ईरान-इजरायल युद्ध के बीच अमेरिका का इजरायल पर ‘कड़ा रुख’: जानिए क्यों बढ़ी तल्खी और क्या है पूरा मामला

वाशिंगटन/यरुशलम: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ईरान के साथ जारी युद्ध के दौरान अमेरिका और उसके सबसे भरोसेमंद साथी इजरायल के बीच आपसी मतभेद गहरा गए हैं। अमेरिकी प्रशासन ने इजरायल की कुछ सैन्य रणनीतियों और युद्ध के लक्ष्यों को लेकर ‘नाराजगी’ जाहिर की है। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों ‘सुपरपावर’ अमेरिका अपने सबसे पुराने मित्र देश पर ही बरस पड़ा है।


तल्खी की असली वजह: ‘रेजीम चेंज’ बनाम ‘आत्मरक्षा’

मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के बीच विवाद की मुख्य वजह युद्ध का अंतिम उद्देश्य है।

  • इजरायल का लक्ष्य: प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि इजरायल का मकसद केवल ईरानी खतरों को रोकना नहीं, बल्कि ‘ईरानी शासन को जड़ से उखाड़ना’ (Regime Change) है।

  • अमेरिका की चिंता: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाला अमेरिकी प्रशासन शुरू में संयुक्त हमलों (Operation Epic Fury) में शामिल था, लेकिन अब अमेरिका को डर है कि युद्ध को बहुत अधिक खींचने और शासन बदलने की कोशिश से पूरे मध्य पूर्व में ऐसी आग लगेगी जिसे बुझाना नामुमकिन होगा। अमेरिका चाहता है कि हमला केवल परमाणु और मिसाइल ठिकानों तक सीमित रहे, न कि व्यापक मानवीय तबाही का कारण बने।

नागरिक ठिकानों और स्कूलों पर हमले से बढ़ा तनाव

पिछले कुछ दिनों में तेहरान और अन्य ईरानी शहरों में हुए हवाई हमलों में रिहायशी इमारतों, अस्पतालों और स्कूलों को नुकसान पहुँचा है।

  1. मानवीय संकट: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन हमलों की कड़ी आलोचना हो रही है। अमेरिका ने इजरायल को चेतावनी दी है कि नागरिक ठिकानों पर हमले ‘युद्ध अपराध’ की श्रेणी में आ सकते हैं और इससे अमेरिका की वैश्विक छवि खराब हो रही है।

  2. कानूनी सवाल: अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में भी इस युद्ध की वैधता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कुछ सांसदों का कहना है कि इजरायल के साथ मिलकर किया गया यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।

तेल की कीमतें और आर्थिक दबाव

ईरान ने जवाबी कार्रवाई में हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को प्रभावित करने और खाड़ी देशों के तेल ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

  • अमेरिका पर घरेलू दबाव बढ़ रहा है क्योंकि युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।

  • अमेरिका चाहता है कि इजरायल अब ‘युद्ध विराम’ या ‘डी-एस्केलेशन’ की ओर बढ़े, जबकि इजरायल ‘अंतिम विजय’ तक रुकने को तैयार नहीं है।

क्या दरक रही है दोस्ती?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहली बार है जब युद्ध के बीच में ही दोनों देशों के बीच इतने गहरे मतभेद उभरकर सामने आए हैं। नेतन्याहू ने शनिवार को कहा कि इजरायल अपनी “पूरी ताकत” के साथ युद्ध जारी रखेगा, जबकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय (State Department) अब कूटनीतिक समाधान और बातचीत की मेज पर लौटने की वकालत कर रहा है।

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