नई दिल्ली। साल 2026 में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर एक विशेष खगोलीय और ज्योतिषीय घटना घटने जा रही है। 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। विशेष बात यह है कि यह चंद्रग्रहण शनि देव की स्वराशि कुंभ में लगेगा। ऐसे में बहनों और भाइयों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या चंद्रग्रहण के कारण राखी बांधने के समय और मुहूर्त में कोई बदलाव होगा या सूतक काल का प्रभाव पड़ेगा।
सावन महीने में लगेंगे दो-दो ग्रहण
हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष का पान करने के बाद भगवान शिव के कंठ की ज्वाला को शांत करने के लिए देवी-देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया था। तभी से सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक और बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। इस वर्ष सावन का महीना 30 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है।
इस साल सावन के महीने में दो बड़े ग्रहण लगने जा रहे हैं:
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सूर्य ग्रहण: पहला सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को सावन अमावस्या के दिन लगेगा।
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चंद्र ग्रहण: दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को सावन पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन लगेगा।
रक्षाबंधन तिथि और चंद्रग्रहण का समय
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श्रावण पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 27 अगस्त 2026 (गुरुवार) को सुबह 09:08 बजे से
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श्रावण पूर्णिमा तिथि समाप्त: 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को सुबह 09:48 बजे तक
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रक्षाबंधन का त्योहार: 28 अगस्त 2026
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चंद्रग्रहण की समय-सीमा: 28 अगस्त 2026 को चंद्रग्रहण सुबह 06:53 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा।
क्या राखी बांधने पर पड़ेगा चंद्रग्रहण का असर?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 28 अगस्त को लगने वाला चंद्रग्रहण ऐसे समय में पड़ेगा जब भारत में दिन का समय होगा। यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
धार्मिक और ज्योतिषीय नियमों के अनुसार, जो ग्रहण भारत में दृश्यमान (देखने योग्य) नहीं होता, उसका धार्मिक महत्व मान्य नहीं होता है। इसलिए:
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इस चंद्रग्रहण का सूतक काल भारत में मान्य नहीं रहेगा।
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रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के समय पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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बहनें पूरे दिन किसी भी शुभ समय में अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बांध सकती हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि की कुंभ राशि में लगने वाले इस चंद्रग्रहण का सभी राशियों पर ज्योतिषीय प्रभाव तो देखने को मिलेगा, लेकिन धार्मिक दृष्टि से रक्षाबंधन के त्योहार और पूजा-पाठ पर इसका कोई असर या मनाही नहीं होगी।
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