2027 के ‘मिशन लखनऊ’ के लिए दिल्ली में सजेगा मंच: 10 अगस्त को हाईकमान परखेगा यूपी कांग्रेस की सांगठनिक ताकत; सपा संग गठबंधन

उत्तर प्रदेश में होने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह से एक्शन मोड में आ चुका है। 2024 के लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर मिली बड़ी सफलता के बाद, पार्टी अब राज्य में अपने जमीनी पुनरुत्थान को स्थायी रूप देना चाहती है। इसी सिलसिले में कांग्रेस हाईकमान ने 10 अगस्त को नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UPCC) के शीर्ष नेताओं, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और पार्टी सांसदों की एक अति-महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पार्टी की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा मौजूद रहेंगे। दिल्ली में होने वाली इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य पिछले डेढ़ साल में यूपी में बूथ स्तर तक बनाए गए सांगठनिक ढांचे की वास्तविक स्थिति का आकलन करना है। कांग्रेस का दावा है कि राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों पर ब्लॉक और बूथ स्तर तक संगठन का पुनर्गठन पूरा कर लिया गया है। अब दिल्ली दरबार इस दावे की जमीनी हकीकत को परखेगा। इस बैठक की सबसे खास बात यह होगी कि हाल ही में एआईसीसी (AICC) द्वारा उत्तर प्रदेश के लिए नियुक्त किए गए छह नए सचिव—अभिषेक दत्त, कुणाल चौधरी, जगदीश चंद्र जांगिड़, संजीव आर्य, वरुण चौधरी और अब्दुल हन्नान—पहली बार राज्य की तैयारियों की रिपोर्ट के साथ इस संगठनात्मक बैठक में हिस्सा लेंगे। पार्टी नेतृत्व इन सभी नए प्रभारियों को अलग-अलग मंडलों और क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपने के साथ-साथ उनके लिए लक्ष्य निर्धारित करेगा।

सपा के साथ गठबंधन और ‘क्वालिटी सीट्स’ की पहचान: 10 अगस्त की बैठक का मुख्य एजेंडा

10 अगस्त की इस बड़ी बैठक में सांगठनिक समीक्षा के अलावा समाजवादी पार्टी (SP) के साथ गठबंधन के स्वरूप और सीट-बंटवारे के फॉर्मूले पर भी गंभीर चर्चा होगी। हाल ही में राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश के कांग्रेस सांसदों के साथ एक अलग बैठक की थी, जिसमें सांसदों ने एकसुर में यह राय व्यक्त की थी कि विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन को जल्द से जल्द अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। सांसदों का तर्क था कि सीट-शेयरिंग के फैसले में देरी होने से निचले स्तर के कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जिससे दोनों दलों के बीच मीडिया में बयानबाजी और कड़वाहट की आशंका बढ़ जाती है। 10 अगस्त की बैठक में राज्य नेतृत्व को यह निर्देश जारी किए जा सकते हैं कि वे गठबंधन के तहत कांग्रेस के लिए सबसे ज्यादा संभावनाओं वाली और जिताऊ ‘क्वालिटी सीट्स’ (Quality Seats) का चिह्नांकन शुरू करें, ताकि अखिलेश यादव के साथ बातचीत के मेज पर ठोस आंकड़े रखे जा सकें।

इसके अलावा, बैठक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरने के लिए जनहित के प्रमुख मुद्दों की पहचान की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, बेरोजगारी, महंगाई, सरकारी नौकरियों में पेपर लीक, युवाओं की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और दलित व पिछड़ा वर्ग के अधिकारों जैसे मुद्दों को आक्रामक ढंग से उठाने के लिए राज्यस्तरीय आंदोलनों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। हाल ही में शुरू किए गए ‘छात्रों की गूंज’ अभियान और प्रयागराज में होने वाली छात्र रैली के जरिए युवाओं और छात्रों को पार्टी से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

दलित वोट बैंक में आई सेंध और बसपा (BSP) के कमजोर पड़ते जनाधार को देखते हुए कांग्रेस ने पूर्व आम आदमी पार्टी नेता राजेंद्र पाल गौतम को यूपी का नया एआईसीसी प्रभारी बनाया है। पार्टी का मुख्य ध्यान संविधान बचाओ अभियान के जरिए दलित और अति-पिछड़ी जातियों को वापस अपने पाले में लाने पर है। कांग्रेस मानती है कि यदि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी अपनी उपस्थिति को दहाई के अंकों में मजबूती से दर्ज कराती है, तो 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए पूरे उत्तर भारत में एक नया राजनीतिक माहौल बनेगा। ऐसे में 10 अगस्त को दिल्ली में होने वाली यह बैठक केवल एक समीक्षा बैठक नहीं होगी, बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश संग्राम के लिए कांग्रेस का पहला आधिकारिक शंखनाद साबित होने जा रही है।

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