
बॉलीवुड की बेबाक क्वीन और वर्तमान में राजनीति के गलियारों में सक्रिय अभिनेत्री कंगना रनौत अक्सर अपने बयानों, राजनीतिक टिप्पणियों और साथी कलाकारों पर तीखे हमलों को लेकर सुर्खियों में रहती हैं। लेकिन इस बार कंगना खुद अपने ही पुराने काम और बयानों के जाल में घिरती नजर आ रही हैं। हिंदी सिनेमा और टेलीविजन जगत की जानी-मानी वरिष्ठ अभिनेत्री कुनिका सदानंद ने कंगना रनौत के दोहरे मापदंडों की पोल खोलते हुए उन पर जोरदार हमला बोला है। कुनिका ने सोशल मीडिया पर कंगना का वर्षों पुराना रक्षाबंधन से जुड़ा एक व्यावसायिक विज्ञापन साझा करते हुए उनके बदले हुए तेवरों पर सीधे सवाल दागे हैं।
कुनिका सदानंद का यह वीडियो और पोस्ट इंटरनेट पर आते ही तेजी से वायरल हो गया है। उन्होंने बेहद तीखे और व्यंग्यात्मक अंदाज में मशहूर डायलॉग ‘तेरा कुत्ता टॉमी, साड्डा कुत्ता कुत्ता’ का इस्तेमाल करते हुए कंगना से पूछा है कि जब वे खुद अपने करियर के शुरुआती दौर में ऐसे विज्ञापन कर रही थीं, तब उनकी नैतिकता और भारतीय संस्कृति की परिभाषा कहां सोई हुई थी?
‘तेरा कुत्ता टॉमी…’: कुनिका सदानंद का कंगना पर तीखा तंज
वरिष्ठ अभिनेत्री कुनिका सदानंद ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो और कंगना के पुराने विज्ञापन की क्लिप साझा की। कुनिका ने कहा कि आज जब कंगना फिल्म इंडस्ट्री के अन्य कलाकारों पर ब्रांड प्रमोशन, विज्ञापनों और फिल्मों की चॉइस को लेकर लगातार उंगली उठाती हैं और खुद को भारतीय संस्कृति की एकमात्र रक्षक घोषित करती हैं, तो उन्हें अपने पुराने दिनों को भी याद कर लेना चाहिए।
कुनिका ने तंज कसते हुए कहा, “इंडस्ट्री में जब आप खुद काम की तलाश में थीं और पैसे कमाने के लिए हर तरह के कमर्शियल प्रोजेक्ट्स कर रही थीं, तब वह सब जायज और प्रोफेशनल था। लेकिन आज जब कोई दूसरा कलाकार अपनी रोजी-रोटी या कमर्शियल कमिटमेंट्स के लिए कोई विज्ञापन करता है, तो आप उस पर देश, धर्म और संस्कृति को नीचा दिखाने का ठप्पा लगा देती हैं। यह तो वही बात हो गई कि ‘त्वड्डा कुत्ता टॉमी और साड्डा कुत्ता कुत्ता!’ यह पाखंड और दोहरा रवैया अब जनता को समझ में आने लगा है।”
क्या है वह पुराना रक्षाबंधन विज्ञापन, जिस पर मचा बवाल?
कुनिका ने जिस वीडियो क्लिप को साझा किया है, वह कंगना रनौत के करियर के शुरुआती दौर का एक बहुचर्चित कमर्शियल ऐड है। यह विज्ञापन रक्षाबंधन के त्योहार के इर्द-गिर्द बुना गया था, जिसमें कंगना अपने ऑन-स्क्रीन भाई के साथ नजर आ रही थीं और एक खास ब्रांड के उत्पाद का प्रचार कर रही थीं।
उस विज्ञापन में कंगना ने बड़े ही सहज और चुलबुले अंदाज में अभिनय किया था, जो उस समय के टीवी विज्ञापनों का एक सामान्य हिस्सा था। कुनिका का तर्क है कि आज वही कंगना अन्य अभिनेताओं द्वारा किए जाने वाले विज्ञापनों, विदेशी ब्रांड्स के प्रचार या त्योहारों पर बनने वाले विज्ञापनों की पटकथा को ‘एंटी-कल्चर’ या ‘विदेशी षड्यंत्र’ बताकर बायकॉट करने की वकालत करती हैं। कुनिका ने स्पष्ट किया कि हर कलाकार का एक संघर्ष का समय होता है और किसी को भी अपने वर्तमान रुतबे के घमंड में दूसरों के काम को हेय दृष्टि से देखने का अधिकार नहीं है।
संस्कृति, राष्ट्रवाद और विज्ञापनों पर कंगना का बदला हुआ रुख
कंगना रनौत पिछले कुछ वर्षों में लगातार बॉलीवुड के ए-लिस्ट सितारों को निशाने पर लेती रही हैं। चाहे वह फेयरनेस क्रीम के विज्ञापन हों, विदेशी परिधानों के ब्रांड हों या फिर त्योहारों के दौरान चलने वाले प्रगतिशील विज्ञापनों की थीम हो, कंगना ने हमेशा अन्य सितारों पर यह आरोप लगाया है कि वे पैसों के लिए भारतीय परंपराओं को बदनाम करते हैं। कंगना ने कई साक्षात्कारों में यह दावा भी किया है कि उन्होंने करोड़ों रुपये के विज्ञापनों के ऑफर सिर्फ इसलिए ठुकरा दिए क्योंकि वे उनके नैतिक सिद्धांतों से मेल नहीं खाते थे।
