षा बजट (Military Spending) बढ़ाने से स्पेन का इनकार

डोनाल्ड ट्रंप शुरुआत से ही इस नीति के पक्षधर रहे हैं कि नाटो के सभी सदस्य देश अपनी सुरक्षा के लिए अपने डिफेंस बजट को बढ़ाएं, ताकि अमेरिका पर वित्तीय बोझ कम हो सके। स्पेन नाटो का एकमात्र ऐसा देश है जिसने साल 2035 तक अपने रक्षा बजट को जीडीपी (GDP) के 5 प्रतिशत तक ले जाने के नाटो के नए लक्ष्य को मानने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। स्पेन ने इसके लिए एक विशेष छूट ली है, जिसके तहत वह अपना सैन्य खर्च जीडीपी के केवल 2.1 प्रतिशत पर ही सीमित रखेगा। हालांकि, स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के अनुसार, स्पेन ने अपना सैन्य खर्च 2021 के 1.4% से बढ़ाकर 2025 में 2.1% किया है, फिर भी वह नाटो में रक्षा पर सबसे कम खर्च करने वाले देशों की सूची में शामिल है।

2. ईरान संकट के दौरान अमेरिका को नहीं दिया भाव

स्पेन से ट्रंप की तल्खी और खुन्नस की एक और बड़ी वजह हालिया ईरान संकट है। जब अमेरिका ईरान के खिलाफ मोर्चे पर था, तब स्पेन ने अमेरिकी सेना को अपने सैन्य अड्डों (Military Bases) का उपयोग करने से साफ रोक दिया था। इतना ही नहीं, स्पेन ने ईरान के खिलाफ हमलों के लिए अमेरिकी वायुसेना को अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) के इस्तेमाल की इजाजत भी नहीं दी। इसके अलावा स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों की सार्वजनिक रूप से तीखी आलोचना करते हुए इसे ‘एकतरफा सैन्य कार्रवाई’ करार दिया था।

स्पेन का करारा पलटवार: अकेले प्रतिबंध लगाना नामुमकिन

ट्रंप के इस बेहद आक्रामक बयान पर स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज के कार्यालय ने भी तीखी और सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। स्पेनिश सरकार ने कहा कि वे ट्रंप के बयानों को हमेशा की तरह बेहद सामान्य मान रहे हैं और अमेरिका के साथ संबंध खराब करने का उनका कोई इरादा नहीं है।

स्पेन ने अमेरिका को आईना दिखाते हुए याद दिलाया कि व्यापार के मामले में अमेरिका खुद स्पेन के साथ ‘ट्रेड सरप्लस’ की स्थिति में है (यानी अमेरिका स्पेन से फायदा कमाता है)। इसके साथ ही स्पेन ने बड़ा कानूनी दांव खेलते हुए साफ कर दिया कि वह यूरोपीय संघ (European Union) के सीमा शुल्क और व्यापार संघ का हिस्सा है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक अमेरिका अकेले स्पेन को निशाना बनाकर कोई भी एकतरफा व्यापारिक प्रतिबंध (Trade Sanctions) नहीं लगा सकता है। वहीं, नाटो प्रमुख मार्क रुट्टे ने भी ट्रंप के सामने स्पेन का बचाव करते हुए कहा कि स्पेन ने पिछले साल बड़ा कदम उठाकर अपने रक्षा खर्च को 2 फीसदी के पार पहुंचाया है।

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