
वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के सेनापति और पराक्रम, ऊर्जा, भूमि, साहस तथा रक्त के कारक ग्रह मंगल देव का गोचर अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के नियमों के अनुसार, जब मंगल देव अपनी नीच राशि यानी कर्क राशि में प्रवेश करते हैं, तो उनकी शुभ ऊर्जा और सकारात्मक प्रभाव में भारी कमी आ जाती है। जल तत्व की राशि कर्क में अग्नि तत्व के स्वामी मंगल का बैठना ग्रहीय उथल-पुथल का कारण बनता है। सितंबर महीने में होने वाला नीचस्थ मंगल का यह गोचर 4 चुनिंदा राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां लेकर आ रहा है।
नीच के मंगल के प्रभाव से व्यक्ति के भीतर अत्यधिक क्रोध, गलत निर्णय लेने की प्रवृत्ति, कार्यक्षेत्र में शत्रु बाधा, दुर्घटना के योग और आर्थिक नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में समय रहते सतर्कता बरतना और ज्योतिषीय नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
नीचस्थ मंगल के प्रभाव से इन 4 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, मंगल का यह गोचर मुख्य रूप से 4 राशियों के जातकों के जीवन में परेशानियां खड़ी कर सकता है। आइए विस्तार से समझें कि किन राशियों को किन-किन क्षेत्रों में संभलकर रहने की जरूरत है।
मेष राशि: घरेलू तनाव और संपत्ति विवाद की आशंका मेष राशि के स्वामी स्वयं मंगल देव हैं, लेकिन अपनी नीच राशि में गोचर के दौरान वे मेष राशि के जातकों को मानसिक रूप से विचलित कर सकते हैं। इस अवधि में पारिवारिक जीवन में वाद-विवाद और कलह की स्थिति बन सकती है। माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं। भूमि, मकान या वाहन के क्रय-विक्रय में कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों के साथ तीखी बहस से बचें, अन्यथा आपकी छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
मिथुन राशि: आर्थिक घाटा और वाणी पर नियंत्रण की चुनौती मिथुन राशि के जातकों के लिए नीचस्थ मंगल धन और वाणी भाव को प्रभावित करेंगे। इस दौरान किसी भी नए प्रोजेक्ट या शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे क्षेत्रों में बड़ा निवेश करने से बचें। अनावश्यक खर्चों के चलते पारिवारिक बजट बिगड़ सकता है। बातचीत करते समय अपने शब्दों का चयन बहुत सावधानी से करें, क्योंकि आपकी कड़वी वाणी बने बनाए रिश्तों और व्यापारिक साझेदारियों को बिगाड़ सकती है।
कर्क राशि: स्वभाव में आक्रामकता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं मंगल देव कर्क राशि में ही नीच के होते हैं, इसलिए इस राशि के लग्न भाव में मंगल का बैठना जातक के स्वभाव को अत्यंत उग्र और अधीर बना सकता है। अत्यधिक क्रोध के कारण आप अपने महत्वपूर्ण अवसर खो सकते हैं। रक्तचाप (ब्लड प्रेशर), सिरदर्द या पेट से जुड़ी पुरानी बीमारियां दोबारा उभर सकती हैं। वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें और सड़क पर किसी भी प्रकार के विवाद से खुद को दूर रखें।
मकर राशि: दांपत्य जीवन में अनबन और साझेदारी में नुकसान मकर राशि में मंगल उच्च के होते हैं, लेकिन कर्क राशि में नीच का होकर जब वे मकर राशि पर सप्तम दृष्टि डालेंगे, तो इसका सीधा असर दांपत्य और वैवाहिक जीवन पर पड़ेगा। जीवनसाथी के साथ छोटी-छोटी बातों पर तनाव बढ़ सकता है। साझेदारी में चल रहे व्यापार में साझेदार पर अत्यधिक भरोसा करने से बचें, अन्यथा आर्थिक धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं। कोई भी महत्वपूर्ण अनुबंध करने से पहले दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच कर लें।
नीचस्थ मंगल के दुष्प्रभाव से बचने के आसान और अचूक उपाय
मंगल देव के नकारात्मक प्रभावों को शांत करने और राहत पाने के लिए कुछ सरल ज्योतिषीय उपाय अपनाए जा सकते हैं। प्रत्येक मंगलवार को हनुमान मंदिर जाकर हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें और सिंदूर का चोला या चमेली का तेल अर्पित करें। इसके अतिरिक्त शिवलिंग पर लाल मसूर की दाल और कच्चा दूध अर्पित करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। मंगलवार के दिन तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) और क्रोध से पूरी तरह दूर रहें तथा जरूरतमंदों को गुड़, तांबे के बर्तन या लाल वस्त्रों का दान करें।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया