
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार ने ग्रामीण जनता के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026’ को मंजूरी दे दी गई है। आजादी के दशकों बाद भी जो गांव सार्वजनिक परिवहन से महरूम थे, अब वहां रोडवेज की बसें न केवल पहुंचेंगी, बल्कि रात में वहीं विश्राम भी करेंगी।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने वाला क्रांतिकारी कदम बताया है।
12,200 गांवों के लिए 28 सीटर बसों का बेड़ा
योजना के पहले चरण में प्रदेश के 12,200 दूर-दराज के गांवों को चिन्हित किया गया है।
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छोटी बसें: गांवों की संकरी सड़कों को देखते हुए सरकार ने 28 सीटर बसों को चलाने का फैसला लिया है।
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किसे होगा लाभ: शहर जाकर पढ़ाई करने वाले छात्रों, अपनी फसल मंडी ले जाने वाले किसानों और आपात स्थिति में अस्पताल जाने वाले मरीजों के लिए यह सेवा जीवनदायिनी साबित होगी।
टाइम टेबल: सुबह शहर, शाम को वापस गांव
बसों का संचालन ग्रामीणों की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है:
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रात्रि विश्राम: बसें रात के समय संबंधित गांव में ही रुकेंगी।
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सुबह का शेड्यूल: सुबह 10 बजे से पहले बस गांव से चलकर जिला मुख्यालय पहुंच जाएगी।
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वापसी: शाम 4 बजे से रात 8 बजे के बीच बस मुख्यालय से वापस गांव के लिए रवाना होगी।
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न्यूनतम फेरे: हर चिन्हित गांव में बस का दिन में कम से कम दो बार आना-जाना अनिवार्य होगा।
किराया और टैक्स में बड़ी राहत
ग्रामीणों पर बोझ न पड़े, इसके लिए सरकार ने इस योजना को विशेष रियायतें दी हैं:
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टैक्स फ्री: इन रूटों पर चलने वाली बसों को रोड टैक्स और परमिट शुल्क से पूरी तरह मुक्त रखा गया है।
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किराया निर्धारण: जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता वाली कमेटी स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर किफायती किराया तय करेगी।
ओला-उबर पर शिकंजा: अब रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
कैबिनेट ने परिवहन एग्रीगेटर नीति में बदलाव करते हुए ओला-उबर जैसी कंपनियों के लिए कड़े नियम लागू किए हैं:
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पंजीकरण: अब इन कंपनियों को परिवहन विभाग में अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
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फीस: आवेदन शुल्क 25,000 रुपए और लाइसेंस के लिए 5 लाख रुपए देने होंगे।
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वैधता: लाइसेंस 5 साल के लिए वैध होगा, जिसे 5,000 रुपए देकर रिन्यू कराया जा सकेगा।
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