नई दिल्ली। दिल्ली के कथित शराब घोटाले में कानूनी जंग अब अदालती कमरों से निकलकर जजों की निष्पक्षता पर बहस तक पहुंच गई है। दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा इन दिनों देश की सुर्खियों में हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (आप) ने उनकी बेंच पर अविश्वास जताते हुए केस ट्रांसफर करने की मांग कर दी है। आखिर कौन हैं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा और क्यों उनके फैसलों पर ‘आप’ ने ‘भगवा कनेक्शन’ का आरोप लगाया है?
विवाद की जड़: ‘पिक्चर अभी बाकी है’ वाले बयान पर रार
अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर मांग की है कि उनका केस जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से हटा दिया जाए। विवाद तब बढ़ा जब भाजपा नेताओं ने अदालती कार्यवाही के बीच ‘पिक्चर अभी बाकी है’ जैसे बयान दिए। ‘आप’ का आरोप है कि भाजपा नेताओं को शायद पहले से पता है कि फैसला क्या आने वाला है। पार्टी ने सीधे तौर पर जस्टिस शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उनके और भाजपा के बीच ‘रिश्ते’ की जांच की बात कह दी है।
शानदार करियर: 24 साल की उम्र में बनीं मजिस्ट्रेट
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का न्यायिक करियर बेहद प्रभावशाली रहा है। दिल्ली हाई कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, उन्होंने न्यायपालिका के हर पायदान पर अपनी योग्यता साबित की है:
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शुरुआत: मात्र 24 साल की उम्र में उन्होंने मजिस्ट्रेट के रूप में न्यायिक सेवा शुरू की।
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सेशंस जज: अपने 35वें जन्मदिन तक वह सेशंस जज के पद पर पहुंच गई थीं।
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अनुभव: उन्होंने सीबीआई (CBI) के विशेष जज, फैमिली कोर्ट की प्रिंसिपल जज और महिला कोर्ट जैसी महत्वपूर्ण अदालतों की अध्यक्षता की है।
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नियुक्ति: 28 मार्च 2022 को उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था।
शिक्षा और डिग्रियों का भंडार: मार्केटिंग से लेकर पीएचडी तक
जस्टिस शर्मा को न्यायपालिका की सबसे पढ़ी-लिखी जजों में से एक माना जाता है। उनकी शैक्षणिक योग्यता किसी को भी हैरान कर सकती है:
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दिल्ली यूनिवर्सिटी: दौलत राम कॉलेज से बीए (ऑनर्स)।
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कानून की पढ़ाई: 1991 में एलएलबी और 2004 में एलएलएम की डिग्री।
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हटके डिग्रियां: उन्होंने मार्केटिंग मैनेजमेंट, विज्ञापन (Advertising) और पब्लिक रिलेशंस में डिप्लोमा भी किया है।
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डॉक्टरेट: साल 2025 में 4 साल की कड़ी रिसर्च के बाद उन्होंने पीएचडी (PhD) की उपाधि हासिल की।
लेखिका भी हैं जस्टिस शर्मा: महिलाओं के लिए लिखी किताब
न्याय देने के अलावा जस्टिस शर्मा को लिखने का भी शौक है। उन्होंने अब तक चार किताबें लिखी हैं। उनकी चर्चित किताब ‘डोंट ब्रेक आफ्टर ब्रेक अप’ उन महिलाओं के लिए एक मार्गदर्शिका है, जो अकेले रहने का फैसला करती हैं या कठिन रिश्तों से बाहर निकलती हैं। वह न्यायिक शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी सक्रिय रही हैं।
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