‘कॉकरोचों का प्रदर्शन’ और कांग्रेस को आईना! शशि थरूर बोले- ‘Gen-Z की नब्ज पकड़ने में कहां चूकी पार्टी?’

मुंबई में आयोजित ‘इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ (IIMUN) के 15वें वार्षिकोत्सव के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर का एक बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। नीट-यूजी परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के छात्र आंदोलन की गूंज के बीच शशि थरूर ने अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को कड़वी सच्चाई से रूबरू कराया है। उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया कि राहुल गांधी और कांग्रेस के छात्र आउटरीच कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ के बावजूद युवाओं के बीच वह जुड़ाव नहीं बन पाया जो CJP के प्रदर्शन ने हासिल किया। हालांकि, थरूर ने इस बदले राजनीतिक घटनाक्रम को कांग्रेस के लिए एक बड़ा अवसर भी बताया, बशर्ते पार्टी युवाओं की भाषा समझे और 2029 के विशाल वोट बैंक को साधने के लिए अपने सांगठनिक ढांचे में बदलाव करे।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का आंदोलन और ‘छात्रों की गूंज’: थरूर का तीखा आत्ममंथन

नीट-यूजी परीक्षा धांधली के खिलाफ जून से शुरू हुए छात्र आंदोलन ने देश भर में भूचाल ला दिया था। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बैनर तले जंतर-मंतर पर छात्रों के जुटान, शिक्षाविद सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन और फिर 20 जुलाई को हुए पुलिस बल प्रयोग ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया था। शशि थरूर ने इस बात को रेखांकित किया कि जिन मुद्दों को लेकर छात्रों ने जंतर-मंतर को हिलाकर रख दिया, वे मुद्दे कांग्रेस और राहुल गांधी काफी पहले से उठा रहे थे। राहुल गांधी ने कोटा, देहरादून और प्रयागराज जैसे प्रमुख शिक्षा केंद्रों में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए पेपर लीक और बेरोजगारी का मुद्दा उठाया था, लेकिन फिर भी जन-मानस में CJP जैसा उबाल देखने को नहीं मिला।

थरूर ने सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस को खुद से यह पूछना होगा कि आखिर उनसे कहां चूक हुई। क्या पार्टी युवाओं की नब्ज पकड़ने में असफल रही या फिर वह Gen-Z (नई पीढ़ी) की आवाज को ठीक से सुन नहीं पाई? उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के लिए केवल मुद्दों की पहचान कर लेना ही काफी नहीं होता, बल्कि उन मुद्दों को जन-आंदोलन का रूप देना और युवाओं के दिलों को छूना असली परीक्षा होती है। थरूर ने स्वीकार किया कि CJP के आंदोलन पर हुए पुलिस एक्शन ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया, जिससे युवाओं की आवाज और बुलंद हुई और कांग्रेस समेत सभी स्थापित दलों को इससे सबक लेने की जरूरत है।

2029 का सबसे बड़ा वोट बैंक और Gen-Z से जुड़ने की चुनौती

शशि थरूर ने भविष्य की राजनीति का खाका खींचते हुए चेतावनी दी कि 2029 के आम चुनावों में युवा और Gen-Z मतदाता देश का सबसे बड़ा एकल वोटिंग ब्लॉक (Largest Single Voting Bloc) बनने जा रहे हैं। ऐसे में अगर स्थापित राजनीतिक दल अब भी अपनी पुरानी कार्यशैली पर अड़े रहे, तो वे इतिहास के पन्नों में अप्रासंगिक होकर रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि आज के राजनीतिक दलों में नई पीढ़ी के युवाओं के लिए अपनी बात रखने और नीतियां बनाने के रास्ते बेहद सीमित हैं। पुराने पदानुक्रम (Hierarchies), वंशवाद और स्थापित नेताओं के पीछे महज ‘फुट सोल्जर’ या झंडा उठाने वाले कार्यकर्ता की भूमिका से Gen-Z संतुष्ट नहीं होने वाली।

थरूर ने स्पष्ट किया कि जब वे जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने गए थे, तो उनका मकसद कोई राजनीतिक भाषण देना नहीं था, बल्कि वे सिर्फ उन युवाओं के दर्द और अनुभवों को सुनने गए थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नेताओं को बोलने से ज्यादा सुनने की आदत डालनी होगी। यदि स्थापित दल युवाओं को केवल एक वोट बैंक की तरह देखेंगे और उन्हें संगठन में फैसले लेने का अधिकार नहीं देंगे, तो युवा अपने नए रास्ते खुद तलाश लेंगे। यही वजह है कि CJP जैसे गैर-पारंपरिक आंदोलनों को देश भर के युवाओं का अचानक इतना व्यापक समर्थन मिला।

उपचुनावों के नतीजों से उम्मीद की किरण: कांग्रेस के लिए क्या है बड़ा मौका?

हालाँकि अपनी पार्टी को आईना दिखाने के साथ-साथ शशि थरूर ने आने वाले चुनावी भविष्य को लेकर एक सकारात्मक और रणनीतिक तस्वीर भी पेश की। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए उपचुनावों के परिणाम और देश के राजनीतिक मिजाज में आ रहा बदलाव कांग्रेस के लिए एक बेहतरीन मौका लेकर आया है। थरूर ने मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने हिंदी पट्टी के इस मजबूत गढ़ को अपने पास बरकरार रखकर यह साबित किया है कि पार्टी का जनाधार पूरी तरह सुरक्षित है और मतदाता विकल्प की तलाश में हैं।

इसके साथ ही उन्होंने भाजपा के तीन दशक से अधिक पुराने मजबूत किले में हुई हार और अन्य क्षेत्रीय घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय चुनाव प्रणाली की सबसे अच्छी बात यह है कि यहां अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं। अगले साल यानी मार्च में कई महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, और इन राज्यों में कांग्रेस के पास जीत दर्ज करने की पूरी क्षमता मौजूद है। थरूर के अनुसार, अगर कांग्रेस कॉकरोच पार्टी के आंदोलन से उपजे जन-आक्रोश को सही दिशा में मोड़ सके और युवाओं के भरोसे को जीत सके, तो इन चुनावी मुकाबलों में पार्टी ऐतिहासिक वापसी कर सकती है।

‘जागने और वक्त की आहट सुनने का समय’: थरूर की नेताओं को नसीहत

शशि थरूर ने अपने संबोधन में तमाम राजनीतिक दलों को “वक्त की आहट सुनने” (Wake up and smell the coffee) की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा हैं और यह किसी विभाजन के लिए नहीं बल्कि आम सहमति बनाने का जरिया होते हैं। Gen-Z और Gen-Alpha की शिकायतें पूरी तरह जायज हैं और उनकी नीयत पर शक नहीं किया जा सकता। अगर बातचीत के स्थापित रास्तों से युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तो वे सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे, जैसा कि CJP के आंदोलन में देखा गया।

इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर एक नई रणनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। एक तरफ जहां राहुल गांधी लगातार युवाओं और छात्रों के बीच पहुंचकर संवाद कर रहे हैं, वहीं थरूर के इस कड़वे लेकिन व्यावहारिक आकलन ने पार्टी को अपनी रणनीति में तेजी से बदलाव करने पर मजबूर कर दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस CJP आंदोलन से मिले इस ‘वेक-अप कॉल’ को एक नए राजनीतिक मौके में तब्दील कर पाती है या फिर युवाओं का यह नया आंदोलन भारतीय राजनीति के स्थापित समीकरणों को हमेशा के लिए बदलकर रख देगा।

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