कुनिका सदानंद ने इसी दावे पर प्रहार करते हुए कहा कि जब किसी कलाकार के पास नाम, शोहरत और राजनीतिक सत्ता आ जाती है, तब करोड़ों के ऑफर ठुकराना आसान हो जाता है। लेकिन जब कोई कलाकार इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहा होता है, तब वह काम को काम की तरह देखता है। कंगना को यह नहीं भूलना चाहिए कि वे भी इसी रास्ते से गुजरकर आज इस मुकाम तक पहुंची हैं, इसलिए दूसरों पर उंगली उठाने से पहले उन्हें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।
कुनिका सदानंद: तीन दशकों से बेबाकी के लिए जानी जाने वाली अदाकारा
कुनिका सदानंद भारतीय सिनेमा और टीवी की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में से हैं जो पर्दे पर अपने नकारात्मक और गंभीर किरदारों के लिए पहचानी जाती हैं। 90 के दशक की ब्लॉकबस्टर फिल्मों जैसे ‘हम साथ साथ हैं’, ‘बेटा’, ‘गुमराह’, ‘खिलाड़ी’ और धारावाहिक ‘स्वाभिमान’ में उनके किरदारों को आज भी याद किया जाता है। अभिनय के अलावा कुनिका एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता और कानून की समझ रखने वाली मुखर महिला मानी जाती हैं।
वे इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दों पर हमेशा बिना किसी डर के अपनी राय रखती रही हैं। कुनिका ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं बोल रही हैं, बल्कि इंडस्ट्री के भीतर बढ़ रही ‘सेलेक्टिव हिपोक्रेसी’ (चुनिंदा पाखंड) के खिलाफ आवाज उठा रही हैं। उनका मानना है कि एक वरिष्ठ कलाकार और सांसद होने के नाते कंगना को इंडस्ट्री के युवा और संघर्षरत कलाकारों के प्रति अधिक सहानुभूति और परिपक्वता दिखानी चाहिए।
सोशल मीडिया पर बंटी जनता: छिड़ी तीखी बहस
कुनिका सदानंद के इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया दो धड़ों में बंट गया है। कंगना के आलोचकों और कई सामान्य यूजर्स ने कुनिका के रुख का जोरदार समर्थन किया है। लोगों का कहना है कि कंगना अक्सर अपनी सुविधानुसार नैरेटिव बदलती हैं और अपने पुराने विवादित विज्ञापनों व फिल्मों को पूरी तरह नजरअंदाज कर देती हैं।
वहीं दूसरी ओर, कंगना रनौत के प्रशंसकों का तर्क है कि हर इंसान समय के साथ परिपक्व होता है। उनके समर्थकों का कहना है कि यदि कंगना ने करियर की शुरुआत में कोई विज्ञापन किया था और बाद में अपनी सोच में सुधार करते हुए ऐसे प्रोजेक्ट्स से दूरी बना ली, तो इसे पाखंड नहीं बल्कि व्यक्तिगत विकास और आत्ममंथन कहा जाना चाहिए।
सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और बॉलीवुड का बदलता परिदृश्य
यह पूरा विवाद इस बात को रेखांकित करता है कि आज के दौर में इंटरनेट के पास हर किसी के अतीत का डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद है। जब कोई मशहूर हस्ती सार्वजनिक मंचों से नैतिकता, संस्कृति और आदर्शों का उपदेश देती है, तो जनता तुरंत उसके पुराने बयानों और प्रोजेक्ट्स को खंगालने लगती है।
बॉलीवुड में विज्ञापनों को लेकर होने वाला यह विवाद कोई नया नहीं है, लेकिन जब राजनीति और विचारधारा का तड़का इसमें लग जाता है, तो यह व्यक्तिगत हमलों में तब्दील हो जाता है। कुनिका सदानंद द्वारा उठाया गया यह मुद्दा यह साबित करता है कि ग्लैमर की दुनिया में अपने अतीत से भागना किसी भी सितारे के लिए संभव नहीं है, और दूसरों को आईना दिखाने से पहले खुद के आईने को साफ रखना बेहद जरूरी है।
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