डायरेक्टर ने आर्थिक मदद लेने से किया साफ इनकार, बोले- ‘सिख संगत का प्यार ही मेरी सबसे बड़ी कमाई’

पंजाबी सिनेमा और धार्मिक-सांस्कृतिक विषयों पर बनी फिल्मों को लेकर समय-समय पर दर्शकों और सिख संगत की ओर से भावुक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती हैं। हाल ही में रिलीज या चर्चा में आई फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर एक ऐसा ही अनूठा मामला सामने आया है। खबर है कि फिल्म निर्माण में हुए भारी आर्थिक नुकसान की भरपाई करने और निर्देशक का समर्थन करने के लिए कुछ सिख संगठनों और श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारों के बाहर विशेष गुल्लकें रखवाईं, ताकि संगत से दान इकट्ठा करके फिल्म निर्माता व निर्देशक को आर्थिक राहत दी जा सके।

फिल्म ‘सतलुज’ पंजाब के ऐतिहासिक, सामाजिक और संवेदनशील मुद्दों पर आधारित बताई जा रही है। फिल्म के रिलीज के दौरान आई विभिन्न अड़चनों, सिनेमाघरों में कम शो मिलने या कानूनी/तकनीकी बाधाओं के कारण इसके निर्माताओं को बड़ा आर्थिक झटका लगा था। जब सिख संगत को इस बात का अहसास हुआ कि पंजाब और कौम के मुद्दों पर फिल्म बनाने वाले निर्देशक को भारी घाटा उठाना पड़ा है, तो उन्होंने एकजुट होकर मदद का हाथ बढ़ाने का फैसला किया।

डायरेक्टर का बड़ा बयान: आर्थिक मदद लेने से किया साफ इनकार

जब यह बात फिल्म ‘सतलुज’ के निर्देशक तक पहुंची कि उनके नुकसान की भरपाई के लिए गुरुद्वारों में गुल्लकें रखकर चंदा इकट्ठा किया जा रहा है, तो उन्होंने तुरंत इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। डायरेक्टर ने बेहद विनम्रता लेकिन दृढ़ता के साथ संगत से मिलने वाली किसी भी प्रकार की वित्तीय या आर्थिक मदद को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया।

डायरेक्टर ने एक संदेश जारी करते हुए कहा कि उनके लिए सिख संगत और दर्शकों का प्यार ही सबसे बड़ी कमाई और सम्मान है। उन्होंने कहा कि फिल्म बनाने का उनका उद्देश्य किसी प्रकार का मुनाफा कमाना नहीं था, बल्कि एक महत्वपूर्ण मुद्दे को जनता के सामने लाना था। नुकसान की भरपाई के लिए गुरुद्वारों के माध्यम से धन जुटाना उनके सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने संगत से अपील की कि जो पैसा उनके लिए इकट्ठा किया जा रहा है, उसे किसी गरीब, जरूरतमंद या पंथिक कार्यों में इस्तेमाल किया जाए, न कि किसी फिल्म के नुकसान को पूरा करने में।

दर्शकों और संगत ने की डायरेक्टर के स्वाभिमान की तारीफ

डायरेक्टर द्वारा आर्थिक मदद लेने से मना करने के इस फैसले की सोशल मीडिया और पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में जमकर तारीफ हो रही है। लोगों का कहना है कि जहां आज के दौर में सिनेमा केवल व्यावसायिक मुनाफे तक सीमित होकर रह गया है, वहीं ‘सतलुज’ के डायरेक्टर ने अपने सिद्धांतों और स्वाभिमान को सबसे ऊपर रखा है।

सिख पंथ और पंजाब के सामाजिक मामलों के जानकारों का मानना है कि इस घटना ने दर्शकों और फिल्मकारों के बीच एक नया भावनात्मक संबंध स्थापित किया है। भले ही डायरेक्टर ने गुल्लक से मिलने वाले चंदे को लेने से इनकार कर दिया हो, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर जनता के बीच एक नई सहानुभूति और उत्सुकता जरूर पैदा कर दी है।

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